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दुनिया की सबसे शक्तिशाली चीज This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

दुनिया की सबसे शक्तिशाली चीज

एक सुबह, जैसे ही मिस्टर त्रिपाठी आफिस पहुंचे, उन्होंने देखा कि कर्मचारियों में ग्रुप डिस्कशन चल रही है। मुद्दा था- दुनिया में सबसे शक्तिशाली चीज आखिर क्या है। मिस्टर त्रिपाठी ने, सभी कर्मचारियों को डांट दिया, और कहा- क्या फालतू सवाल पूछ कर समय बर्बाद कर रहे हो। सब लोग उदास मन से वापस अपने-अपने काम पर लग गए। शाम को चाय के वक्त, कैफे में सब लोग एकसाथ बैठे थे। मिस्टर त्रिपाठी ने सभी के काम की तारीफ की। अपनी प्रशंसा सुनकर, सभी खुश हो गए, लेकिन उन सभी को, मिस्टर त्रिपाठी का ये बर्ताव अजीब लगा। सब ये सोच रहे थे कि सुबह एक मामूली सवाल पर डांट दिया और अब प्रशंसा कर रहे हैं।

जिंदगी में आपको, कैसे-कैसे लोग मिलेंगे This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

जिंदगी में आपको, कैसे-कैसे लोग मिलेंगे

मिसेज त्रिपाठी, खाना बना रही थीं। और कंचन भी किचन में उनकी हेल्प कर रही थीं। न जाने उसके दिमाग में अचानक, क्या ख्याल आ गया। अपनी मम्मी से पूछती है- कि कोई अच्छी बात हो, कोई सीक्रेट हो या कुछ भी। हमें किस ke साथ शेयर करना चाहिए। मतलब- किस इनसान पर भरोसा करके, उसे सब बता सकते हैं। जो हमें, सही रास्ता बता सके।

Hiroshima and Nagasaki Day This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Hiroshima and Nagasaki Day

हिरोशिमा और नागासाकी का नाम सुनते ही आपके जहन में क्या आता है। एक धमाका, चारों तरफ आग, युद्ध की कीमत चुकाते निर्दोष नागरिक और मौन चीखें, जो आज तक गूंज रही हैं। साइंस का ये काला अध्याय और ओपेनहाइमर का पश्चाताप। 1939 में जब हिटलर ने पोलैंड पर आक्रमण किया, तो शुरुआत हुई दूसरे विश्व युद्ध की। लेकिन इसका अंत इतना डरावना था कि सिर्फ 2 दिन में जापान के लाखों लोग मारे गए थे। मशरूम के आकार का आसमान में एक गुब्बार दिखा, जिसे देखकर कोई ये नहीं समझ पाया कि वो क्या है। लेकिन ये दुनिया का पहला परमाणु बम था। मिनटों में जापान का हिरोशिमा और नागासाकी शहर, तबाह हो गया था। चारों तरफ आग, कंकरीट की इमारतों के अलावा, हर चीज जलकर राख हो गई। जापान को भी इस पर विश्वास नहीं हो रहा था कि एक बम इतनी तबाही कैसे मचा सकता है। उसी की याद में, हर साल 6 अगस्त को हिरोशिमा दिवस और 9 अगस्त को नागासाकी दिवस मनाया जाता है।

National Handloom Day This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

National Handloom Day

मूंगा सिल्क साड़ी, कांजीवरम सिल्क, फुलकारी और न जाने कितने ही ऐसे हैंडलूम प्रोडक्ट। हाथ से बुनी इन चीजों को देखकर, क्या आपको भी कभी लगता है कि बुनकर ने ये पैटर्न, डिजाइन कैसे बनाए होंगे। इन प्रोडक्ट्स के साथ हमारा एक इमोशनल कनैक्शन है, जो हमें हमारी विरासत से जोड़ता है। हैंडलूम का इतिहास सालों पुराना है, जो भारत में ही शुरू हुआ था। लेकिन 1920 के दशक में, जब पॉवरलूम आ गए, यानी मशीनें, तब पारंपरिक भारतीय हैंडलूम का पतन हो गया। उस समय ब्रिटिशों ने, हाथ से बुनी इन चीजों पर बैन लगाकर, भारत की संस्कृति को दबाने की कोशिश की थी।

तोड़ना आसान है, लेकिन जोड़ना मुश्किल This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

तोड़ना आसान है, लेकिन जोड़ना मुश्किल

एक बार, मिस्टर त्रिपाठी, टेलर की दुकान पर गए। वो शहर के सबसे पुराने दर्जी थे। उनके पास, आधुनिक मशीनें नहीं थी। जमीन पर रखी छोटी मशीन से कपड़े सिलते, लेकिन फिर भी, उनके जैसे कपड़े कोई और टेलर नहीं बना पाता था। इसलिए, मिस्टर त्रिपाठी ने भी उनसे कुर्ता बनवाने का सोचा। वो दर्जी कुछ सिल रहे थे, इसलिए मिस्टर त्रिपाठी को, कुछ देर इंतजार करने को बोला।

International Friendship Day This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

International Friendship Day

हम से हर किसी का कोई न कोई दोस्त जरूर होता है। घर, मोहल्ले, स्कूल या ऑफिस में। इसी यारी को समर्पित है आज का दिन। क्योंकि आज दुनियाभर में इंटरनेशनल फ्रेडशिप डे या फ्रेंड्स डे मनाया जा रहा है। हमारी हर सेलिब्रेशन के पीछे कोई न कोई किस्सा या कहानी जरूर होती है। इसकी भी एक दिलचस्प कहानी है। अब से लगभग, 100 साल पहले, 1919 के करीब, ग्रीटिंग कार्ड नेशनल एसोसिएशन ने फ्रेंडशिप डे के नाम से कार्ड बनाने का प्लान बनाया, ताकि ग्रीटिंग कार्ड की सेल बढ़ सके। उन्हें लगा कि दोस्त हर किसी के होते हैं, इसलिए लोग खुशी से उन्हें खरीदेंगे। इसके लिए 1930 में हॉलमार्क कार्ड्स इंक कंपनी ने कार्ड्स के जरिए पहली बार 2 अगस्त को फ्रेंडशिप डे मनाया था। लेकिन ये विचार ज्यादा चला नहीं।

Munshi Prem Chand Jayanti This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Munshi Prem Chand Jayanti

प्रेमचंद यानी कहानियों के सम्राट। लेकिन जिन्हें हम प्रेमचंद के नाम से जानते हैं, उनका असली नाम धनपत राय है। उनके चाचा उन्हें नबाव बुलाते थे, तभी उनकी शुरुआती रचनाएं नबाव नाम से भी हैं। लेकिन अपने एक दोस्त के सुझाव पर उन्होंने प्रेमचंद उपनाम रख लिया। जिसके बाद उनकी हर रचना इसी नाम से प्रकाशित हुई। साल 1880 और तारीख थी- 31 जुलाई, जब बनारस के एक छोटे से गांव लमही में उनका जन्म हुआ था। माता का नाम आनन्दी देवी और पिता मुंशी अजायब राय लमही के डाकघर में काम करते थे।

Kargil Vijay Diwas This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Kargil Vijay Diwas

कारगिल युद्ध को, आज 24 साल हो गए हैं। इस युद्ध को जीतकर, भारत की सेनाओं ने पाकिस्तान को आइना दिखाया था- अपनी ताकत का। लेकिन कारगिल युद्ध के पीछे की कहानी, आखिर क्या थी। दरअसल, 13 अप्रैल 1984 को भारत ने, ऑपरेशन मेघदूत चलाया था, जिसे जीतकर भारत ने सियाचिन ग्लेशियर पर कब्जा कर लिया था। इस ग्लेशियर के जरिए पाकिस्तान, लेह, लद्दाख और चीन पर नजर रखना आसान था। इसलिए, ये ग्लेशियर रणनीतिक और भौगोलिक तौर पर बहुत फायदेमंद है। और इसी की चाहत में, साल 1999 में पाकिस्तानी सेना ने, कारगिल जिले पर भारतीय सेना की पोस्टिंग पर कब्जा कर लिया। असल में उसका टारगेट, कारगिल पर कब्जा करके सियाचिन ग्लेशियर को क्लेम करना था।

Khordad Sal This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Khordad Sal

आज का दिन, पारसियों के लिए बहुत खास है। क्योंकि आज हम, खोरदाद साल त्योहार मना रहे हैं, जो कि पैगंबर जोरोस्टर का जन्मदिन है। नवरोज पारसी कैलेंडर का न्यू ईयर है। और नवरोज के 6 दिन बाद ही, हम खोरदाद साल त्योहार मनाते हैं। इस दिन पवित्र अग्नि में चन्दन की लकड़ी चढ़ाने की परंपरा भी है। यानी कहीं न कहीं, भारत का हर धर्म प्रकृति से जुड़ा है। असल में, पारसी धर्म में एक साल 360 दिन का होता है। यानी बाकी 5 या 6 दिन, पारसी लोग 'गाथा' करते हैं। गाथा का मतलब है- अपने पूर्वजों को याद करने का दिन। इस धर्म के इतिहास की बात करें, तो पारसी धर्म ईरान का है। ये फारसियों के वंशज हैं। जब इस्लाम धर्म के लोगों ने ईरान पर कब्जा कर लिया, तो ज्यादातर पारसियों को मजबूरन इस्लाम कबूल करना पड़ा। लेकिन कुछ पारसी लोग, अपने धर्म को बचाने के लिए, ईरान छोड़कर भारत में बस गए। कहते हैं 10 सदी के आसपास, पारसी भारत में आए थे।

Income Tax Day This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Income Tax Day

इनकम टैक्स का नाम आपने भी सुना होगा। या हो सकता है आप भी इससे परेशान हों। लेकिन इनकम टैक्स की शुरुआत आखिर कब और कैसे हुई? सन 1857 के विद्रोह के बारे में, हर भारतीय जानता है। इसने भारत की आजादी का अलख जगाया, लेकिन इस विद्रोह की वजह से, ब्रिटिश सरकार को फाइनांशियली बहुत नुकसान हुआ था। और उसी नुकसान की भरपाई के लिए, इस क्रांति के 3 साल बाद, यानी 1860 में सर जेम्स विल्सन ने भारतीयों पर इनकम टैक्स लगा दिया। ये 24 जुलाई को लागू हुआ था, उसी की याद में, आज हम इन्कम टैक्स डे मना रहे हैं। हां ये अलग बात है कि, ये दिन पहली बार, साल 2010 में मनाया गया था, क्योंकि उस वक्त भारत में आयकर के 150 साल पूरे हुए थे।

National Broadcasting Day This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

National Broadcasting Day

आज हमारे पास टीवी, मोबाइल और खासकर, इंटरनेट है, लेकिन एक जमाना था- रेडियो का। जो दुनिया की तमाम खबरों से लेकर, पंसदीदा गाने लोगों को सुनाता था। आज सोशल मीडिया और इंटरनेट के यूज के लिए किसी पर कोई लीगल बैन नहीं है, लेकिन उस जमाने में बिना लाइसेंस के, रेडियो भी नहीं सुन सकते थे। रेडियो के इस सफर की बात करें, तो ब्रिटिश वैज्ञानिक James Clerk Maxwell ने रेडियो के आविष्कार की शुरुआत की। और आख़िरकार सन 1896 में गुलिएल्मो मार्कोनी ने रेडियो का आविष्कार कर दिया। दुनिया में सबसे पहला रेडियो स्टेशन New York शहर में बना था।

दार्शनिक सुकरात This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

दार्शनिक सुकरात

रोज की तरह, डिनर के बाद, मिस्टर त्रिपाठी चायवाले की दुकान पर गए। बैंच पर बैठे, चाय की चुस्कियों का आनंद ले रहे थे, कि एक आदमी उनके पास आ कर बैठ गया। उसी कॉलोनी का था। कहने लगा- मैंने आपके दोस्त -मिस्टर वर्मा, के बारे में कुछ बातें सुनी हैं, जो मैं आपको बताना चाहता हूं। मिस्टर त्रिपाठी ने कहा- इससे पहले तुम कुछ बताओ, अच्छा होगा कि हम फिल्टर कर लें। उन्होंने उसे कहा- क्या तुम्हें विश्वास है कि जो तुम कहने जा रहे हो, वो सच है? वो आदमी बोला- नहीं, दरअसल मैंने ये किसी से सुना है”

Lokmanya Balgangadhar Tilak This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Lokmanya Balgangadhar Tilak

मराठी का एक कथन, जिसने आजादी के भारतीय संग्राम को और बुलंद कर दिया था- "स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा!" केशव गंगाधर तिलक, जिन्हें अक्सर बाल गंगाधर तिलक कहा जाता है। ये उन्हीं का नारा था। एक पत्रकार, शिक्षक और खासकर लाल बाल पाल तिकड़ी बनाने वाले, तीन लोगों में से एक थे- बाल गंगाधर तिलक। उनका जन्म, 23 जुलाई 1856 को बॉम्बे प्रेसीडेंसी के रत्नागिरी में हुआ था। यानी आज जो महाराष्ट्र है। वो एक मराठी ब्राह्मण परिवार से थे। पिता का नाम श्री गंगाधर तिलक और माता पार्वती बाई गंगाधर थीं। 1871 में, उनके पिता चल बसे। पिता के निधन से कुछ समय पहले ही, उनकी शादी सत्यभामा से हो गई थी। उस समय उनकी उम्र करीब 16 साल थी। बाल गंगाधर तिलक के 3 बच्चे थे।

Muharram This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Muharram

आज से मुहर्रम शुरू हो रहा है। यानी नए साल की शुरुआत, क्योंकि ये इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना है। लेकिन मुहर्रम, दुख और शोक का महीना भी है। क्योंकि आज से लगभग 1400 साल पहले, करबला यानी सीरिया की जंग हुई थी, जिसमें हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 फोलोअर्स ने, इस्लाम और मानवता की रक्षा के लिए, अपनी कुर्बानी दी थी। हजरत इमाम हुसैन, इस्लाम धर्म के संस्थापक, हजरत मुहम्मद साहब के छोटे नवासे थे। दरअसल, मुआविया की मौत के बाद, उनका बेटा यजीद गद्दी पर बैठना चाहता था। लेकिन वो बहुत अत्याचारी था। अपने अहंकार में, यजीद इतना अंधा हो चुका था, कि वो अल्लाह को भी नहीं मानता था! और लोगों को डरा धमका कर, उस इलाके पर राज करने लगा।

Nelson Mandela International Day This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Nelson Mandela International Day

दक्षिण अफ्रीका के नायक- नेल्सन मंडेला, किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। 1940 के दशक में, गांधी जी की लीडरशिप में, भारत अपनी आजादी के लिए लड़ रहा था, तो दक्षिण अफ्रीका के मूल निवासी अपनी ही धरती पर बेगानों की तरह, रहने को मजबूर थे। उन लोगों के लिए, वही नेल्सन मंडेला मसीहा बनकर आए, जिन्हें बचपन में उनके शरारती स्वभाव के कारण, टाउन में ट्रबलमेकर नाम से बुलाया जाता था। उनका जन्म, 18 जुलाई 1918 को दक्षिण अफ्रीका के केप प्रांत में उम्टाटा के म्वेजो गांव में हुआ था। जब वो 12 साल के थे, तब उनके पिता का देहांत हो गया था। उन्होंने कानून में अपनी पढ़ाई पूरी की और दक्षिण अफ्रीका के पहले अश्वेत वकील बने।

संगति का असर This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

संगति का असर

एक दिन, मिसेज त्रिपाठी मार्केट गईं। कंचन भी उनके साथ थी। मार्केट में, कंचन को उसके दोस्त मिल गए। मिसेज त्रिपाठी ने कंचन को कहा- मैं, सामान खरीद लेती हूं, उतनी देर, तुम उनसे बात कर लो। कुछ देर बाद, उनकी शॉपिंग हो गई, और वापिस आईं। और कंचन को साथ लेकर, घर की ओर चल दीं। घर पहुंच कर उन्होंने कंचन को कहा- दोस्तों का चुनाव सोच समझ कर करना चाहिए। कंचन समझ गई थी कि मम्मी को दोस्तों का, सिगरेट पीना पसंद नहीं आया।

World Population Day This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

World Population Day

पूरी दुनिया के लिए, आज का दिन, बहुत मायने रखता है, क्योंकि 1987 में आज के ही दिन, दुनिया की पॉपूलेशन 5 अरब हो गई थी। उसी दिन को याद रखते हुए, यूनाइटेड नेशंज ने, साल 1989 में ​विश्व जनसंख्या दिवस मनाने का फैसला किया था। जिसके बाद, 11 जुलाई 1990 को ये दिन पहली बार मनाया गया। इसका उद्देश्य, reproductive health और family planning के लिए लोगों को अवेयर करना था, ताकि ओवरपॉपूलेशन के बर्डन से बचा जा सके। लेकिन आज, धरती पर इंसानों की आबादी लगभग 800 करोड़ हो गई है। अब तक, पॉपूलेशन के मामले में, चीन, पूरी दुनिया में, पहले नंबर पर था। बढ़ती पॉपूलेशन के खतरे को देखते हुए चाइना ने, वन चाइल्ड पॉलिसी अपानाई। लेकिन 2015 में उसे, 2 child पॉलिसी लानी पड़ी, क्योंकि चीन में वर्किंग पॉपूलेशन कम होने लगी थी।

भगवान आपकी मदद क्यों नहीं करते This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

भगवान आपकी मदद क्यों नहीं करते

मिस्टर त्रिपाठी के पिता, काफी आध्यात्मिक हैं। रोज सुबह शाम पूजा-पाठ करते। ये देखकर उनकी धर्मपत्नी कहती हैं- तुम भगवान को इतना मानते हो, लेकिन परेशानी में, वो तुम्हारी मदद तो करते नहीं। पूजा-अर्चना करने के बाद, पत्नी के पास आए और बोले। मैं, तुम्हें एक कहानी सुनाता हूं। एक बार, एक गांव में बाढ़ आ गई। लोग जान बचाकर भागने लगे। एक संत पेड़ के नीचे तपस्या में लीन थे, लोगों ने उन्हें, साथ चलने को कहा। पर संत ने कहा-”तुम लोग अपनी जान बचाओ, मुझे तो मेरे भगवान बचाएंगे।” कुछ देर में वहां, एक नाव और एक हेलीकॉप्टर आया, लेकिन संत ने, उनकी मदद भी नहीं ली। बस यही कहते रहे -मुझे तो मेरे भगवान बचाएंगे। कुछ ही देर में, वो संत पानी में बह गए और उनकी मृत्यु हो गयी।

NITI AYOG This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

NITI AYOG

अगस्त 1947 में, जब भारत आजाद हुआ, तो हमारे लिए सबसे बड़ी समस्या यह थी- कि देश का विकास कैसे होगा। लगभग 200 साल की गुलामी के बाद एक नया भारत बना था, एक डेमोक्रेटिक देश। इसे चलाने के लिए संविधान भी बनने लगा था। लेकिन विकास के लिए कौन सा गवर्निंग सिस्टम अपनाया जाए, ये नेताओं के लिए, एक बड़ा चैलेंज था। इसलिए, समाजवादी और पूंजीवादी व्यवस्था को मिश्रित तौर पर अपनाया गया। और नेताओं ने, पंचवर्षीय योजनाओं के जरिए, देश के विकास का सुझाव रखा। इस सपने को पूरा करने के लिए, 15 मार्च, 1950 को, भारत के पहले प्रधान मंत्री- जवाहर लाल नेहरू के नेतृत्व में, तत्कालीन भारत सरकार ने एक कार्यकारी संस्था बनाई, जिसका नाम था- प्लानिंग कमीशन यानी योजना आयोग। भारत ने, प्लानिंग कमीशन का आइडिया रूस से, अडॉप्ट किया था। ये एक गैर संविधानिक निकाय था। इसके 2 मेन काम थे। पहला पंचवर्षीय योजनाएं बनाना और दूसरा- डिफरेंट मिनिस्ट्रीज और राज्यों को, पैसा आवंटित करना। लगभग 65 साल तक ये आयोग, देश का योजना वाहक बना रहा, लेकिन 17 अगस्त 2014 को इसे भंग कर दिया गया। जिसके बाद, 1 जनवरी 2015 को 'National Institution for Transforming India यानी ''नीति आयोग'' ने इसकी जगह ले ली। ये मिनिस्ट्री ऑफ प्लानिंग के तहत आता है! इसका मूल दर्शन : सहकारी संघवाद यानी Cooperative Federalism है। ये सरकार का थिंक टैंक है। नीति आयोग के उद्देश्य: नीति आयोग, मानता है कि विकसित राज्य ही, एक विकसित देश बना सकते हैं। इसलिए इसका उद्देश्य, विभिन्न राज्यों के मैकेनिज्म में सुधार करके, उन्हें एकसाथ लाना है। ग्रामीण भारत के लिए योजनाएं बनाना और नेशनल से लेकर, ग्लोबल लेवल पर इनोवेशन और रिसर्च को बढ़ावा देना और एग्रीकल्चर सेक्टर का विकास करना है। इसका एक उद्देश्य ग्लोबल लेवल पर, भारत के मुद्दों को उठाना भी है। नीति आयोग के 7 स्तंभ हैं- Pro-people (जनपक्षधर) Pro-activity (समर्थक गतिविधि) Participation (भाग लेना) Empowering (सशक्तीकरण) Inclusion of all (सबका समावेश) Equality (समानता) Transparency (पारदर्शिता)

Shravan Maas This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Shravan Maas

19 साल बाद, ऐसा हुआ है कि सावन, 2 महीने रहने वाला है। इस बार सावन में 8 सोमवार आ रहे हैं। श्रावण का पवित्र महीना, हिंदुओं के लिए बहुत खास है। और खासकर, महादेव के भक्तों के लिए। सावन को लेकर शिव पौराणिक कथाओं की मानें, तो इस दिन भगवान शिव अपने ससुराल आते हैं। ये भी मान्यता है क जब समुद्र मंथन में, शिव ने, हलाहल विष को अपने कंठ में समाहित कर सृष्टि की रक्षा की थी। उस विष के प्रभाव को कम करने के लिए सभी देवी-देवताओं ने उन्हें जल अर्पित किया था। इसलिए, आज भी, भगवान शंकर के भक्त, उन्हें जल अर्पित करते हैं। भक्तों का, भगवान शिव के प्रति इतनी श्रद्धा और विश्वास है, वो मीलों लंबी कांवड़ यात्रा करते हैं। कांवड़ एक तरह का लकड़ी या खासकर, बांस के पोल की तरह होता है। इसकी लंबाई आमतौर पर लगभग 5 से 6 फीट होती है। भक्त व्रत करते हैं और गंगा, यमुना जैसी पवित्र नदियों से, कांवड़ में जल भरकर लाते हैं और शिव को अर्पित करते हैं।

Guru Purnima This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Guru Purnima

भगवान कृष्ण के गुरु महर्षि सांदीपनि, श्री राम के गुरु ऋषि वशिष्ठ, और भगवान बुद्ध के गुरु - विश्वामित्र। यानी भगवान को भी गुरु की जरूरत पड़ी थी, तो हमें भी किसी न किसी गुरु की जरूरत पड़ती है। चाहे फिर भगवान को apna गुरु मान लें, या parivaar को। ज्ञान हमें, पूर्ण बनाता है। और ये ज्ञान हमें, किससे मिलता है- परिवार, शिक्षक, आध्यात्मिक गुरुओं और समाज से! गुरु का मतलब ही, अंधकार को दूर करने वाला है। हम सभी की जिंदगी में कोई न कोई ऐसा इनसान जरूर होता है, जिसे हम अपना रोल मॉडल मानते हैं, जो हमें नॉलेज देता है, अवेयर करता है, परेशानी में हमें, राह दिखाता है। वही, आपके गुरु हैं।

हमारे सही होने से सामने वाला गलत नहीं हो जाता This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

हमारे सही होने से सामने वाला गलत नहीं हो जाता

कंचन और आनंद झगड़ रहे थे। एक कहता- मैं, सही हूं, और दूसरा कहता- तुमने गलत उत्तर दिया है। असल में, कंचन ने किताब में से कुछ पढ़ा और आनंद ने वही चीज, ऑनलाइन पढ़ी। दोनों ही जगह, आधी जानकारी थी। इसलिए, दोनों, खुद को सही साबित करने में लगे थे। तभी उनकी मम्मी कमरे में आती हैं, और झगड़े का कारण जानने के बाद, कहने लगी। तुम्हारी हालत, 3 अंधे दोस्तों के जैसी है। दोनों पूछने लगे- मतलब क्या है इसका। वो कहती हैं- एक बार 3 अंधे आदमी थे। जब उन्हें पता चला कि गांव में, एक हाथी आया है। तो तीनों सोचने लगे कि हम देख नहीं सकते, लेकिन हाथ लगा कर देखते हैं, आखिर ये हाथी होता कैसा है! तीनों ने हाथी को, टच करके देखा।

GST Day This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

GST Day

जैसे घर चलाने के लिए, पैसे की जरूरत होती है, वैसे ही देश चलाने के लिए, सरकार को भी पैसे की जरूरत पड़ती है। इसके लिए सरकार, नागरिकों से टैक्स लेती है, और बदले में, उन्हें शिक्षा, बिजली, पानी, इन्फ्रास्ट्रक्चर और डेवलपमेंट आदि प्रोवाइड करवाती है। भारत में टैक्स, राजा-महाराजाओं के जमाने से वसूल किया जा रहा है। समय के साथ, टैक्स सिस्टम में कई बदलाव हुए hain। भारत की आजादी के बाद की बात करें, तो सरकार कई डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स लेती थी। लेकिन आज हम बात करेंगे, सिर्फ इनडायरेक्ट टैक्सेस की। और साल, 2017 में हुए एक बड़े बदलाव की, जिसने अप्रत्यक्ष करों के पूरे सिस्टम को बदल दिया। 29 मार्च, 2017 को, गुड्स् एंड सर्विस टैक्स अधिनियम, भारत की संसद में पारित हुआ। और 1 जुलाई को, भारत सरकार ने, जीएसटी लागू कर दिया। यानी गुड्स एंड सर्विस टैक्स। आसान शब्दों में कहें, तो सप्लाई चेन की हर स्टेज पर, वस्तु और सेवाओं पर value added टैक्स, जीएसटी है। यानी बिक्री के हर लेवल पर, जीएसटी लगाया जाता है। इसके पीछे सरकार का ये मानना था, कि जब भारत एक है, तो टैक्स भी एक ही होना चाहिए। इसलिए, वन नेशन- वन टैक्स के विजन के साथ, पूरे देश में जीएसटी लागू किया गया। जीएसटी का इतिहास: एक फ्रांसीसी थे, जिन्होंने पहली बार 1954 में जीएसटी के कांसेप्ट को, लागू किया था। और ये सफल भी हुआ! जिसके बाद, यूके, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों ने, इसी टैक्स सिस्टम को लागू किया। भारत में जीएसटी की यात्रा की बात करें, तो ये प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समय, साल 2000 में शुरू हुई, जब कानून का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए एक समिति बनाई गई। तब से इस कानून को बनने और लागू होने में 17 साल लग गए। हां ये अलग बात है कि, सन 2006 में, कांग्रेस सरकार में, वित्तमंत्री श्री पी. चिदंबरम ने भी, जीएसटी की चर्चा भारतीय संसद में की थी! फिर आखिरकार, साल 2017 आया, जब जीएसटी बिल लोकसभा और राज्यसभा में पास हो गया। और 1 जुलाई 2017 को, पूरे देश में, जीएसटी कानून लागू हुआ। जीएसटी काउंसिल: जीएसटी काउंसिल, गुड्स एंड सर्विस टैक्स को कंट्रोल करती है, जो केंद्र और राज्य सरकारों की एक जॉइंट बॉडी है। जीएसटी, किसी विशेष विभाग या मंत्रालय के अधीन नहीं है, बल्कि जीएसटी काउंसिल इसे मैनेज करती है। इस काउंसिल की अध्यक्षता “Union Finance Minister करते हैं। और वर्तमान में, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इसकी अध्यक्ष हैं, ! इस काउंसिल में, राज्यों और यूटीज के वित्त मंत्री या उनके प्रतिनिधि भी शामिल होते हैं। इसमें कुल 33 सदस्य हैं, जिनमें से 2 सदस्य केंद्र के हैं, और 31 सदस्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के विधानमंडल से हैं। गुड्स एंड सर्विस टैक्स में, किसी भी तरह का बदलाव, इसी काउंसिल के जरिए होता है। असल में, Central Board of Indirect Taxes and Customs और सभी राज्यों के GST Department, जीएसटी की इम्लीमेंटेशन के लिए जिम्मेदार है। आइए जानते हैं, जीएसटी की क्लेक्शन कैसे होती है। दरअसल, जीएसटी के जरिए, सरकार, टैक्स इकट्ठा करती है। लेकिन सवाल ये उठता है, कि सेंटर गर्वनमेंट, स्टेट, और यूटी में, टैक्स के अमांउट का बंटवारा कैसे होता है। 1) CGST : मतलब, Central goods and service tax. ये केंद्र सरकार के अधीन आता है। 2) SGST: स्टेट गुड्स एंड सर्विस टैक्स। ये अमाउंट राज्य सरकार के अंडर आता है। और ये राज्य के अंदर होने वाले लेन-देन पर लागू होता है। 3) UTGST: ये Union Territory Goods and Services tax है। जो केंद्र शासित प्रदेशों में वस्तुओं और सेवाओं के लेन-देन पर लागू होता है। यहां, ये ध्यान देने वाली बात है कि UTGST सिर्फ, बिना विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेशों पर लागू है। 4) IGST: मतलब इंटीग्रेटेड गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स। जो दो अलग-अलग राज्यों के बीच लेनदेन पर लगता है। और ये भी केंद्र सरकार के अधीन आता है।

Eid-Al-Adha Mubarak This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Eid-Al-Adha Mubarak

इस्लाम के, कुल 1 लाख 24 हजार पैगंबरों में से एक थे- हजरत इब्राहिम। वो 80 साल की उम्र में पिता बने थे। जब अल्लाह ने, उन्हें, अपनी सबसे प्यारी चीज कुर्बान करने को कहा, तब पैगंबर हजरत ने अपने बेटे को कुर्बान करने का फैसला लिया। अपनी औलाद की कुर्बानी, आखिर कौन देख सकता है, इसलिए पैगंबर हजरत ने आंखों पर पट्टी बांध कर, अपने बेटे की कुर्बानी दे दी। लेकिन अल्लाह का करिश्मा देखिए, जब उन्होंने आंखों से पट्टी हटाई, तो बेटे की जगह, एक बकरा कुर्बान हो गया था। और उनके बेटे के शरीर पर एक खरोंच, तक नहीं थी। ये घटना इस बात का साक्ष्य है कि जब हम, पूरी श्रद्धा और भक्ति से, अपने ईश्वर पर विश्वास करते हैं, उन्हें अपना मानते हैं, तो वो भी हमारे साथ कभी गलत नहीं होने देते। बुरे समय में, वो हमारी परीक्षा लेते हैं, पैगंबर हजरत की तरह, जो डगमाए नहीं, उन पर अल्लाह की नेमत बरसती है।

दुनिया में कोई भी परफेक्ट नहीं है This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

दुनिया में कोई भी परफेक्ट नहीं है

रोज शाम की तरह, आज भी मिस्टर त्रिपाठी, सोसायटी के नुक्कड़ में बनी, चाय की दुकान पर पहुंचे। साथ में उनके पड़ोसी दोस्त भी थे। वो अक्सर यहां चाय पीने आते, और उन सभी में, दुनियाभर की बातें होती। आज इसी गपछप में, सब एक-दूसरे की कमियां गिना रहे थे। बाकी सभी ने तो, मजाक में लिया, लेकिन उनमें से एक आदमी बुरा मान गया। गुस्सा करने लगा। तब, उनमें से एक ने कहा- काफी समय की बात है। एक आदमी, दूर कुएं पर पानी लेने जाता था। 2 घड़े ले जाता, जिन्हें वो डंडे में बाँधकर अपने कंधे के दोनों तरफ लटका लेता। एक घड़े में, छेद था। इसलिए, सिर्फ डेढ़ घड़ा पानी ही घर पहुंचता। उस आदमी से माफी मांगते हुए, वो घड़ा कहता है- मुझे जितना पानी घर पहुँचाना चाहिए था, उसका आधा ही पहुंचा पाता हूँ, मेरे अन्दर ये बहुत बड़ी कमी है।

International Widows Day This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

International Widows Day

प्रेम की कहानियों में, एक बंधन इतना गहरा और अटूट है, कि वो वक्त की सीमाओं से भी परे है। एक पति-पत्नी का रिश्ता। विश्वास, करुणा और आपसी समझ के धागों से बुना ये रिश्ता, इतना मजबूत होता है, कि जिंदगी के हर तूफान को हरा देता है। लेकिन हार जाता है उस वक्त, जब दोनों में से एक साथी, दुनिया छोड़ कर चला जाता है। और पीछे छूट जाता है, एक अधूरा और बिखरा हुआ जीवनसाथी। हमारे भारतीय समाज में पत्नी अपने, पति के रहते, अगर संसार छोड़ कर चली जाती है, तो उसे सौभाग्यशाली समझा जाता है। ताकि उन्हें पति के न रहने पर, समाज की रूढि़यों जैसी तमाम परेशानियां न झेलनी पड़ें। इसकी एक और वजह ये भी है कि उन्हें जिंदगीभर सुहागिन होने का सौभाग्य मिलता है। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों को मानें, तो आज दुनिया भर में, 258 मिलियन से ज्यादा विधवाएँ हैं। इन्हीं महिलाओं के साहस और शक्ति का जश्न मनाने के लिए, आज हम अंतर्राष्ट्रीय विधवा दिवस मना रहे हैं। इसकी शुरुआत, साल 2005 में लूंबा फाउंडेशन ने की थी। लेकिन संयुक्त राष्ट्र ने, आधिकारिक तौर पर, इसे साल 2011 में, पहली बार, मनाया था।

International Yoga Day This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

International Yoga Day

दुनिया को, भारत ने एक बहुत अहम चीज di है। योग। ये दुनिया की सबसे पुरानी फिटनेस और वेलनेस प्रथाओं में से एक है। लगभग 5 हजार साल पुरानी। 27 सितंबर, 2014 में, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने, यूएन जेनरल असेंबली यानी संयुक्त महासभा में, योग दिवस का विचार रखा था। तकरीबन, 177 देशों ने इसे, स्वीकार कर लिया। और महज तीन महीने के अंदर, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का ऐलान कर दिया गया। और इस तरह, साल 2015 में 21 जून को, पहली बार, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया। जिसमें 35 हजार से ज्यादा लोगों ने, दिल्ली के राजपथ पर 21 योगासन किए। भारत का ये रिकॉर्ड गिनीज world records बुक में दर्ज किया गया है। और तब से, ये दिन, हर साल दुनिया भर में मनाया जाता है। इसके लिए, 21 जून का दिन, इसलिए चुना गया, क्योंकि ये दिन साल का सबसे लंबा दिन होता है, जिसे लोग ग्रीष्म संक्रांति भी कहते हैं। भारतीय परंपरा के मुताबिक, ग्रीष्म संक्रांति के बाद सूर्य दक्षिणायन होता है। माना जाता है कि सूर्य का दक्षिणायन होना, आध्यात्मिक सिद्धियां पाने के लिए फायदेमंद है।

Jagannath Rath Yatra This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Jagannath Rath Yatra

भारत के चार धाम हैं- बद्रीनाथ, द्वारका, जग्गनाथ पुरी और रामेश्वरम। उड़ीसा के भुवनेश्वर में, बंगाल की खाड़ी के किनारे, पुरी के मंदिरों में, भगवान जगन्नाथ का मंदिर बसा है। भारत के इस प्रसिद्ध मंदिर की रथ यात्रा, आज शुरू हो रही है। ये यात्रा हर साल, आषाढ़ शुक्ल की द्वितीया तिथि को आरंभ होती है। इसके इतिहास की कहानी काफी पुरानी है। ब्रह्म पुराण, पद्म पुराण, स्कंद पुराण और कपिला संहिता में भी, इसका जिक्र मिलता है। इसे लेकर कई मान्यताएं हैं। कुछ लोगों के अनुसार, भगवान जगन्नाथ साल में एक बार, अपने भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा के साथ अपने जन्मस्थान मथुरा जाने की इच्छा रखते थे, ताकि वो उन्हें रथ में बिठाकर, पूरी मथुरा दिखा सकें। एक कथा ये भी है। कि भगवान कृष्ण और बलराम को मारने के लिए उनके मामा कंस ने उन्हें मथुरा आमंत्रित किया। और अक्रूर को रथ के साथ गोकुल भेजा था।

West Bengal Day This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

West Bengal Day

पश्चिम बंगाल राज्य, भारत की, पूर्व दिशा में है। कोलकाता इसकी राजधानी है, जो ब्रिटिश रूल के समय, पूरे भारत की राजधानी भी रही है। जब अंग्रेज भारत में आए, तो उस समय बंगाल दिल्ली के सुलतान के नियंत्रण में था। 1757 के बाद, धीरे-धीरे बिहार और उड़ीसा समेत, बंगाल भी, अंग्रेजों के नियंत्रण में आ गया। सन 1905 में, अंग्रेजों ने बंगाल का बटवारा कर दिया, लेकिन लोगों के विरोध की वजह से, सन 1911 में, ब्रिटिशों को, बंगाल को फिर से एक करना पडा़। भारत की आजादी के समय, 20 जून 1947 को, बंगाल के हिंदुओं ने, भारत में विलय का फैसला किया था। साल 1971 के युद्ध के बाद पूर्वी पाकिस्तान आजाद होकर बांग्लादेश बन गया, और और उसी का जो पश्चिमी हिस्सा था, वो भारत का पश्चिम बंगाल राज्य बना। ये, क्षेत्रफल के हिसाब से 14वां और जनसंख्या के मामले में, चौथा सबसे बड़ा राज्य है। इसके पड़ोस में- नेपाल, सिक्किम, भूटान, असम, बांग्लादेश, ओडिशा, झारखण्ड, बिहार राज्य है। इसकी विधानसभा सीटों की संख्या 294 है। और 42 लोकसभा सीटें हैं।

भगवान है या नहीं This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

भगवान है या नहीं

एक नाई की दुकान में, दुनियाभर की बातें चल रही थीं, कोई राजनीति को लेकर बोल रहा था, तो कोई सिनेमा और भ्रष्टाचार को लेकर। मिस्टर त्रिपाठी भी, वहां मौजूद थे। अचानक वहां, भगवान के अस्तित्व को लेकर बात होने लगी। नाई ने कहा, “देखिये, आपकी तरह मैं तो, भगवान के अस्तित्व को नहीं मानता”। एक आदमी बोला- “ ऐसा क्यों?” निराशा और थोड़े क्रोध में नाई बोला- अस्पतालों में बीमार लोग, सड़कों पर अनाथ बच्चे। अगर भगवान होते, तो किसी को कोई दर्द-तकलीफ नहीं होती। आप ही बताइए, कहां हैं भगवान। वो आदमी, चुप हो गया। नाई की इस बात का, उसके पास कोई जवाब नहीं था।

Father’s Day This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Father’s Day

रोटियां बनाने वाले हाथों को सलाम, लेकिन आज हम रोटियां कमाने वाले हाथों को चूमेंगे। क्योंकि आज फादर्स डे है। इस दिन का इतिहास 1908 में, अमेरिका से शुरू हुआ था। सोनोरा स्मार्ट डोड ने, अपने पिता के सम्मान में, पहली बार ये दिन मनाया था। ये लोकप्रिय तब हुआ, जब साल 1972 में राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने इसे, हर साल मनाने की घोषणा की। और तब से, हम, हर साल, जून के तीसरे रविवार को फादर्स डे मनाते हैं। जिस तरह, मां की ममता और प्रेम है, उसी तरह एक पिता का बलिदान, संघर्ष और ताकत है। चाहे फाइनांशियल हो, या शारीरिक, भावनात्मक और मानसिक, एक पिता हमेशा अपने बच्चे के लिए सपोर्ट सिस्टम है।

मुसीबत से लड़ने का सही तरीका This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

मुसीबत से लड़ने का सही तरीका

शाम का समय था, कंचन पढ़ रही थी। लेकिन आजकल आनंद, कुछ खास पढ़ाई नहीं करता था। मिसेज त्रिपाठी ने उसे अपने पास बुलाया और समझाने के लिए, एक कहानी सुनाती हैं। कहती हैं- आईलैंड के नजदीक, एक गांव था, जहां आए दिन आंधी, तूफ़ान और बारिश होती थी। इसलिए बहुत से किसानों ने, खेती करना छोड़ दी। वहां एक बहुत साधारण, पतला-दुबला बूढ़ा किसान था। वो सुबह से शाम तक खेतों में मेहनत करता। धीरे-धीरे समय बीतता गया और फसल कटाई का समय आ गया। लेकिन एक शाम, अचानक तूफ़ान आ गया। वो किसान तेजी से उठा, हाथ में लालटेन ली

बेबस मां-बाप की कहानी This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

बेबस मां-बाप की कहानी

कंचन के दादा-दादी गांव में रहते हैं। एक दिन वो, शहर में रहने आए। उम्र के इस पड़ाव पर, वो काफी कमजोर हो चुके थे, उनके हाथ कांपते थे और दिखाई भी, कम देता था। शाम हुई, डायनिंग टेबल पर, सब लोग खाना खाने लगे। लेकिन उनके दादा-दादी को खाने में बड़ी दिक्कत हुई। कभी खाना, उनकी चम्मच से निकल कर फर्श पे बिखर जाता, तो कभी हाँथ से दूध या पानी छलक कर मेजपोश पर गिर जाता। ये देखकर, बहु-बेटे को अनकंफरटेबल लगता था। इसलिए मिसेज त्रिपाठी अब से, उन्हें कमरे में ही खाना देने लगी। उनकी जरूरत की सभी चीजें, कमरे में रख दीं, जिससे उनका सारा दिन कमरे में अकेले निकल जाता।

अच्छाई या दिखावा This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

अच्छाई या दिखावा

शाम को लॉन में बैठकर, मिसेज त्रिपाठी और उनकी पड़ोसन बातें कर रही हैं। किसी दूसरी औरत की चर्चा हो रही है। उनकी पड़ोसन कहती है- वो बहुत चालाक है, और अच्छा होने का दिखावा करती है। ठीक, एक शिकारी की तरह। मिसेज त्रिपाठी ने मतलब पूछा, तो वो कहती हैं कि - एक समय की बात है। एक पेड़ की शाखा पर, एक चिडि़या और चिड़ा बैठा था। किसी को आते देखकर चिडि़या बोली- चलो उड़ जाते हैं, वरना ये इनसान हमें मार देगा। चिड़ा बोला- इसका लिबाज देखो, ये एक अच्छा इनसान लग रहा है। इसे देखकर, लगता नहीं ये शिकारी है, तुम डरो मत।

लालच और जरूरत में क्या फर्क है This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

लालच और जरूरत में क्या फर्क है

किसी भी चीज की शुरुआत, छोटे स्तर से ही होती है। आज, मिसेज त्रिपाठी ने, जैसे ही बच्चों को पॉकेट मनी दी, तो आनंद नाराज हो गया। कहने लगा- कंचन की तुलना में उसे बहुत कम, पैसे मिलते हैं। सिर्फ यही नहीं, वो लगभग हर बात पर, ऐसी तुलना किया करता था। कभी खाने को भी कुछ दिया जा रहा हो, तब भी। ये देखकर मिसेज त्रिपाठी को लगा कि उसे लालच नहीं करना चाहिए। इसलिए उसे प्यार से समझाने लगीं। कहती हैं- एक बार, एक शेर को, बहुत भूख लगी थी। लेकिन बहुत गर्मी पड़ रही थी, फिर भी, वो शिकार पर निकला। काफी देर के बाद, उसे मिला भी, तो सिर्फ एक छोटा सा खरगोश।

कल का सोचकर, अपना आज खराब न करें This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

कल का सोचकर, अपना आज खराब न करें

मिस्टर त्रिपाठी को परेशान देखकर, मिसेज त्रिपाठी ने कारण पूछा। तो वो कहने लगे, बच्चों के भविष्य के बारे में सोच कर चिंता हो रही है! उनकी धर्मपत्नी, कहती हैं कि एक बार, एक राजा ने, एक जादूगर को जेल में डाल दिया, क्योंकि उसने, जादू से राजा का मुकुट गायब कर दिया था। उसकी पत्नी रोते हुए उससे मिलने आई। लेकिन जादूगर, आज भी खुश था। ये देखकर, वो बोली- तुम्हें 4 दिन बाद फांसी दे देंगे, और तुम्हें, हंसी सूझ रही है। जादूगर कहने लगा- अभी 4 दिन हैं ना, तब की तब देखेंगे। फिलहाल तो मैं, जिंदा हूं।

मुसीबत से जीतने का सही तरीका This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

मुसीबत से जीतने का सही तरीका

कंचन, नाश्ता करके जाना। मिसेज त्रिपाठी, कंचन को आवाजें लगा रही थीं, लेकिन कंचन, बहुत जल्दबाजी में थी। अभी घर से बाहर, निकलने ही वाली थी, कि तेज बारिश शुरू हो गई। ये देखकर, मिसेज त्रिपाठी, गर्मागर्म चाय और स्नैक्स लेकर आती हैं। नाश्ता करते हुए, कंचन कहती है ये प्रोबलम ही है, जो हमें आगे बढ़ने से रोकती हैं। अब देखो, आज मुझे इतना जरूरी काम था, लेकिन बारिश। बस इतना कह के, रुक गई। तब मिसेज त्रिपाठी ने कहा- मैं, तुम्हें एक कहानी सुनाती हूं। तुम्हारा नजरिया बदल जाएगा। "एक आदमी के पास, एक गधा था, उसकी रोजी-रोटी का एकलौता सहारा। एक दिन, वो गहरे गढ्ढे में गिर जाता है। वो आदमी, उसे बाहर निकालने के लिए, जी-जान लगा देता है, लेकिन नहीं निकाल पाता। सोचता है कि भूखा-प्यासा ये अंदर ही मर जाएगा, इससे बेहतर है कि मैं, इसे जिंदा दफना देता हूं।

World Day against Child Labor This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

World Day against Child Labor

रविंद्रनाथ टैगोर जी ने कहा था- दुनिया में, हर बच्चे का आना, इस बात का संदेश है कि ईश्वर, अभी मनुष्य से, निराश नहीं हुआ है। बच्चों को हम, भगवान का रूप मानते हैं। लेकिन, इंटरनेशनल लेबर ऑग्रेनाइजेशन के अनुसार, आज दुनियाभर में, 16 करोड़ से ज्यादा बच्चे, बाल मजदूरी में लगे हुए हैं। कुछ तो, सिर्फ 5 साल के हैं। इस डाटा की मानें, तो दुनिया भर में, हर 10 में से 1 बच्चा, चाइल्ड लेबर में लगा है। इसे रोकने के लिए, अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन ने, पहल की थी। साल 2002 में। और तब से हम, हर साल 12 जून को, बाल श्रम के खिलाफ विश्व दिवस मनाते हैं। भारत की बात करें, तो इस मुद्दे को लेकर, साल 1979 में पहली बार, एक समिति बनाई गई थी। नाम था- गुरुपदस्वामी समिति। इसकी सिफारिशों के आधार पर, बाल श्रम निषेध और विनियमन अधिनियम 1986 लाया गया।

दो दोस्तों की कहानी This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

दो दोस्तों की कहानी

शाम को, पार्क में खेलने के बाद, आनंद और उसका दोस्त राहुल, घर वापस आ रहे थे। चलते चलते, अचानक उनके बीच, किसी बात को लेकर, बहस हो गई और आनंद ने, राहुल को थप्पड़ मार दिया। राहुल को बहुत दुख हुआ, लेकिन उसने पलट कर कुछ नहीं कहा। बस, वहीं कच्ची सड़क पर, रेत में लिख दिया, 'आज मेरे दोस्त ने, मुझे थप्पड़ मारा।' और दोबारा, दोनों घर की ओर बढ़ने लगे। तभी गली में अचानक, एक कुत्ता उनके पीछे पड़ गया। आनंद तेज भागकर आगे निकल आया, लेकिन कुत्ता, राहुल पर झपट पड़ा। वो सहम गया, रोने लगा, ये देखकर, आनंद भागकर, वापस उसके पास पहुंचा। पास पड़ा एक डंडा उठाया और उस कुत्ते को भगा दिया।

आनंद में जीने का आसान तरीका This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

आनंद में जीने का आसान तरीका

मिस्टर त्रिपाठी के घर से अगले घर में, एक बुजुर्ग दंपत्ति रहते थे। वो बुजुर्ग महिला तो बहुत खुशमिजाज थी, लेकिन आदमी, काफी गुस्सैल स्वभाव का था। आसपास के लगभग, सब लोग उससे ऊब चुके थे, क्योंकि वो हमेशा उदास रहता, लगातार शिकायत करता। अब तक, हर किसी ने, उनकी पत्नि ने भी, उनकी जुबान से कड़वे शब्द ही सुने थे। किसी ने उन्हें मुस्कुराते हुए नहीं देखा। लोग भी हमेशा, उससे दूरी बनाकर, रखने में अपना भला समझते थे। लेकिन एक दिन, एक ऐसी घटना घटी, जिस पर लोगों को विश्वास नहीं हुआ। चारों तरफ, ये बात फैल गई कि वो बूढ़ा आदमी आज खुश है, मुस्कुरा रहा है और किसी की शिकायत भी नहीं कर रहा।

वास्तविक सुंदरता क्या है This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

वास्तविक सुंदरता क्या है

शहर के बीचों बीच, एक बाजार और उसके साथ ही, एक पार्क लगता है। रोजाना शाम को, यहां बच्चों की बहुत भीड़ होती है। यहां एक फेमस गुब्बारे वाला है। वो इसलिए प्रसिद्ध है, क्योंकि उसका गुब्बारे बेचने का, तरीका बहुत अनोखा है। जब भी उसका कारोबार, मंदा हो जाता, वो - एक हीलियम से भरे, गुब्बारे को हवा में छोड़ देता था। जब बच्चों की नजर, हवा में उड़ते उस रंगीन गुब्बारे की ओर जाती, तो सभी बच्चे गुब्बारा लेने की जिद्द करते। मजबूरन, उनके माता-पिता को, उन्हें एक गुब्बारा खरीदकर देना पड़ता। और उसकी बिक्री बढ़ जाती। एक दिन आनंद और उसके दोस्तों की टोली, गुब्बारे वाले के पास पहुंच गई। गुब्बारे वाले ने उससे पूछा, “तुम्हें कौन से रंग का गुब्बारा चाहिए?” उनमें से एक- मासूम छोटे लड़के ने, हवा में उड़ते हीलियम से

गुस्सा करने वाले, ये याद रखें This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

गुस्सा करने वाले, ये याद रखें

सुबह का वक्त था। घर के बाहर, लॉन में, मिस्टर त्रिपाठी, टहल रहे थे, कि अचानक, उनका एक पड़ोसी आया, उन्हें गुस्से में भला-बुरा कहने लगा। किसी पुरानी बात को लेकर, उनका बहुत झगड़ा हुआ। लेकिन जब उस आदमी का, गुस्सा शांत हुआ, तो उसे एहसास हुआ कि उसने बहुत बड़ी गलती कर दी है। अब उसे दुख हो रहा था कि, उसने किसी को इतना गलत कैसे बोल दिया। काफी परेशान था, इसलिए, अपने फैमिली के गुरु के पास गया और उन्हें सारी बात बताई। कहने लगा, मैं पश्चाताप करना चाहता हूं, कोई उपाय हो, तो बताएं। गुरु ने कहा- एक काम करो, 100 पंख इकट्टा करो और उन्हें एक चौराहे पर रख दो। उस आदमी ने, पंख इकट्टा करके, चौराहे पर रख दिए। और वापस गुरु के पास गया। जब वो वहां पहुंचा, तो गुरु ने उसे दोबारा कहा- अब जाओ, उन पंखों को मेरे पास लेकर आओ।

ईमानदारी क्यों जरूरी है This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

ईमानदारी क्यों जरूरी है

शाम को जैसे ही मिस्टर त्रिपाठी, घर पहुंचे। उन्होंने देखा- आनंद और कंचन में, जबरदस्त बहस हो रही है। उन्होंने कारण पूछा, तो दोनों एक-दूसरे पर इलजाम लगा रहे थे कि तुमने चीटिंग की है। उन्होंने बच्चों को लड़ने से रोक दिया। और ईमानदारी की अहमियत बताने के लिए एक कहानी सुनाने लगे। कहने लगे- एक कारपेंटर जब रिटायर होने वाला था, तो उसके ठेकेदार ने उसे एक घर गिफ्ट करने का सोचा। और उसे, घर बनाने को बोला। कारपेंटर थोड़ा दुखी हुआ, सोचने लगा कि 15 दिन में रिटायरमेंट है, और अब भी काम करवा रहे। लेकिन, फिर भी उसने ठेकेदार की बात मान ली और घर बनाना शुरू किया।

हर परिस्थिति में खुश रहें This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

हर परिस्थिति में खुश रहें

मिस्टर त्रिपाठी के ऑफिस में, एक सेमिनार चल रहा था। यंग इम्पलॉइज को मोटिवेट करने के लिए। एक अचीवर, जैसे ही स्टेज पर पहुंचा, पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। उन्होंने अपने, भाषण की शुरुआत ही, एक कहानी से की। कहने लगे- आज से बहुत साल पहले, एक साम्राज्य था। जिसमें, ये रूल था कि कोई भी व्यक्ति, राजा बन सकता है। लेकिन सिर्फ 5 साल के लिए। और उसके बाद, उस राजा को एक घने जंगल में, छोड़ दिया जाता था, मरने के लिए। 5 साल बाद, वहां एक नया राजा बना, और पहले वाले राजा को, जंगल में छोड़ दिया गया। जो भी लोग, राजा बनते थे, वो महल के एशोआराम में इतने खो जाते कि, भूल जाते थे कि 5 साल बाद, उनके साथ क्या होगा। लेकिन इस बार, जो नया राजा बना था, वो अपने सैनिकों को लेकर, उसी जंगल में गया। वहां देखा, तो कई जानवरों के साथ-साथ, मानव

अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकले This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकले

हम, जो कुछ भी अच्छा-बुरा, सीखते हैं, उसकी शुरुआत परिवार से ही होती है। हमेशा की तरह, आज भी डायनिंग टेबल पर, मिस्टर त्रिपाठी, बच्चों को, कुछ सिखा रहे हैं। कहानी सुनाते हैं- एक राजा की। जिसके पास बाज़ के 2 बच्चे थे। जब वो बड़े हुए, तो उनमें से एक आसमान में उड़ता, और दूसरा, हमेशा बागीचे में, एक पेड़ की डाल पर बैठा रहता। एक दिन, अचानक, राजा ने देखा कि दोनों बाज, आसमान में उड़ रहे थे। ये देखकर राजा बहुत खुश हुआ। उसने दरबारियों से पूछा कि ये कारनामा किसने किया। तब वो एक किसान को लेकर आए।

Guru Hargobind Singh Jayanti This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Guru Hargobind Singh Jayanti

सिखों के छठे गुरु- गुरु हरगोबिंद सिंह जी, जिन्होंने पहली सिख सेना बनाई। दिन था- 21 अषाढ़, संवत 1652 यानी 19 जून, 1595 का, जब पंजाब के पसिद्ध शहर- अमृतसर के वडाली गांव में, इनका जन्म हुआ था। वो पांचवें सिख गुरु, गुरु अर्जन देव जी के इकलौते पुत्र थे। पिता की शहादत के बाद, 25 मई, 1606 को, गुरु हरगोबिंद सिंह जी गद्दी पर बैठे। उस वक्त उनकी उम्र, महज 11 साल थी। लगभग 38 साल तक, वो इस पद पर बने रहे। वो, अपने साथ हमेशा मीरी और पीरी नाम की दो तलवारें रखते थे। एक तलवार धर्म की और दूसरी, राजसत्ता की प्रतीक थी। साल, 1609 में, उन्होंने अमृतसर में श्री हरमंदिर साहिब के ठीक सामने- श्री अकाल तख्त साहिब बनवाया। इसके जरिए, वो ये संदेश देना चाहते थे कि- संसार में वास्तविक राज्य परमात्मा का है। अमृतसर के पास लोहगढ़ नाम का किला, भी उन्हीं का बनवाया हुआ है।

जो हार नहीं मानता, उसकी जीत पक्की है This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

जो हार नहीं मानता, उसकी जीत पक्की है

दोपहर का समय था। घर का काम निपटा कर, अभी मिसेज त्रिपाठी, लिविंग रूम में जाकर बैठी ही थीं, कि घर की डोरबेल बजती है। उन्होंने दरवाजा खोला, तो उनकी पड़ोसन थी। उन्होंने, उसे अंदर बुलाया और दोनों बातें करने लगीं। वो पड़ोसन कहती है कि हमारी एक मन्नत पूरी हुई थी, इसलिए हम, मंदिर गए थे। यहां से 500 किलोमीटर दूर है। ट्रेन की टिकेट बुक की, लेकिन ट्रेन मिस हो गई। सोचा गाड़ी में जाएंगे, आगे गाडि़यों की हड़ताल लगी थी। एक के बाद, एक मुसीबत आई, लेकिन हमने ठान लिया था की कैसे भी पहुंचना है। इसलिए, अंत में बस लेने का सोचा। बस्टॉप पहुंचे, तो सौभाग्य से हमें, बस मिल गई।

Sant Kabir Das Jayanti This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Sant Kabir Das Jayanti

पोथि पढ़-पढ़ जग मुआ, पंडित भया न कोए ढाई आखर प्रेम के, पढ़ा सो पंडित होए कबीर जी कहते हैं कि किताबें पढ़ कर दुनिया में कोई भी ज्ञानी नहीं बना है। बल्कि जो प्रेम को जान गया, वही दुनिया का सबसे बड़ा ज्ञानी है। 15वीं शताब्दी के मध्य, लगभग 1398 और 1440 के बीच का समय था, जब उत्तर प्रदेश के, काशी में उनका जन्म हुआ था। लेकिन उनके जन्म से लेकर, पूरी जिंदगी को लेकर, लोगों की अलग-अलग राय है। कबीर जी की शिक्षा की बात करें, तो उन्होंने कोई औपचारिक शिक्षा नहीं ली। बुनाई करते थे, लेकिन उन्हें इसका भी कोई प्रशिक्षण नहीं मिला था। कबीर जी एक-रहस्यवादी कवि थे, और उनका खुद का जीवन भी, रहस्य से कम नहीं था।

जिंदगी में लक्ष्य बनाना क्यों जरूरी है This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

जिंदगी में लक्ष्य बनाना क्यों जरूरी है

पिछले कुछ दिनों से, मिस्टर त्रिपाठी, ऑफिस के काम में उलझे पड़े थे। वर्कलोड की वजह से, न तो सुबह ऑफिस जाने की कोई फिक्स टाइमिंग थी, और न शाम को लौटने की। लगभग, एक महीने से यही रूटीन चल रही थी। उन्हें कंचन की पढ़ाई की चिंता हो रही थी, इसलिए, एक शाम, उसके कमरे में गए। वो मोबाइल चला रही थी। पापा आए, तो फोन को साइड में रखकर उनसे, बातें करने लगी। उन्होंने कंचन को पूछा कि - तुम्हारी आगे की क्या प्लानिंग है। तुम्हारा लक्ष्य क्या है, क्या बनना है और कैसे? कंचन सोच में पड़ गई, कुछ देर बाद बोली। वो तो हो जाएगा, जो होना है। कुछ न कुछ तो, कर ही लूंगी।

कोशिश करने वालों की हार नहीं होती This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

कोशिश करने वालों की हार नहीं होती

एक दिन सोसायटी में, एक बड़ा फंक्शन हुआ। कई तरह के कॉम्पिटीशन करवाए गए। बच्चे, बड़े, और बुजुर्ग, सब ने बहुत इन्जॉय किया। कई प्रतियोगिताओं के बाद, बेस्ट अचीवमेंट, आइकन अवार्ड और मोस्ट इंपायरिंग अवॉर्ड जैसे कई, अवॉर्ड दिए गए। बैस्ट कपल का अवॉर्ड कंचन के मम्मी-पापा यानी 'मिस्टर और मिसेज त्रिपाठी' को मिला। प्रोग्राम खत्म होने के बाद, सब घर लौट आए। बहुत थके हुए थे, लेकिन रोज की तरह, आनंद के पापा उसके साथ, लुडो खेलने लगे। क्योंकि उन्हें फैमिली टाइम की अहमियत का पता है। पहली गेम हुई, उसके पापा जीत गए, दूसरी गेम खेली, वो फिर से जीत गए। तीसरी

Telangana Day This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Telangana Day

तेलंगाना, का इतिहास, लगभग 2,000 साल पुराना है। सातवाहन, काकतीय, इक्ष्वाकु, कुतुब शाही और आसिफ जाहिस जैसे कई शासको ने, इस पर शासन किया है। 1947 में जब भारत आजाद हुआ, तो जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल ने, हैदराबाद को भारत में मिलाने की कोशिश की, लेकिन निजाम उस्मान अली खान ने, भारत संघ में शामिल होने से, मना कर दिया। जिसका परिणाम ये हुआ कि, भारतीय सेना ने ''ऑपरेशन पोलो'' लाँच किया और निजाम ने हार मान कर, 17 सितंबर, 1948 को हमारी सेना के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। और इस तरह, हैदराबाद राज्य, भारतीय संघ में शामिल हो गया। साल 1956 में, तेलंगाना को, आंध्र प्रदेश में मिला दिया गया। लेकिन तेलंगाना में, अलग राज्य की मांग के लिए कई बड़े आंदोलन होने लगे। ये सब देखते हुए, साल 2013 में, मनमोहन

आपका रिस्पाँस आपको सफल बनाता है This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

आपका रिस्पाँस आपको सफल बनाता है

रात के भोजन के बाद, आनंद और उसके फैमिली मैंबर, लिविंग एरिया में बैठे थे। तभी अचानक, कंचन अपने पापा को पूछती है- कि जितने भी सफल लोग हैं, क्या कभी उनकी जिंदगी में परेशानियां आई होंगी। या फिर उनकी जिंदगी में, परेशानियां कम होती हैं, इसलिए वो सफल हो जाते हैं। तब उनके पापा ने कहा- परेशानियां तो हर किसी की जिंदगी में आती हैं, लेकिन उनके लिए आपका रिस्पाँस ही, एक फर्क लाता है। जो आपको, सफल बनाता है। अब भगवान राम को ही लें, तो जब उन्हें वनवास जाने का आदेश मिला, तो उन्होंने कहा- कब जाना है। वो ये भी

डर से भागो मत, उसका सामना करो This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

डर से भागो मत, उसका सामना करो

शाम के लगभग, 7 बज रहे थे। दिन की तेज धूप के बाद, अब कहीं जा कर, सब बच्चे, घर से बाहर निकले और पास के मैदान में खेलने लगे! तभी अचानक वहां, कुछ बंदर आ जाते हैं। उनसे बचने के लिए, सब बच्चे इधर-उधर भागने लगते हैं। जैसे ही, आनंद उसके दोस्त, घर की ओर भाग रहे थे, तभी बंदर भी उनके पीछे, तेजी से भागना शुरू कर देते हैं। कोई उन पर लपक रहा है, कोई उनकी चीजें छीनने की कोशिश कर रहा है। रास्ते में, उन्हें एक बुजुर्ग दिखे, उन्होंने बच्चों को बोला- तुम डरो मत, इनका सामना करो, तुम जितना ज्यादा इनसे डरोगे, ये तुम्हें उतना ही डराएंगे।

Ahilya Bai Holkar Jayanti This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Ahilya Bai Holkar Jayanti

भारत के शासकों में, अहिल्याबाई होल्कर एक ऐसा नाम हैं, जो शासन, साहस और विकास की मिसाल थीं। 31 मई, 1725 को, महाराष्ट्र के चांडी, गांव में मनकोजी सिंधिया और सुशिला सिंधिया के यहां, उनका जन्म हुआ था। उनके पिता गांव के प्रधान थे। यानी रानी अहिल्या, बचपन से किसी राजशाही वंश की नहीं थीं। असल में हुआ ये था, कि जब वो लगभग 8 साल की थीं, तब 1733 में, राजा मलहार राव के, बेटे खंडेराव से उनका विवाह हो गया। और इस तरह से एक आम सी लड़की- अहिल्या मालवा के राजमहल में पहुंच गई। उन्हें, जल्द ही महसूस हो गया- कि शिक्षित नहीं होने की वजह से, वो सही तरीके से काम नहीं कर पा रहीं। इसलिए, पढ़ाई करने का सोचा, लेकिन उस वक्त, लड़कियों को शिक्षा देना सही नहीं समझा जाता था। इस, प्रथा के जवाब में उन्होंने कहा था- कि पढ़ाई की देवी खुद एक महिला हैं, तो महिलाओं को शिक्षा का अधिकार क्यों नहीं। ये देखकर, ससुर मलहार राव ने, अहिल्या के

अहंकार को पहचानें और खत्म करें This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

अहंकार को पहचानें और खत्म करें

आनंद के पापा, अपने एक कॉलेज, दोस्त से मिलने गए। दोनों में, इस बात को लेकर चर्चा हुई- कि हमारा होना या न होना, फैमिली मैंबर्स के लिए कितना मायने रखता है। अगर हम ना रहें, तो हमारे बीवी, बच्चों का क्या होगा। स्ट्रगल, जैसी कई दिक्कतों का, वो कैसे सामना करेंगे। दोस्त से मुलाकात के बाद, जब घर लौटे- तो उसी उलझन में थे। इसलिए, एक संत से मिलने, गांव गए और उनसे, अपनी समस्या का समाधान पूछा। संत ने कहा- तुम्हारे अहंकार का समाधान बहुत आसान है। एक काम करो, 2 साल के लिए, किसी दूसरे शहर में चले जाओ और वो भी अपने परिवार को बिना बताए। वो कहने लगे- अगर मैं, बिना बताए गया, तो मेरे परिवार वाले परेशान हो जाएंगे। संत ने कहा- उसकी फिक्र मत करो, वो सब, मैं संभाल लूंगा।

Goa day This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Goa day

क्षेत्रफल के हिसाब से, भारत का सबसे छोटा राज्य- गोवा। जो अपने टूरिज्म के लिए, इतना प्रसिद्ध है, कि उसे पर्यटकों का शहर कहा जाता है। गोवा का नाम सुनते ही, दूर तक फैला समंदर, एक आधुनिक जीवनशैली, और खासकर, काजू से बनी लाजवाब फेणी, याद आती है। महाभारत में, इसका उल्लेख- गोपराष्ट्र के नाम से है। लगभग 400 सालों तक, पुर्तगालियों ने इस पर राज किया। पुर्तगालियों से पहले, तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में, ये मौर्य साम्राज्य का हिस्सा था, उसके बाद सातवाहन और चालुक्यों ने इस पर, शासन था। इसके कोस्टल एरिया की वजह से, ये राज्य- अरबी, फ़ारसी और चीनी व्यापारियों के लिए, बिजनेस का केंद्र था। 15 अगस्त, 1947 को, जब भारत आजाद हुआ, तो भारत सरकार ने, पुर्तगालियों से अनुरोध किया- कि अब, वो गोवा को आजाद कर दें। लेकिन, पुर्तगालियों

मां बाप के लिए बच्चे ही सब कुछ This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

मां बाप के लिए बच्चे ही सब कुछ

आनंद के पापा और उनकी कंपनी के कई सीनियर ऑफिसर, नजदीक के एक गांव में गए। असल में, सीएसआर सेशन था। गांव के लोगों को एजुकेट और अवेयर करने के लिए। गांव के कई लोग वहां आए। सेशन शुरू होने से पहले- आनंद के पापा ने एक बुजुर्ग आदमी को देखा। जब वो चल रहा था, तो जमीन पर खून के निशान थे, लेकिन वो समझ नहीं पा रहे थे। इस बुजुर्ग ने तो, जूते पहन रखे हैं, तो आखिर ये खून के धब्बे कैसे। वो बुजुर्ग के पैरों को देखने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन वो बुजुर्ग बार-बार उन्हें बातों में उलझा देता।

संतुलन प्रकृति का नियम है This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

संतुलन प्रकृति का नियम है

आनंद के पापा के ऑफिस में कई लोग काम करते हैं। उनका एक कर्मचारी, बहुत बढि़या काम करता था। लेकिन, उसे पिछले 2 साल से अप्रेजल नहीं मिला था। वो, अपने एक दोस्त से मिला और उसे, अपनी ये, अप्रेजल वाली प्रोबलम बताई। कि बॉस को बार बार कहने के बावजूद, वो उसकी सैलरी नहीं बढ़ा रहे। दोस्त ने सुझाव दिया- कि 1 दिन, बिना बताए, ऑफिस से छुट्टी कर लेना। अगले दिन उसने वैसा ही किया। और 1 दिन बाद, जब वो दोबारा ऑफिस आया, तो उसने देखा कि- उसके नहीं आने से, ऑफिस के कई काम रुके पड़े थे। फिर से अप्रेजल की बात की। लेकिन, इस बार, उसके बॉस को, मजबूरन उसकी सैलरी बढ़ानी पड़ी।

दूसरों की मदद करना सीखें This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

दूसरों की मदद करना सीखें

आनंद के पापा, ऑफिस के एक कर्मचारी से बहुत परेशान थे। असल में, वो अक्सर, ऑफिस देरी से आता था। और, जब कोई पूछे, तो कई किस्से सुना देता। शनिवार का दिन था, उन्होंने, उसे कहा- सोमवार से अगर तुम टाइम पर ऑफिस नहीं आए, तो मैं तुम्हारे खिलाफ एक्शन लूंगा। वो आदमी, स्वभाव से बहुत अच्छा था, इसलिए सिर्फ वॉरनिंग देकर जाने दिया। उसके बाद, कुछ दिन टाइम से ऑफिस आया। लेकिन एक दिन, दोबारा आधा घंटा लेट। जब वो ऑफिस पहुंचा- तो आनंद के पापा ने, उसकी बिना कोई बात सुने, उसे घर वापस जाने को बोल दिया। वो आदमी घर चला गया। खाली पड़ा था, उसके पास कुछ काम नहीं था, इसलिए सोचता है- हॉस्पीटल जाकर, क्यों न, उस लड़के को देखकर आता हूं, जिसे हॉस्पीटल पहुंचाने के चक्कर में वो, आज वो, ऑफिस के लिए लेट हुआ था।

खुश रहने का तरीका This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

खुश रहने का तरीका

एक दिन, आनंद के पापा, पार्किंग में गाड़ी पार्क करके, जैसे ही ऑफिस के अंदर जा रहे थे, एक सिक्योरिटी गार्ड, भागकर उनके पास आता है। और कहता है- साहब, आपका ये पर्स गिर गया था। आनंद के पापा ने देखा- तो सच में, वो उन्हीं का पर्स था। असल में, गाड़ी से निकलते वक्त, उनकी पॉकेट से नीचे गिर गया था। उन्होंने शुक्रिया कहा। गार्ड की ईमानदारी देखकर, 500 रुपए का नोट निकालकर, उसे देने लगे। लेकिन उसने लेने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा- तुम्हें, बहुत कम पैसे मिलते होंगे, इसे रख लो, तुम्हारे काम आएंगे। इस पर वो गार्ड कहता है कि - नहीं, मुझे जो सैलरी मिलती है, वही मेरे लिए काफी है।

सफलता का रहस्य This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

सफलता का रहस्य

आनंद की छुट्टियां चल रही थी। दिनभर टीवी देखता, मस्ती करता, लेकिन पढ़ाई नहीं करता था। ये देखकर, उसके पापा ने उसे एक किस्सा सुनाया। कहने लगे- एक आदमी बहुत आलसी था। काम नहीं करता था, बीवी के बहुत कहने के बाद, वो एक दिन काम ढूंढने निकला। लेकिन, उसे किसी ने काम पर नहीं रखा। शाम को घर लौटते वक्त, सोचने लगा- अब बीवी का सामना कैसे करूंगा। तभी उसने गली में देखा, वहां एक सांप मरा पड़ा था। उसने वो उठाया और अपने घर के अंदर चला गया। पति के हाथ में सांप देखकर, वो पूछने लगी- ये क्या है। उसके पति ने कहा- आज मैंने काम किया, ये उसी का फल है। ये सुनकर, उसकी पत्नी ने, सांप को, फूलों की कियारी में फेंक दिया। और भगवान से हाथ जोड़कर कहने लगी- आज मेरे पति, पहली बार काम करने निकले थे। इसका कुछ तो फल, जरूर देना।

शांत रहना सीखें This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

शांत रहना सीखें

छुट्टी का दिन था। अच्छी धूप खिल रही थी। गार्डन में मेज पर, चाय का एक कप रखा है। उस चाय की चुस्कियों का आनंद लेते हुए, कंचन के पापा, अखबार पढ़ रहे हैं। कंचन वहीं, पास में बैठकर पढ़ाई कर रही थी। और आनंद खेल रहा था। अचानक, उन दोनों में, किसी बात को लेकर झगड़ा हो गया। जोर-जोर से चिल्लाने लगे। एक-दूसरे को मारने लगे। उनके पापा ने, उन्हें शांत किया। लेकिन वो ये देखकर, बहुत निराश हुए। वो, घर के अंदर गए और 2 हीरे साथ लेकर, वापस लौटे। उन्होंने, हीरों को, धूप में, मेज पर रख दिया। कुछ देर बाद, उन्होंने, बच्चों को कहा- इसमें से एक हीरा, नकली है। तुम्हें बताना है कि कौन सा हीरा असली है।

Brother’s day This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Brother’s day

हम, हर साल 24 मई को ब्रदर्स डे मनाते हैं। साल, 2005 में, अमेरिका में इसकी शुरुआत हुई थी और आज, भारत समेत, कई देश, इस दिन को सेलिब्रेट करते हैं। और मनाते हैं- भाइयों का जश्न। उन भाइयों का- जो आपसे लड़ते, झगड़ते और हमेशा आपकी टांग खींचते हैं, सब के आगे, और खासकर- आपके क्रश के आगे। लेकिन फिर भी, एक-दूसरे से प्यार करते हैं। भाईयों के खूबसूरत रिश्ते की, एक ऐसी ही गाथा- भगवान राम और उनके भाइयों की। जो सम्मान, प्रेम और बलिदान की पराकाष्ठा है। पिता के आदेश पर, जब भगवान राम, चले गए 14 साल के वनवास पर। तो भाई को भगवान स्वरूप मानने वाले, लक्ष्मण, आखिर कैसे राम जी से दूर रहते। चल दिए उनके साथ वनवास पर, दिन-रात उनकी सेवा में लगे रहे, 14 साल सोए, तक नहीं।

मन को कैसे शांत रखें This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

मन को कैसे शांत रखें

एक दिन, शहर की सबसे बड़ी आर्ट गैलरी ने, एक कॉम्पिटीशन करवाया। शांति और सुकून को दर्शाती पेंटिंग्ज का कॉम्पिटीशन। आनंद के पापा भी, अपने दोस्त के साथ वहां पहुंचे, क्योंकि उसने भी पार्टिसिपेट किया था! हजारो पेंटर्स ने, अपनी-अपनी पेंटिंग के साथ कॉम्पिटीशन में पार्टिसिपेट किया। सभी पेंटिग्ज, एक से बढि़या एक थी। कोई पेंटिंग सुबह के शांत माहौल को दिखा रही थी, तो किसी पेंटिंग में, शांत नदी में रात का प्रतिबिंब नजर आ रहा था। एक पेंटिंग ऐसी थी, जिसमें आसमान में बिजली गरज रही थी, आंधी तूफान चल रहा था। और इसी पेंटिंग ने फर्स्ट प्राइज जीता। लोगों को लगा- कि विनर डिसाइड करने में शायद, कोई गलती हुई है। क्योंकि इस पेंटिंग में तो, शांति और स्थिरता जैसा कुछ है ही नहीं।

जो होता है, अच्छे के लिए होता है This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

जो होता है, अच्छे के लिए होता है

एक बार, कंचन और उसके 3 दोस्त, फोरेस्ट ट्रिप पर गए। सभी, आगे बढ़ रहे थे, तभी अचानक, एक नुकीले पत्ते से, रोहन का हाथ कट गया। वो चिलाने लगा, जोर-जोर से रोने लगा। ये देखकर, आशीष मुस्कुरा कर कहता है - कोई बात नहीं, जो होता है, अच्छे के लिए होता है। ये सुनकर, वो बौखला उठा। कहने लगा- मेरा हाथ कट गया, और तुम बोल रहे- ये अच्छे के लिए हुआ। गुस्से में वहां से अकेला ही, जंगल के दूसरे रास्ते पर चला गया। कुछ ही दूर पहुंचा, तो कुछ आदिवासियों ने उसे किडनैप कर लिया। उसे रस्सी से बांधकर, उलटा लटका दिया। और उसके चारों ओर नाचने लगे। तभी एक आदिवासी की नजर, लड़के के हाथ पर गई। वो कहने लगा- हम इसकी बलि नहीं दे सकते, ये अशुद्ध है। और उसे छोड़ देते हैं।

Maharana Pratap Jayanti This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Maharana Pratap Jayanti

महान शासक वो होता है, जो अपने देश और संस्कृति की रक्षा के लिए, किसी भी प्रकार का समझौता न करें और सतत संघर्ष करता रहे। ये, कथन - सिसोदिया वंश के राजा- महाराणा प्रताप पर सही लागू होता है। मुगलों ने कई बार उन्हें चुनौती दी, लेकिन हर बार उन्हें मुंह की खानी पड़ी। 30 साल के संघर्ष और युद्ध के बाद भी, अकबर कभी, उन्हें बंदी न बना सका और न ही झुका सका। उनका जन्म 9 मई, 1540 को राजस्थान, के कुंभलगढ़ किले में हुआ था। वो- महाराणा उदय सिंह और रानी जयवंताबाई के सबसे बड़े पुत्र थे। अपने पिता की मृत्यु के बाद, साल 1572 में, उनका राज्याभिषेक हुआ। एक ऐसे प्रतापी राजा, जिनसे, मुगल वंश का महान शासक -अकबर भी परेशान हो गया था। भारत के बहुत से राजाओं ने, मुगलों का शासन स्वीकार कर लिया, लेकिन महाराणा प्रताप ने नहीं।

बुरा वक्त आए, तो डरें नहीं This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

बुरा वक्त आए, तो डरें नहीं

एक बार, सुबह सैर करते हुए, अपने पापा के साथ, आनंद नजदीक के गांव में पहुंच गया। चारों तरफ खेत, हरे भरे पेड़ और बहती नदी को देखकर, वो बहुत खुश हुआ। अचानक उसके पापा, नदी के पास जाकर रुक गए। आनंद को लगा, कि अब वो दोनों नदी के उतरेंगे और नदी के पार जाएंगे। वो काफी देर इंतजार करता रहा, लेकिन उसके पापा सिर्फ नदी को देखते रहे। उसे समझ नहीं आ रहा था, वो आगे क्यों नहीं बढ़ रहे। कुछ देर बाद उसने पूछ ही लिया- हम नदी में कब उतरेंगे। उसके पापा ने कहा- जब नदी का बहाब बंद हो जाएगा, तब।

21 मई को क्यों मनाते हैं ये दिन, जानिए इसका इतिहास? This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

21 मई को क्यों मनाते हैं ये दिन, जानिए इसका इतिहास?

21 मई 1991 को, भारत के पूर्व प्रधान मंत्री राजीव गांधी, तमिलनाडु में जाते हैं, एक रैली अटेंड करने के लिए। लाखों लोगों की भीड़ में, से एक महिला, उनके नजदीक आती है और अचानक एक बम विस्फोट होता है, जिसमें पीएम समेत, लगभग 25 लोग मारे जाते हैं। ये Suicide Terrorism की एक भयानक घटना थी। असल में, वो महिला- लिट्टे संगठन यानी लिबरेशन ऑफ तमिल टाइगर्स ईलम की थी। ये संगठन नाराज था, क्योंकि श्रीलंका में विद्रोहियों को रोकने के लिए, पीएम ने- भारतीय सेना को वहां भेजा था। इसलिए, उन पर ये, आतंकवादी हमला हुआ था। और यही वो दिन था, जिसके बाद से, राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिवस मनाया जाने लगा। दुर्भाग्य से भारत ने कई आतंकवादी हमले देखे हैं। कुछेक की बात करें, तो 1993 का मुंबई बम विस्फोट, 2001 में संसद पर हमला, 2008 का मुंबई हमला और फरवरी 2019 का पुलवामा अटैक ।

डरना छोड़ो, निडर बनो This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

डरना छोड़ो, निडर बनो

एक दिन, आनंद अपनी मम्मी को कहता है कि क्या भूत हमारे घर में भी आ सकते हैं। उसकी मम्मी ने कहा- भूत जैसा कुछ भी नहीं होता। आनंद ने कहा- मेरे दोस्त ने बताया कि रात के वक्त आत्माएं भटकती हैं, जिनकी बड़े-बड़े हाथ, और डरावना चेहरा होता है। उसकी मम्मी ने कहा- भूत-प्रेत काल्पनिक होते हैं। लेकिन फिर भी, उसके दिमाग में, ये सब चलता रहा। जब रात को, सोने का समय हुआ, तो आनंद बिस्तर पर लेट गया, लेकिन उसे नींद नहीं आई। अंधेरे कमरे में उसे लग रहा था कि कोई है, जो उसे छुप कर देख रहा है। खिड़की से आने वाली रोशनी से कुछ परछाइयां बन रही थी, वो उनसे भी डर रहा था। कुछ देर बाद वो सो तो गया, लेकिन उसे एक सपना आया। सपने में, उसे एक भयानक परछाई दिखी। जैसे-जैसे वो डर रहा था, परछाई उसके और नजदीक

जिंदगी अर्थहीन लगे, तो क्या करें This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

जिंदगी अर्थहीन लगे, तो क्या करें

आनंद के पापा के पास, लगभग सब कुछ था, अच्छी जॉब, लविंग फैमिली और भरोसेमंद दोस्त, लेकिन उन्हें अक्सर, अपनी जिंदगी में खालीपन सा लगता था। वो दुनिया में एक बदलाव लाना चाहते थे। लेकिन कुछ खास नहीं कर पा रहे थे। एक दिन ऑफिस से घर की तरफ ड्राइव करते हुए, उन्होंने डिसाइड किया कि- अब से, वो, जो कुछ भी करना चाहते हैं, चाहे वो खुद की खुशी के लिए है या दूसरों के लिए, वो उसके लिए वक्त निकालेंगे। उन्होंने अपने पर्सनल और प्रोफेशनल, लक्ष्य तय किए। रोजाना व्यायाम करने

ऐसे जीना सीखो This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

ऐसे जीना सीखो

आनंद के पापा, का एक, जो दोस्त आर्टिस्ट था। उसे रहस्यमयी पेंटिंग्ज बनाने का, बहुत शौक था। छोटे कस्बे से आया था, ज्यादा फेमस नहीं था, लोग उसे जानते भी नहीं थे। एक दिन, शहर में प्रदर्शनी लगी। उसने भी अपनी एक पेंटिंग उठाई और उस एग्जिबिशन में रख दी। कई लोग, एग्जिबिशन में आए, वो भी, उन्हीं के बीच प्रदर्शनी देखता रहा। लोग उसकी पेंटिंग के बारे में काफी कुछ बोल रहे थे, वो चुपचाप सुनता रहा। कोई बोल रहा था कि - क्या ये पेंटिंग किसी बच्चे ने बनाई है। कोई कहता- इसे बनाने वाला कोई पागल ही होगा, इतनी बेकार पेंटिंग उन्होंने पहले कभी नहीं देखी। हर कोई उस अजीब सी दिखने वाली, रहस्यमयी पेंटिंग का मजाक उड़ाता। लेकिन वो पेंटर, ये सब सुनकर दुखी नहीं हुआ, क्योंकि वो सिर्फ अपनी खुशी के लिए पेंटिंग करता था।

सफलता का राज़ This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

सफलता का राज़

आनंद के पापा, जैसे ही ऑफिस पहुंचे, उनका एक सेल्जमैन – आकाश, गुस्से में, उनके केबिन में आता है। और कहता है- मैं कितना हार्डवर्क करता हूं। मैंने और विनोद ने एक ही टाइम पर, कंपनी जॉइन की थी, लेकिन उसे प्रोमोशन मिल गया, मुझे क्यों नहीं? आनंद के पापा ने, उसे कहा- जाओ और मार्केट में जाकर देखो, इस समय कोई आम बेच रहा है। वो मार्केट गया और वापस आकर, बॉस को बताया। हां, एक दुकानदार आम बेच रहा है। उन्होंने उसे कहा- ठीक है, लेकिन किस कीमत पर आम बेच रहा है? ये पता करने के लिए, आकाश दोबारा मार्केट गया और आकर बताया कि 120 रुपए किलो। उन्होंने उसे, फिर से पूछा - अगर बल्क में लेना चाहूं, तो उसके पास, इस वक्त कितनी मात्रा में आम होंगे। आकाश के पास, इस बार भी कोई जवाब नहीं था।

आज में जीना सीखें This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

आज में जीना सीखें

एक बार, आनंद के पापा और उनके दोस्तों ने, कैंपिंग का प्लान बनाया। और वीकेंड पे, एक वैली में गए। दिन भर, इन्जॉय किया। सब तरफ पहाड़, खूबसूरत झीलें और हरी-भरी घाटियां देखकर, चारों दोस्त बहुत खुश थे। सूरज ढलने लगा था, तो सब लोग, अपने-अपने टेंट की तरफ बढ़ने लगे। इतने में, वहां पर एक, शेर आ पहुंचा। अचानक, भगदड़ मच गई। उससे बचने के लिए, 3 दोस्त पेड़ पर चढ़ गए। लेकिन एक नहीं चढ़ पाया। उसके आगे शेर था और पीछे खाई। उसने सोचा, शेर से तो बच नहीं सकता, लेकिन अगर, खाई में

Sikkim Day This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Sikkim Day

भारत का मिनी राज्य- सिक्किम, सन 1642 में, वजूद में आया, जब फुन्त्सोंग नाम्ग्याल, उसका पहला राजा बना। ये राजशाही कई साल चलती रही। जब भारत आजाद हुआ, तो सरदार पटेल, बाकी रियासतों की तरह सिक्किम को भी भारत में मिलाना चाहते थे, लेकिन चीन की वजह से ऐसा नहीं हुआ। 1950 में एक संधि हुई, जिसके तहत सिक्किम के रक्षा और विदेश मामलों को भारत देखने लगा, लेकिन शासन- राजा ही करते रहे। कुछ समय ऐसा चला, लेकिन, उसके बाद, साल 1964 में राजा ने सिक्किम को भी, भूटान की तरह, अलग देश का दर्जा देने की मांग की। लेकिन जनता में राजशाही को लेकर असंतोष बढ़ने लगा था। इसलिए, 6 अप्रैल, 1975 की सुबह भारतीय सैनिकों ने, पूरे राजमहल को चारों तरफ से घेर लिया और देखते ही देखते, चोग्याल राजा को उनके महल में ही, नज़रबंद कर दिया। और इस तरह, सिक्किम की राजशाही परंपरा खत्म हुई और इलेक्शन करवाए गए। तब जाकर, भारत की आजादी के 28 साल बाद, सिक्किम, 16 मई 1975 को, भारत का 22वां राज्य बना।

क्या आप भी खुशियां ढूंढ रहे हैं? This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

क्या आप भी खुशियां ढूंढ रहे हैं?

रात के 8 बज रहे थे, आनंद के पापा, बागीचे में टहल रहे थे। अचानक उनकी नजर, एक आदमी पर गई, जो बाहर स्ट्रीट लाइट के पास कुछ ढूंढ रहा था। काफी देर तक उसे देखने के बाद, वो उसके पास जाकर बोले- क्या, तुम कुछ ढूंढ रहे हो। आदमी ने कहा- हां, मेरे घर की चाबी गुम हो गई है। ये सुनकर, उन्होंने, उसकी मदद करने का सोचा। और चाबी ढूंढने में उसकी मदद करने लगे। काफी देर, चाबी ढूंढने के बाद भी, जब वो नहीं मिली, तो उन्होंने उस आदमी को दोबारा पूछा- क्या तुम्हें पक्का यकीन है कि, चाबी इसी जगह गुम हुई थी? आदमी कहने

स्टॉक इन्वेस्टमेंट This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

स्टॉक इन्वेस्टमेंट

स्टॉक इन्वेस्टमेंट बहुत ट्रेंड में है। आनंद के पापा ने, भी इसे आजमाने का सोचा, ताकि ज्यादा पैसा कमाया जा सके। स्टॉक मार्केट से जुड़ी कई किताबे पढ़ी, कई बड़े-बड़े स्टॉक इन्वेस्टर्स की स्ट्रेटिजी के बारे में जाना। और फिर इन्वेस्टमेंट शुरू कर दी। फायदा तो हुआ, लेकिन कई बार उन्हें नुकसान भी झेलना पड़ा। इस वजह से, वो कई बार तनाव में भी रहे। कुछ ही दिनों में, वो ये समझ गए कि, स्टॉक मार्केट के उतार-चढ़ाव में, लाइफ को बैलेंस करके रखना, बहुत जरूरी है। अपनी मेंटल और फिजिकल हेल्थ के लिए, उन्होंने योगा और मेडिटेशन का सहारा लिया। फिर सब ऐसे ही चलता रहा। उन्होंने स्टॉक इन्वेस्टमेंट से काफी पैसा कमाया। धीरे-धीरे, उन्होंने खुद की पर्सनल और स्किल डिवेल्पमेंट में पैसा खर्च किया। चैरिटी भी दी। उस पैसे से, कई लोगों की मदद की। वो ये समझ गए

तितली का संघर्ष This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

तितली का संघर्ष

आनंद बागीचे में, खेल रहा था। अचानक उसकी नजर तितली के एक कोनून पर पड़ी। पास जाकर देखा, तो एक छोटे से छेद में से, एक तितली, बाहर निकलने की कोशिश कर रही थी। वो काफी देर तक उसे देखता रहा, लेकिन तितली बाहर नहीं निकल पाई। इसलिए, उसने सोचा- क्यों न तितली की मदद कर दूं। कमरे में जाकर, एक कैंची लाया और कोकून के बचे हुए हिस्से को काट दिया। तितली आसानी से बाहर निकल आई, लेकिन उसका शरीर सूजा हुआ था और पंख बहुत छोटे थे। इसलिए वो उड़ नहीं पाई। आनंद उसे हाथ में लिए, अपने कमरे में चला गया। रात भर, उसके उड़ने का इंतजार करता रहा। लेकिन तितली में इतनी पॉवर नहीं थी, कि वो उड़ पाए।

Mother’s Day This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Mother’s Day

भगवान, हर जगह नहीं रह सकता, शायद इसलिए उसने मां बनाई। लेकिन शायद उसे भी, मालूम नहीं था कि उसके हाथ में जो जादू हैं, वो मां के पास आ जाएंगे। भगवान का, क्या काम था? प्रेम करना! लेकिन मां खुद ही, उस प्रेम और ममता का सागर बन गई। भगवान का काम था, सुरक्षा करना, ये भी मां ही करने लगी, बच्चों को हर बला से बचाने लगी। भगवान का काम था- बरकत देना, और वो भी, मां ने संभाल लिया। प्रेम और करुणा से भरा उसका हर स्पर्श, बच्चों की हर शिकन, हर दर्द को दूर कर देता है। तो उसकी शक्ति और हौसला ही है, जो बच्चों को, किसी गलत रास्ते पर जाने से रोक लेता है। कभी, उसके हाथ, हमारे लिए, तकिया बन जाते हैं, कभी, गिरने पर, सहारा। तो कभी अपने बच्चों को डांट-फटकार से

खुद को किसी से कम मत समझो This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

खुद को किसी से कम मत समझो

एक बार, आनंद अपने पापा को पूछता है- क्या मैं, बड़ा होकर कुछ कर पाउंगा। आनंद के पापा- अलमारी में से एक पत्थर निकालते हैं। और कहते हैं, बाजार में इसकी कीमत पता करके आओ। लेकिन अगर तुमसे कोई इसकी कीमत पूछे- तो बस दो ऊंगली खड़ी कर देना, कुछ बोलना मत। आनंद बाजार गया- चौराहे के पास, एक बैंच पर बैठ गया। कुछ देर बाद वहां एक आदमी आया, बच्चे के हाथ में वो पत्थर देखकर कहने लगा- इसे कितने में बेच रहे हो। आनंद चुप रहा, लेकिन उसने पापा के कहे अनुसार, ऊंगलियों से ईशारा किया। दो ऊंगलियों को देखकर, आदमी कहने लगा- 200 रुपए, ठीक है। मैं, तुम्हे 200 रुपए दूंगा, ये पत्थर मुझे दे दो।

लोगों की बातें मत सुनो | trdh This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

लोगों की बातें मत सुनो | trdh

एक बार, आनंद के पापा से मिलने, उनका दोस्त आया। एक पेंटिंग दिखाते हुए, निराश होकर बोला- मैंने ये पेंटिंग बनाई थी। पिछले 15 सालों में, मुझे ये, मेरी अब तक की सबसे बढि़या पेटिंग लगी। मुझे लगा, कि उसमें कोई कमी नहीं है। फिर भी, मैंने सोचा कि, क्यों न, लोगों की राय लूं। इसलिए, मैंने, एक चौराहे पर वो पेंटिंग रख दी और साथ में एक नोट छोड़ दिया कि- इसमें, आपको जहां भी, कमी या कुछ गलती दिखे, तो पेन से निशान लगा दें। और, ये देखो, पूरी पेंटिंग पर निशान हैं। क्या ये इतनी बुरी थी।

National Technology Day This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

National Technology Day

साल 1974 मे, 18 मई, की सुबह, जब लोग आकाशवाणी पर फिल्मी गीतों का मजा ले रहे थे, तभी अचानक, एक अनाउंसमेंट होती है कि "आज सुबह पश्चिमी भारत के एक अज्ञात स्थान पर शांतिपूर्ण कार्यों के लिए भारत ने एक भूमिगत न्यूक्लियर टेस्ट किया है।" ये था- भारत का पहला परमाणु परीक्षण, जो थार मरुस्थल में पोखरण में हुआ था। इस दिन बुद्ध पूर्णिमा थी, इसलिए इसे Smiling Buddha कोड नाम दिया गया था। इसके लगभग 24 साल बाद भारत ने, दोबारा पोखरण में 11 और 13 मई 1998 को न्यक्लियर टेस्ट किए। अमेरिका, पाकिस्तान समेत कई देश, ये देखकर दंग रह गए। इस टेस्ट का नाम था ओपरेशन शक्ति। ये एक सीक्रेट मिशन था, जहां साइंटिस्ट कोड लैंग्वेज में बात करते थे। एक-दूसरे को सीक्रेट नाम से बुलाते थे। ये ऑपरेशन, डीआरडीओ के प्रमुख

परेशानी पर नहीं, समाधान पर ध्यान दें This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

परेशानी पर नहीं, समाधान पर ध्यान दें

काम के सिलसिले में, आनंद के पापा का, अक्सर दूसरे शहरों में आना जाना लगा रहता था। एक बार वो कहीं से लौट रहे थे। तभी अचानक एक ब्रिज पर उनकी गाड़ी रुक गई। नीचे उतरकर देखा, तो गाड़ी का एक टायर, पंक्चर हो गया था। वो स्टेपनी निकाल के, टायर बदलने लगे। आपको पता होगा कि टायर के 4 स्क्रू होते हैं। लेकिन जैसे ही उन्होंने, उस टायर के चारों स्क्रू खोले, वो ब्रिज से नीचे पानी में गिर गए। आनंद के पापा भगवान को कोसने लगे, और कहने लगे- एक मुसीबत कम थी, जो दूसरी दे दी।

जिंदगी जीने का तरीका This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

जिंदगी जीने का तरीका

काम के सिलसिले में, अक्सर हमें, दूसरे शहर या किसी नई जगह पर जाना पड़ता है। असल में, ये अच्छा भी है, डेली रूटीन में, थोड़ा बदलाव आ जाता है और यात्रा के बाद, नई एनर्जी के साथ वापस आना, प्रोडक्टिविटी को बूस्ट करता है। आनंद के पापा भी, मीटिंग के लिए किसी दूसरे शहर गए थे। लौटते वक्त, उन्हें रास्ते में, चाय की एक छोटी टपरी दिखी। उन्होंने सोचा- चाय पी लेता हूं। पिछले 5 घंटे से गाड़ी चला रहा हूं, थोड़ा आराम मिल जाएगा। वो वहां रुके- दुकानदार, से चाय ली और बैंच पर बैठकर, चाय पीने लगे। वहां पास में, 3 आदमी पत्थर काट रहे थे। थोड़ी वीरान जगह थी, तो आनंद के पापा ने, उनमें से एक को पूछा- तुम, ये क्या कर रहे हो। उसने जवाब दिया- तुम्हें दिखाई नहीं दे रहा, पत्थर काट रहा हूं, क्या तुम अंधे हो?

Rabindranath Tagore Jayanti This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Rabindranath Tagore Jayanti

नोबेल प्राइज जीतने वाले पहले एशियन- रवींद्रनाथ टैगोर, एक कवि से, कहीं ज्यादा थे। भारत के स्वतंत्रता संग्राम सहित, बंगाली आबादी और हिंदु- मुस्लिमों को एक करने में उनका बहुत योगदान था। अंग्रेजों द्वारा दिए गए नाइटहुड के खिताब को छोड़ने के अलावा, वो सत्याग्रह, स्वदेशी और सविनय अवज्ञा आंदोलन में भी शामिल थे। टैगोर- महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सी राजगोपालाचारी और सुभाष चंद्र बोस सहित कई नेताओं के अच्छे मित्र थे। भारत और बांगलादेश के, राष्ट्रगान लिखने के अलावा, उन्होंने श्रीलंका के राष्ट्रगान "श्रीलंका मठ" को भी प्रेरित किया था। 7 मई 1861 को कलकत्ता में जन्मे, रवींद्रनाथ टैगोर, एक

खुद पर भरोसा करो This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

खुद पर भरोसा करो

शाम का समय था। आनंद, खेलकर वापस घर लौट आया। अपने कमरे में गया। अचानक, उसकी नजर, खिड़की से बाहर, एक छोटे से सुंदर पंछी पर गई। उसने ऐसा रंग-बिरंगा पंछी पहले कभी नहीं देखा था, इसलिए उसे एकटक देखता रहा। वो पंछी, एक शाखा से दूसरी शाखा पर कूदता। मानों बहुत खुश हो, एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर जाता। आनंद भी उसे देखकर बहुत खुश था। लेकिन अचानक तेज तूफान चलने लगा। इतनी आंधी आई, कि पेड़ की शाखाएं टूट कर नीचे गिरने लगीं। इतने में आनंद की

एक ऊंट और बच्चे की कहानी This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

एक ऊंट और बच्चे की कहानी

जब आनंद अपने परिवार के साथ चिडि़याघर गया, तो वहां तरह- तरह के जानवरों को देखकर, वो बहुत खुश हुआ। अपने, पसंदीदा जानवरों की ओर इशारा करता और ढेर सारे सवाल पूछता। वहां पिंजरे में कैद, ऊँट को देखकर, आनंद अपने पापा से पूछता है- “ऊँटों के कूबड़ क्यों होते हैं?” उसके पापा ने जवाब दिया- ये रेगिस्तानी जानवर हैं, ये कूबड़ पानी जमा करने के लिए है, ताकि ये कम पानी से भी जिंदा रह सकें। आनंद ने फिर एक सवाल किया- इनके पैर लंबे और गोल क्यों हैं?" उसके पापा ने उत्तर दिया, "ताकि ये रेगिस्तान के रेत में आसानी से चल सकें।"

हमेशा दूसरों का साथ दें This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

हमेशा दूसरों का साथ दें

एक दिन, बस स्टॉप पर, एक दुबला पतला लड़का, आनंद के पापा के आता है और कहता है साहब- बूट पॉलिश करवा लो। आनंद के पापा ने मना किया। लेकिन लड़का बार-बार रिक्वेस्ट कर रहा था। तो उन्होंने कहा- ठीक है, लेकिन अच्छे से करना। लड़का बूट पॉलिश करने लगा, लेकिन कमजोर था, तो सही से काम नहीं कर पाया। ये देखकर, आनंद के पापा ने अपना पैर पीछे हटाया और गुस्से में कहने लगे- जब काम सही से नहीं कर सकते, तो कर क्यों रह हो। आ जाते हैं, हमारा पैसा और समय खराब करने। वो वहां से जाने ही लगे, कि एक दूसरा लड़का आया, और उनके बूट पॉलिश करने लगा। उसने जूते चमका दिए।

मौका This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

मौका

आनंद के पापा, उसे स्कूल से पिक करके, घर छोड़ने, जा ही रहे थे, कि आनंद ने उनके साथ जाने की जिद्द की। असल में उन्हें, एक मीटिंग में जाना था। देर हो रही थी, इसलिए आनंद की जिद्द मान ली। एक बड़ी कंपनी में पहुंचे। आनंद को खाने पीने की चीजें देकर, रिसेप्शन में, छोड़ गए और खुद किसी के साथ मीटिंग में चले गए। कुछ देर बाद, आनंद के पापा आए और वो दोनों, वहां से निकल ही रहे थे। कि इतने में, आनंद की नजर, वहां एक बागीचे पर पड़ी। उसने कहा- मुझे ये फूल चाहिए। आनंद के पापा ने कहा- जाओ, ले आओ। लेकिन एक शर्त है- तुम एक बार आगे बढ़ गए, तो वापस पीछे मुड़कर फूल नहीं तोड़ना है।

Budha Purnima This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Budha Purnima

आज, बुद्ध पूर्णिमा है। ईसा से 563 साल पहले, कपिलवस्तु में, लुम्बिनी नाम की जगह पर, आज के ही दिन, सिद्धार्थ यानी भगवान गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था। जैसा कि हम सब जानते हैं, सिद्धार्थ, 29 साल की उम्र में, जीवन के सत्य की खोज में निकल पड़े और इस तरह, बन गए- भगवान गौतम बुद्ध। उनके विचार, आज भी, हमें रास्ता दिखाते हैं। भगवान बुद्ध ने कहा था- सच्ची शांति और खुशी, हमारे अंदर है, इसे कहीं बाहर मत ढूंढो। अक्सर हम, खुशियों और अपने मन के सुकुन को, बाहर ढूंढते हैं। हमनें अपनी, भावनाओं को भी मैटिरीयलिस्टिक बना दिया है। हम कई चीजों के बारे में सोचते हैं, ये कर लेंगे, या ये सब पा लेंगे, फिर खुशी मिलेगी।

पेंसिल की तरह बनो This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

पेंसिल की तरह बनो

कोई आरटिस्ट है या नहीं, लेकिन ज्यादातर लोगों को पेंटिंग करना, बहुत पसंद होता है। शायद आप स्टूडेंट्स ने भी, लेक्चर में कभी, टीचर का कार्टून बनाया होगा, या ऑफिस मीटिंग में अपने बॉस का, बेकार सा स्कैच। कंचन भी पेंटिंग कर रही थी। इतने में, शरारती आनंद आता है, और उसकी पेंसिल छीनकर, उसे चिढ़ाना शुरू कर देता है। कंचन उससे पेंसिल छीनने की कोशिश करती है, लेकिन उनकी इसी नोक-झोंक में पेंसिल टूट जाती है। कंचन रोना शुरू कर देती है, तो आनंद कहता है, ये छोटी सी, सस्ती पेंसिल के लिए रो रही हो। वो उसे चिढ़ाता है। उनके पापा, ये सब देख रहे थे। तो उन्होंने कहा- एक पेंसिल से ज्यादा कीमती, और बढि़या, शायद ही कुछ

शिकायत करना बंद करें This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

शिकायत करना बंद करें

वैसे तो, हर चीज में छोटी-बड़ी दिक्कते आती ही हैं, लेकिन प्रोफेशनल लाइफ भी आसान नहीं है। काम से लेकर, सभी के साथ, अपने संबंधों को सही बनाए रखना, और भी चैलेंजिंग है। और खासतौर पर तब, जब आपके अंडर, अलग अलग मैंटालिटी के कई लोग, एक साथ काम करते हैं। आनंद के पापा, एक कॉरपोरेट कंपनी में मैनेजर हैं। कई लोगों के साथ डील करना पड़ता है। सभी की बातें और मांगे, सुननी पड़ती हैं। पिछले कुछ दिनों से, उनके अंडर काम करने वाले कुछ लोग, हर रोज एक ही समस्या की शिकायत कर रहे थे। जब इस बार, वो सभी, फिर से उन्हीं परेशानियों के बारे में बताने लगे, तो आनंद के पापा ने, शिकायत सुनने के बजाय, उन लोगों को एक Joke सुनाया और सभी लोग ठहाके लगाकर हंस पड़े।

World Press Freedom Day This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

World Press Freedom Day

आज हमें, वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम डे, मनाते हुए, 30 साल हो गए हैं। साल 1993 की बात है, जब संयुक्त राष्ट्र महासभा ने, 3 मई को विश्व स्वतंत्रता प्रेस दिवस के रूप में चुना और तब से हम हर साल, ये दिवस मनाते हैं। मीडिया, जनता की आवाज है। थॉमस कार्लाइल, वो पहले व्यक्ति थे, जिन्होंने मीडिया को 'लोकतंत्र का चौथा स्तंभ' कहा था। मीडिया लोकतंत्र के बाकी स्तंभों को, निष्पक्षता से काम करने के लिए बाध्य करती है। लेकिन आज, ये खुद सवालों के घेरे में है। फेक और पेड न्यूज की वजह, लोग इस पर विश्वास नहीं करते। असल में मीडिया दो-धारी हथियार है। आज भारतीय मीडिया को, अपनी जिम्मेदारी समझने की जरूरत है। देश और जनता की डिवेल्पमेंट के लिए, जो मुद्दे जरूरी हैं, उन पर बात करे, न कि गैर-जरूरी और झूठी खबरों से लोगों को गुमराह करे। क्योंकि अखबार, रेडियो, टेलीविजन और सोशल मीडिया के जरिए, आम जनता, जो कुछ भी पढ़ती, सुनती और देखती है,

हाथी की प्रेणादायक कहानी     This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

हाथी की प्रेणादायक कहानी

जब कोई बड़ा भी, जिद्द करे, तो हम अक्सर कहते हैं कि बच्चों की तरह जिद्द मत करो। शायद ये बच्चों का ही काम है। आनंद भी आज, जिद्द पे अड़ा था। पिछले काफी दिन से बोल रहा था कि चिढि़याघर ले चलो। सोचने लगा, छोटा हूं, इसलिए कोई उसे सीरियस नहीं ले रहा। खाना-पीना छोड़कर, धरने पे बैठ गया। अब तो, पेरेंट्स को मानना ही पड़ा। उसके पापा ने, वीकेंड पर चिडि़याघर जाने का वादा किया। वादे के अनुसार, 2 दिन बाद, वो सब चिढि़याघर गए। तरह-तरह के जानवरों को देखकर, आनंद बहुत खुश हुआ। लेकिन हाथी को देखकर, उसके मन में एक सवाल आया। अपने पापा से बोला- इतना ताकतवर हाथी, सिर्फ एक छोटी सी, रस्सी से बांध कर रखा है। ये, अपने पैर में बंधी इस रस्सी को, तोड़कर क्यों नहीं भागता। ये तो इसे बड़ी आसानी से तोड़ सकता है।

खुद पर विश्वास This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

खुद पर विश्वास

रोज शाम की तरह, आज भी आनंद अपने दोस्तों के साथ खेलने चला गया। उसका एक बहुत अच्छा दोस्त था, उत्कर्ष, 14 साल का। दोनों पतंग उड़ा रहे थे, तभी अचानक उनकी पतंग कट गई। उसे खोजते हुए, दोनों पास के गांव में पहुंच गए। कटी पतंग उन्हें मिल गई। वहीं पर, दोबारा पतंग उड़ाने लगे। पास में एक कुआं था। उसका दोस्त, अचानक, कुएं में गिर गया। आनंद डर गया, मदद के लिए चिल्लाया, लेकिन दूर-दूर तक तक कोई नहीं था। तभी उसकी नंजर, कुएं पर रखी, रस्सी की तरफ गई। उसने बाल्टी समेत, वो रस्सी कुंए में फेंकी और उत्कर्ष को उसे, पकड़ने को बोला। उसे बाहर निकालने की, आनंद पूरी कोशिश करने लगा। लगातार, पूरे जोर से, रस्सी को खींचता रहा। उसने पूरी ताकत लगा दी और अंत में, उत्कर्ष को बाहर निकाल लिया।

Gujarat Day This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Gujarat Day

मैं, Gujrat, कई बार, बनता- बिगड़ता रहा, लेकिन हर बार, उठ खड़ा हुआ- सोमनाथ मंदिर की तरह। मेरे लोगों ने, सालों तक सूखा भी देखा, साइक्लोन और भूकंप ने कई बार, मुझे तबाह किया, लेकिन मेरी आवाम हर बार, मेरे साथ डटकर खड़ी रही। मुझे अपनी धरती पर, क्यों ना गर्व हो, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, से लेकर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, इसी धरती से जन्मे हैं। मेरे विकास की यात्रा, आजादी से पहले ही शुरू हो चुकी थी। जब इस्ट इंडिया कंपनी ने, सूरत में अपना पहला कारखाना बनाया। इसके बाद स्वतंत्रता का वो, युग शुरू हुआ, जब मैं- महात्मा गांधी, मोरारजी देसाई, सरदार वल्लभभाई पटेल, जैसे कई नेताओं की लीडरशिप में सत्याग्रह जैसे विद्रोहों का अग्रदूत बना। भारत की आजादी के कुछ साल बाद, 1960 में, मेरे लोगो ने खुद के लिए नया राज्य बनवाने का फैसला लिया था। और इस तरह, मैं 1 मई, 1960 को असतित्व में आया। इससे पहले, मैं बॉम्बे राज्य का हिस्सा था।

Maharashtra Day This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Maharashtra Day

चकाचौंध और ग्लैमर की दुनिया, मुंबई! जो बॉलीवुड के साथ-साथ अपने नाइटलाइफ़ और फैशन के लिए फेमस है। ये, भारत का फाइनांशियल, कॉमर्शियल और एंटरटेनमेंट हब है। न सिर्फ आज, बल्कि 1947 में भारत की आजादी से पहले भी, ये काफी डेवलप्ड था। और आज ये, भारत की जीडीपी में 15% काँट्रिब्यूट करता है। 63 साल पहले - गुजरात और महाराष्‍ट्र, एक राज्य थे! जब भारत आजाद हुआ, तो मराठी और गुजराती भाषाई लोगों ने अलग-अलग राज्य बनाने के लिए आंदोलन किया। जिसका रिजल्ट ये हुआ कि साल 1960 में, 1 मई, को महाराष्ट्र का गठन किया गया। और बंबई इसकी राजधानी बनी रही, जिसका नाम बदलकर, साल 1995 में, शहर की मुंबा देवी के नाम पर, मुंबई कर दिया गया।

हमेशा खुश रहो This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

हमेशा खुश रहो

हाई स्कूल से निकलकर, यूनिवर्सिटी में जाना, हर स्टूडेंट का सपना होता है। यूनिफोर्म, और स्टूडेंट लाइफ से आजाद, एक ऐसी दुनिया की एक्साइटमेंट, लेकिन दूसरी तरफ, अपने स्कूल के दोस्तों से दूर होने का थोड़ा सा दुख। कंचन भी कुछ ऐसे ही, हालात से गुजर रही थी। इसलिए, उसने और उसके सभी दोस्तों ने रीयूनियन का प्लान बनाया। अगली सुबह मिलकर, उन सब ने खूब बातें और मौज मस्ती की। फिर एक पुराने टीचर से मिलने चले गए। टीचर से, आम बातों की जगह, जीवन की शिकायतें करने लगे। ये देखकर, वो टीचर, अपनी रसोई में गए। कॉफी और साथ में कांच के कुछ महंगे सुंदर कप और कुछ चीनी मिट्टी के कप लाए। उन्होंने बच्चों को- खुद कॉफी डालने के लिए कहा।

क्या सच में, जो होता है अच्छे के लिए होता है This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

क्या सच में, जो होता है अच्छे के लिए होता है

आज, आनंद की मम्मी, गुस्से में थी। सबके लिए खाना बनाकर, परोस दिया, लेकिन बिना कुछ कहे। इतनी शांति, घर में पहले कभी नहीं थी। दोनों बच्चे, एक-दूसरे को देख रहे थे, कि, हुआ क्या है। लेकिन उनके पापा, इस चुप्पी का राज, अच्छे से जानते थे। असल में बात ये थी कि- आनंद के पापा को प्रोमोशन नहीं मिला था, जिस वजह से उनकी धर्मपत्नी गुस्से में थीं। डायनिंग टेबल की, शांति को तोड़ते हुए, उनके पापा ने कहा- एक कहानी सुनोगे। आनंद और कंचन, फटाक से बोले- हां, क्यों नहीं। उनके पापा बोले- एक बार, एक किसान का घोड़ा भाग गया। गांव के, लोगों ने दुख जताया और कहा- बहुत बुरा हुआ। लेकिन उस किसान का जवाब पता है क्या था। शायद।

Sita Navami This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Sita Navami

बात त्रेतायुग की है, जब मिथिला के राजा- जनक हुआ करते थे। वहां, जब सूखा पड़ा, तो एक ऋषि के कहने पर राजा जनक ने यज्ञ करवाया और खेत जोतने लगे। उस दौरान, जमीन में, सोने के बक्से में, उन्हें एक प्यारी कन्या मिली, जिसे उन्होंने अपनी पुत्री मान लिया। उसका, नाम सीता रखा। उसी दिन की याद में, आज हम सीता नवमी मना रहे हैं। राजा जनक, की नगरी में, बड़े लाड-प्यार से पली, थी सीता। हर किसी का सम्मान करती थी। माता पिता सहित, पूरे परिवार का ख्याल रखना, प्रेम और सद्भाव से पेश आना, मानों, उसके जन्मजात गुण थे। माता-पिता के संस्कारों और उनकी मर्यादा का साथ, ताउम्र नहीं छोड़ा। एक दिन, राजा जनक के राज्य में, अयोध्या के एक बहादुर और विनम्र राजकुमार, आते हैं। जिन्हें, इस राजकुमारी से, प्रेम हो जाता है। और इस तरह, भगवान श्रीराम और माता सीता, विवाह बंधन में बंध जाते हैं, और मिथिला देश की ये राजकुमारी, अयोध्या के राजमहलों में पहुंच जाती है।

परिवर्तन प्रकृति का नियम है This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

परिवर्तन प्रकृति का नियम है

पिछले कुछ दिनों से, कंचन की हायर स्टडीज को लेकर, परिवार में चिंता का माहौल था। असल में पेरेंट्स चाहते थे कि एक टॉप यूनिवसर्टिी में कंचन का एडमिशन हो जाए। एक यूनिवर्सिटी मिली तो सही, लेकिन दूसरे शहर में। अब चिंता थी, लड़की को, अनजान शहर में भेजने की। आज, डायनिंग टेबल पर, सब बिलकुल शांत बैठे थे, परेशान थे कंचन को लेकर। इतने में आनंद कहने लगा- मुझे भी, यूनिवर्सिटी में पढ़ना है। तब मुस्कुराते हुए उसकी मां बोली- बेटा, स्कूल में तो, तुम पढ़ाई करते नहीं। और यूनिवर्सिटी जाने की बात कर रहे हो।

तनाव से बचें This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

तनाव से बचें

कई बार, छोटी-छोटी चीजें हमें बहुत परेशान करती हैं। कंचन भी ऐसे ही हालात में थी। अपने बेडरूम में, बिलकुल शांत, शायद कुछ सोच रही थी। तभी आनंद आया, और उसे तंग करने लगा। कंचन के मना करने के बाद भी, बार-बार बोलता है- चलो दीदी खेलते हैं। अचानक कंचन ने उसे थप्पड़ मार दिया, और वो रोता हुआ अपने पापा के पास चला गया। थोड़ी देर बाद, कंचन को दरवाजे पर आहट सुनाई दी। देखा, तो उसके पापा थे। कंचन का परेशान चेहरा उन्हें दिख गया था। उन्होंने कारण पूछा। वो कहने लगी- पापा! आप ऑफिस में दिनभर काम करते हैं, मां की मदद भी करते हैं, हम सब की जरूरतों से लेकर, हर चीज का ख्याल रखते हैं। और भविष्य की चिंता, वो अलग। कैसे। क्या आपको, इस सब से फ्रस्ट्रेशन नहीं होती। तब उसके पापा ने जवाब दिया- हमें तनाव, तब होता है- जब हम अपने दिमाग, मन और भावनाओं को कंट्रोल नहीं कर पाते।

कोई बुरा बर्ताव करे, तो क्या करें This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

कोई बुरा बर्ताव करे, तो क्या करें

हमारे साथ, कोई गलत करता है, तो गुस्सा आता है, बुरा लगता है। लेकिन क्या हमें, इस नाराजगी और दुख की भावनाओं को नियंत्रित करना चाहिए। एक दिन, आनंद और उसके पिता, शाम को टहल रहे थे। तभी अचानक, उन्होंने देखा कि एक छोटी सी बिल्ली, गेट में फंसी हुई है। उसके पिता ने, बिल्ली को बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन उसने डर के मारे, उनका हाथ नोच लिया। लेकिन उन्होंने फिर भी, बिल्ली की मदद करने की कोशिश की।

दूसरों को जज न करें This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

दूसरों को जज न करें

दूसरों को जज करना, उनके बारे में कोई राय बनाना, क्या गलत है या सही। आनंद, अपने पिता के साथ, ट्रेन में कहीं जा रहे था। उनके सामने की सीट पर, एक बुजुर्ग और उसका 24 साल का बेटा बेठा था। वो लड़का ट्रेन की खिड़की से बाहर देख कर चिल्लाया। "पिताजी, देखो पेड़ पीछे जा रहे हैं!" उसके पिताजी मुस्कुराए। लेकिन वहां बैठे एक युवा जोड़े ने इस 24 साल के बच्चे के व्यवहार को दया से देखा। अचानक वो फिर से चिल्लाया...."पिताजी, देखो बादल हमारे साथ चल रहे हैं!"

दूसरों पर शक ना करें This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

दूसरों पर शक ना करें

वजह चाहे छोटी हो या बड़ी, हमें अक्सर दूसरों पर संदेह होता है। आखिर ऐसा क्यों है? हररोज की तरह, आनंद आज भी, अपने दोस्तों के साथ खेलने के लिए पार्क चला गया। उसके पास सुंदर कंचे थे। उसकी दोस्त, आकृति आज बहुत सारी कैंडी लेकर आई थी। लेकिन उसे कंचे चाहिए थे। आनंद ने कहा- तुम मुझे ये सारी कैंडी दे दो, और बदले में, मैं तुम्हें ये सारे कंचे दे दूंगा। आकृति मान गई। आनंद ने सारे कंचे उसे दे दिए, लेकिन चुपके से सबसे बड़ा और सबसे सुंदर कंचा, उसने अपने पास रख लिया। वादे के अनुसार, आकृति ने आनंद को, अपनी सारी कैंडी दे दीं। वो कंचे पाकर, खुशी-खुशी अपने घर चली गई। और रात को, चैन से सोई।

लक्ष्य को पहचानें This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

लक्ष्य को पहचानें

जीवन में सही लक्ष्य बनाना और उस पर फोकस करना, आखिर क्यों इतना जरूरी है। रविवार का दिन था। आनंद और कंचन, ने तीरअंदाजी करने का सोचा। धनुष और तीर लेकर, पिता के साथ, पास के मैदान में गए। कंचन ने, एक छोटा सा फूल, एक पेड़ की एक शाखा से लगा दिया। और आनंद की आंखों पर पट्टी बांधकर, उस पर निशाना लगाने को कहा। पेड़ से बहुत दूर खड़े होकर, आनंद ने निशाना लगाया। और कंचन को कहने लगा- जाओ देखो और चेक करके मुझे बताओ कि मेरा निशाना सही लगा है या नहीं।

हर समस्या एक अवसर है This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

हर समस्या एक अवसर है

आखिर क्या कारण है कि कुछ लोग, बड़ी से बड़ी परेशानी, को भी हरा देते हैं। एक शाम की बात है। कंचन अपनी मां को कहती है -जिंदगी में, अगर ज्यादा बड़ी परेशानी आ जाए, तो क्या करना चाहिए। उसकी मां ने कहा- अब से काफी साल पहले, एक राजा था। उसके आदेश पर, एक सिपाही ने, गांव की सड़क के बीच, एक बड़ा पत्थर रख दिया। राजा झाडि़यों में छिपकर देखता रहा कि कौन इस पत्थर को हटाता है। कई लोग उस रास्ते से गुजर रहे थे, लेकिन साइड में से, होकर चले जाते। किसी ने वो पत्थर नहीं हटाया, लेकिन रास्ते को साफ नहीं रखने के लिए, वो सब, राजा को दोष दे रहे थे।

आलस के परिणाम This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

आलस के परिणाम

हम चाहते हैं कि हमारे सपने पूरे हों, लेकिन क्या कारण है कि आलस नहीं छोड़ पाते? पिछले कुछ समय से, कंचन और आनंद, अपनी पढ़ाई और करियर पर ध्यान नहीं दे रहे थे। उनकी मां ने उन्होंने समझाते हुए कहा- एक बार, तुम दोनों के जैसे ही एक आदमी था। इतना आलसी था, कि सोचता था कि बिना मेहनत के भोजन और सब मिल जाए। एक दिन उसने जंगल में, एक भेड़िये को देखा, जिसके केवल 2 पैर थे। वो सोचने लगा कि इसे भोजन कैसे मिलता होगा। अचानक उसने देखा कि एक शेर, मुंह में मांस का टुकड़ा लिए, भेड़िये के पास आया और उस मांस के टुकड़े को भेडि़ए के आगे रखकर, वहां से चला गया।

Eid Al Fitr This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Eid Al Fitr

आज, जिस तरह हमारा घर, शीर खुरमा, बिरयानी और खजूर की मीठी खुशबू, से भरा है, ठीक वैसे ही ईद की खुशी और दुआएं हम सब की, जिंदगी को प्यार और खुशियों से भर दें। रमज़ान उल-मुबारक के एक महीने के बाद, आज हम सब, एक मज़हबी ख़ुशी का त्यौहार- ईद उल फितर मना रहे हैं। इस्लाम धर्म में रमजान का मुबारक महीना शाबान महीने के बाद आता है। इस महीने का हम सब, बड़ी बेसर्बी से इंतजार करते हैं, क्योंकि हमारे लिए रमजान का महीना बहुत ही पाक यानी पवित्र है। पूरे महीने रोजा रखना, 5 वक्त की नमाज अदा करना, जकात देना और दिल से अल्लाह की इबादत करना, हमारा धर्म और कर्म है। रमजान, हमारे लिए, अल्लाह के प्रति समर्पण है, तो बच्चों के लिए ईद का चांद, मानो अभी-अभी कोई जश्न शुरू हुआ हो। ये सब, तब शुरू हुआ, जब पैगंबर मुहम्मद ने, तीस दिन उपवास करके, हमें आत्म-संयम और दान की अहमियत सिखाई। ईद उल-फितर के दूसरे नाम भी हैं। जैसे, इसे तुर्की में बेराम, मलेशिया में हरि राया, या सेनेगल में कोरिटे कहते हैं।

आप जैसा सोचेंगे, दुनिया वैसी ही दिखेगी This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

आप जैसा सोचेंगे, दुनिया वैसी ही दिखेगी

क्या सच में दुनिया वैसी है, जैसा हम सोचते हैं। शाम का वक्त था। आनंद, कंचन और उनके माता-पिता, चाय पी रहे थे और आपस में बातें कर रहे थे। आनंद के पिता उन्हें कहा- जब पहली बार, मैं इस शहर में आया, तो मैं इस अजनबी शहर को देखकर, बहुत परेशान था। इसलिए मैं, एक संत के पास गया और उनसे कहा- मैं इस शहर में नया हूं, क्या यहां के लोग मुझे पसंद करेंगे। क्या यहां के लोग, अच्छे हैं? उस संत ने मुझे पूछा: तुम जिस गांव से आए हो, वहां के लोग कैसे थे? मैंने कहा- लालची, और स्वार्थी।

National civil servant day This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

National civil servant day

सिविल सर्वेंट भारत का स्टील फ्रेम हैं। यानी ये, देश की प्रशासनिक व्यवस्था के सहायक पिल्लर हैं। ऐसा- स्वतंत्र भारत के पहले गृह मंत्री- सरदार वल्लभभाई पटेल का मानना था। साल 1947 में, आज के ही दिन, उन्होंने दिल्ली के मेटकाफ हाउस में प्रशासनिक सेवा अधिकारियों को संबोधित किया था। इसी की याद में, साल 2006 से, हम हर साल 21 अप्रैल को राष्ट्रीय नागरिक सेवा दिवस मनाते हैं। एक जमाना था, हर पेरेंट्स चाहते थे कि, उनके बच्चे सिविल सर्विस में जाएं। इसके लिए, युवाओं में भी उतना ही जोश दिखता था। लेकिन आज नहीं। कारण- ब्यूरोक्रेसी पर भी, भ्रष्टाचार के दाग लगे हैं। हालांकि यह नहीं कि, हर सिविल सर्वेंट क्रप्ट है, लेकिन कुछ कर्मचारी, अपने निजी स्वार्थ और लालच के लिए, अपनी पोजिशन और पॉवर का मिसयूज करते हैं, जिससे ब्यूरोक्रेट्स की पूरी कम्युनिटी बदनाम हो रही है।

आज में जीना सीखें This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

आज में जीना सीखें

अपनी खुशी के लिए कुछ करना हो, या फिर अपनों को, स्पेशल फील करवाना हो, तो अक्सर हम, सोचते हैं कि कुछ दिन बाद या अगले साल कर लेंगे। क्या आप भी यही, करते हैं? कंचन के कॉलेज टूर में, वो नहीं जा रही थी। उसकी मां ने उसे कहा - कि जब सभी दोस्त जा रहे हैं, तो चली जाओ। लेकिन कंचन ने कहने लगी- नहीं, फिर कभी ट्रिप जाएगी, तब चली जाउंगी। तब उसकी मां ने कहा, तुम्हारे इस निर्णय से, मुझे तुम्हारे दादा जी एक बात याद आ रही है। तुम्हारे दादा जी के, 2 बहुत अच्छे दोस्त थे। वो तीनों, अपनी-अपनी लाइफ में बिजी थे, लेकिन साल में एक बार, जरूर मिलते थे।

अपनी पूरी क्षमता को अनलॉक करें This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

अपनी पूरी क्षमता को अनलॉक करें

आखिर क्यों, ज्यादातर लोग, अपनी पूरी क्षमता का प्रयोग नहीं कर पाते? आनंद और कंचन, शहर में पले-बड़े थे, तो अपने पिता से, अक्सर गांव के बारे में पूछा करते थे। आज छुट्टी थी, इसलिए कोई काम ना होने की वजह से, उनके पिता, उन्हें कुछ बता रहे थे। उन्होंने कहा, एक बार, हमारे गांव में, एक संत आए। और एक आदमी की कुटिया में रुक गए। संत ने उस आदमी को पूछा कि तुम क्या काम करते हो? उस आदमी ने कहा- मेरे पास एक गाय है। कुछ जमीन भी है, लेकिन लोग कहते हैं कि उस बंजर जमीन में फसल नहीं हो सकती। इसलिए यह गाय ही, मेरी आजीविका का जरिया है।

असंभव कुछ भी नहीं This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

असंभव कुछ भी नहीं

नामुमकिन को, मुमकिन कैसे बनाएं। एक दिन, आनंद के पिता ने उसे एक शर्ट दी और कहा कि इसे 5 डॉलर में बेच कर आओ। आनंद सोच में पड़ गया- कि इस शर्ट की कीमत, 2 डॉलर थी, अब इसे 5 डॉलर में कौन लेगा। लेकिन वो उसे बेचने के लिए, बाजार चला गया। और उस शर्ट को बेचकर, रात 8 बजे, वापस घर पहुंचता है और अपने पिता को कहता है- ये देखिए पिता जी, मैंने इसे 5 डॉलर में बेचा। तभी, उन्होंने आनंद को एक और शर्ट दी और कहा कल इसे 10 डॉलर में बेच कर आना।

Hard work and determination This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Hard work and determination

जीवन में सफलता के लिए, कौन से गुण ज्यादा जरूरी हैं। एक दिन, उदास सा चेहरा बनाकर, कंचन आंगन में बैठी थी। जब पिता आए, तो उनसे बोली- कॉलेज में बच्चे तंग करते हैं, पढ़ाई का बोझ और न जाने कितनी परेशानियां। क्या मैं, जिंदगी में कामयाब हो पाउंगी। उसके पिता ने उसे कहा- मेरे साथ यूनिवर्सिटी में एक बच्चा था। गरीब परिवार से था, इसलिए उसके माता-पिता ने, उसे पढ़ाने के लिए बहुत सेक्रिफाइज किए थे। और वो लड़का भी चाहता था कि उन्हें प्राउड फील करवाएगा।

Failure success ladder This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Failure success ladder

जिंदगी में बार-बार असफलता मिलने पर क्या करें? एक शाम की बात है। डायनिंग टेबल पर आनंद और कंचन, अपने माता-पिता के साथ, रात का भोजन कर रहे थे। तभी अचानक, आनंद ने पिता को पूछा- क्या आपको भी जिंदगी में कभी, संघर्ष करना पड़ा। उसके पिता ने जवाब दिया- हां क्यों नहीं। और संघर्ष ही जिंदगी का दूसरा नाम है। मैं, तुम्हें एक कहानी सुनाता हूं, जो मुझे, मेरी मां, यानी तुम्हारी दादी ने सुनाई थी।

पॉजिटिव सोच की ताकत This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

पॉजिटिव सोच की ताकत

क्या पॉजिटिव थिंकिंग वाकई काम करती है? एक छोटे से शहर में, 10 साल का आनंद अपने माता-पिता और बहन कंचन के साथ रहता है। कंचन 20 साल की है। एक बार, आनंद अपने पिता से, होमवर्क में हेल्प मांगता है। लेकिन बिजी होने की वजह से, वो गुस्से में, उसे मना कर देते हैं। कुछ देर बाद, जब वो, बेटे के कमरे में जाते हैं, तो देखते हैं कि वो सो रहा है और उसके हाथ में एक नोट बुक है। उन्होंने नोटबुक हटाने की कोशिश की, तो उसमें एक निबंध लिखा था, जिसका विषय था- वो चीजें, जो शुरू में हमें अच्छी नहीं लगती, लेकिन उनका परिणाम अच्छा लगता है।

Dr. B.R Ambedkar Jayanti This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Dr. B.R Ambedkar Jayanti

आज भारत रत्न, डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर जी, की 132वीं जयंती है। उन्होंने, ''वीजा के लिए इंतजार'' नाम से अपनी बायोग्राफी लिखी है। भारत में उनकी यह किताब शायद नहीं पढ़ाई जाती, लेकिन अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी के पाठ्यक्रम में शामिल है। इस किताब के अनुसार, साल 1901 में, जब वो अपने पिता के पास, जाने के लिए निकले, तो महार जाति का होने की वजह से कोई बैलगाड़ी वाला, उन्हें स्टेशन से कोरेगांव पहुंचाने को राजी नहीं हुआ। उन्हें खुद बैलगाड़ी चलाकर, वहां पहुंचना पड़ा। इतना ही नहीं, स्कूल में, उन्हें बाकी बच्चों से अलग बैठना पड़ता था। वो बैठने के लिए, हमेशा अपने साथ एक बोरा रखते थे। सफाई कर्मचारी भी, उस बोरे को हाथ नहीं लगाता था, इसलिए रोज बोरा घर लेकर जाते और अगले दिन लेकर आते। स्कूल में सभी, अपनी मर्जी से, पानी पी सकते थे। लेकिन डॉ. अंबेडकर जी को नल छूने की इजाजत नहीं थी। एक चपरासी उन्हें पानी पिलाता था। और अगर चपरासी न हो, तो सारा दिन, प्यासे रहना पड़ता। धोबी उनके कपड़े, धोने से इनकार करते थे। और तो और, उनके बाल भी, उनकी बहन काटती थी, क्योंकि नाई, अछूतों के बाल नहीं काटता था।

जीतना सब कुछ नहीं है This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

जीतना सब कुछ नहीं है

क्या जिंदगी की हर दौड़ को जीतना ही सब कुछ है। क्या यही सफलता है। एक बार, एक स्कूल में रेस कॉम्पिटीशन चल रहा था। 11 साल का प्रिंस, अब तक 5 राउंड, जीत चुका था। सब लोग, उसके लिए तालियां बजा रहे थे। अबकी बार, उसकी रेस, एक अंधे व्यक्ति और बुजुर्ग महिला के साथ, हुई। इसमें भी, वो जीत गया। वो बहुत खुश था, उसने खुशी में अपनी बाहें ऊपर उठाईं। लेकिन इस बार, लोग चुप थे, किसी ने उसे चीयर नहीं किया।

Happy Baisakhi This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Happy Baisakhi

भारत एक, कृषि प्रधान देश है। यहां फसलों और धरती के सम्मान में, कई त्योहार भी मनाए जाते हैं। बैसाखी भी उनमें से एक है। आज पूरा भारत इस त्योहार को मना रहा है। फर्क सिर्फ इतना है कि अलग-अलग जगहों पर, इसे अलग नाम से बुलाते हैं। पंजाब-हरियाणा में बैसाखी और असम में रंगोली बिहू कहा जाता है। पश्चिम बंगाल में, यह त्योहार, पोइला बैसाख के नाम से जाना जाता है, तो बिहार में इसे वैशाख कहते हैं और तमिलनाडु में इसे पुथंडु के नाम से जानते हैं। पंजाब में, बैसाखी मनाने का दूसरा कारण, खालसा पंथ की स्थापना भी है। साल 1675 में, गुरु तेग बहादुर जी ने धर्म परिवर्तन से मना किया, तो मुगल बादशाह ओरंगजेब ने उन्हें मृत्यु दंड दे दिया। पिता की शहादत के बाद, गुरु गोबिंद सिंह जी राजगद्दी पर बैठे और सिखों के 10वें गुरु बने।

अपनी राय, दूसरों पर न थोपें। This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

अपनी राय, दूसरों पर न थोपें।

क्या हम, वास्तव में परवाह करते हैं, इसलिए हमेशा अपनी राय या अपने फैसले, दूसरों पर थोपते हैं। एक समय की बात है। एक बाप- बेटा जंगल से गुजर रहे थे। रास्ते में उन्होंने देखा कि, कुछ लड़के, कीचड़ में कुछ, ढूंढ रहे हैं। जब वो पास जाकर उन लड़कों से पूछते हैं- तो लड़के बोलते हैं कि वहां देखो, एक सोने का फल है। उस आदमी ने देखा, तो वहां सच में सोने का फल दिख रहा था। उसे लगा कि अगर यह फल हमें मिल जाए, तो हमारे पास बहुत पैसा होगा। उसने अपने बेटे को, इसे लाने को कहा। बेटा मना कर रहा था, लेकिन इतने में ही, उसने, अपने बेटे को कीचड़ में धकेल दिया।

Remembering the jallianwala bagh massacre This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Remembering the jallianwala bagh massacre

पंजाब के एक छोटे से शहर- अमृतसर में, जलियांवाला बाग है। आज से 104 साल पहले, एक बच्चा, जलियांवाला बाग में चल रही गोलियों की आवाज सुनकर, कहता है- अब्बा उठो, चलो पटाखे फूट रहे हैं, तमाशा शुरू हो गया है।'' उस वक्त उसे मालूम नहीं था कि यह कोई नाटक नहीं, नरसंहार है। 10 मार्च, 1919 को, ब्रिटिश सरकार, रोलेट एक्ट लेकर आई। इस एक्ट के अनुसार, सरकार, किसी भी व्यक्ति को बिना किसी मुकदमे के, कैद कर सकती थी। उसे सजा दे सकती थे। इसके खिलाफ विरोध के लिए, सैकड़ों भारतीय, जलियांवाला बाग में इकट्ठा थे। कई महिलाएं और पुरुष तो थे ही, लेकिन बैसाखी का दिन था, और यह जगह, गोल्डन टैंपल के बहुत करीब है, इसलिए बच्चे भी मौजूद थे।

जैसा व्यवहार अपने लिए चाहते हैं, वैसा ही दूसरों के साथ करें। This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

जैसा व्यवहार अपने लिए चाहते हैं, वैसा ही दूसरों के साथ करें।

ऐसा क्या किया जाए कि, सब लोग आपकी इज्जत करें और आपके साथ अच्छे से पेश आएं। एक समय की बात है। 10 साल का बच्चा, एक दिन, दुखी होकर, अकेले पहाड़ी रास्ते पर निकल जाता है। रास्ता बहुत तंग था, उसके एक तरफ ऊंचा पहाड़, और दूसरी तरफ खाई थी। वो जा रहा था कि एक बड़े पत्थर से, उसका पैर टकरा गया। उसे चोट लग गई, वो जोर से चिल्लाया- तुम भी, बहुत बुरे हो।

सबसे बड़ा दान क्या है! This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

सबसे बड़ा दान क्या है!

हर कोई दान करता है, लेकिन क्या आपको पता है कि सबसे बड़ा दानी, कौन है। एक बार, राजसभा चल रही थी। दरबारी से लेकर, राजमहल का हर विद्वान राजा को बोल रहा था कि- महाराज, आप ही सबसे बडे़ दानी हैं। लेकिन, सभा में बैठा एक सारथी बोल उठा- आपसे भी बड़ा, एक दानी और है। यह देखकर, राजा बोला- आज तक मैंने किसी को खाली हाथ नहीं जाने दिया, मुझसे बड़ा दानी कौन आ गया। सारथी ने कहा- समय आने पर आपको खुद पता चल जाएगा। फिर एक दिन, तेज बारिश हो रही थी। एक साधु, दरबार में आया और राजा से बोला- मुझे एक यज्ञ के लिए, चंदन की लकड़ी चाहिए।

National safe motherhood day This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

National safe motherhood day

यूएन के अनुसार, दुनियाभर में, डिलीवरी के दौरान या फिर गर्भावस्था में कॉम्लीकेशन होने की वजह से, हर साल 3 लाख से ज्यादा महिलाओं की मौत हो जाती है। इसकी मानें, तो हर दिन लगभग 830 महिलाएं यानी लगभग हर 2 मिनट के अंदर, एक महिला की मौत। और उससे भी बड़ी चिंता की बात यह है कि इसमें से 17 प्रतिशत मौतें, भारत में होती हैं। यानी हर साल, लगभग 45 हजार। गर्भावस्था, प्रसव के समय या फिर प्रसव के तुरंत बाद, किसी महिला की मृत्यु, उसके परिवार और पूरे समाज के लिए एक त्रासदी है। गर्भावस्था में, एक महिला के शरीर में कई बदलाव होते हैं। ये बदलाव पूरी तरह से सामान्य हैं, लेकिन कई बार कुछ कॉम्लिकेशंस हो जाती हैं, जैसे बहुत ज्यादा ब्लीडिंग, हाई ब्लड प्रेशर, इन्फेक्शन और असुरक्षित गर्भपात।

झूठ की कीमत This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

झूठ की कीमत

अपनी गलतियों से बचने के लिए, हमें झूठ बोलना और सच छिपाना, बहुत जरूरी लगता है। एक गांव के सरकारी स्कूल में, एक टीचर थे। पिछले 20 साल से, वो उसी गांव में थे, लेकिन अब उनका ट्रांसफर, कहीं दूसरी जगह हो रहा था। एक दिन, अपनी पत्नी और बच्चों के साथ, अपना पूरा सामान समेट कर, जाने को तैयार थे। ट्रक पर सामान लोड करवा रहे थे, कि उन्होंने देखा, सामान का 1 बंडल नहीं है।

परोपकार की शक्ति This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

परोपकार की शक्ति

धन, देने से बढ़ता है, क्या यह सच है? एक बार, एक अमीर व्यक्ति अपने पड़ोसी देश में गया। उस रियासत में, कोई गरीब नहीं था। उसे पता चला कि राजा बहुत दिलेर है और अपनी प्रजा को मुंहमांगा दान देता है। यह देखकर, वो राजा के पास गया। सभा चल रही थी, अपना परिचय देते हुए वो बोला- अगर आप अपना धन बचाते रहेंगे, और प्रजा को नहीं बांटेंगे, तो आप अपार संपत्ति के मालिक होंगे।

आलोचना की जगह करुणा चुनें This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

आलोचना की जगह करुणा चुनें

आप बेशक, कुछ नेकी और पुण्य के काम करते होंगे, लेकिन क्या कभी आपके दिमाग में यह आया कि दूसरे क्यों नहीं कर रहे? एक समय की बात है, मक्का की यात्रा चल रही थी। करोड़ों श्रद्धालु, अलग-अलग समूह में, यात्रा कर रहे थे। उनमें से एक दल ऐसा था, जिसमें आधी रात को उठकर, प्रार्थना करेन का रिवाज था। एक दिन, आधी रात को एक बेटा, अपने पिता के साथ, प्रार्थना करने के लिए उठा।

अहंकार से आत्मज्ञान तक This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

अहंकार से आत्मज्ञान तक

सीखने की प्रक्रिया जिंदगी भर चलती है, लेकिन क्यों कुछ लोग चाहकर भी, वो चीज नहीं सीख पाते, जो वो सीखना चाहते हैं। एक बार, एक महान विचारक थे। उनकी अब तक कई पुस्तकें और ग्रंथ प्रकाशित हो चुके थे। एक दिन, वो एक संत से मिले।

Hanuman janmotsav This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Hanuman janmotsav

भूत पिशाच निकट नहीं आवे, महाबीर जब नाम सुनावे- भारत में, मुश्किल से कोई ऐसा होगा, जिसे इन 2 पंक्तियों का पता न हो। और ऐसा हो भी क्यों ना, कोल्ड ड्रिंक पीकर डर के जीत मिले या ना मिले, ये 2 पंक्तियां पढ़कर, डर जरूर खत्म हो जाता है। चैत्र मास की शुक्ल पूर्णिमा के दिन, अंजनी मां की कोख से, हनुमान जी का जन्म हुआ था। उसी की याद में, आज हम हनुमान जयंति मना रहे हैं।

द पावर ऑफ़ कंसिस्टेंसी This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

द पावर ऑफ़ कंसिस्टेंसी

क्या हर मेहनत करने वाले को सफलता मिलती है। एक बार, ऐसा ही एक लड़का था। वो इतना अमीर होना चाहता था कि अपने मां बाप को हर खुशी दे सके। एक संत उसे, एक ऐसी जगह ले गए, जहां बहुत सारे पत्थर पड़े थे। संत ने उसे कहा- इनमें से, एक ऐसा पत्थर है, जो लोहे को छुएगा, तो वो लोहा, भी सोना बन जाएगा। उस पत्थर की पहचान यह है कि वो पत्थर थोड़ा गर्म होगा।

अपनी वैल्यू समझो This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

अपनी वैल्यू समझो

कुछ लोग आपको बहुत कीमती समझेंगे और कुछ, आपकी वैल्यू को जीरो मानते हैं। आखिर ऐसा, होता क्यों है। एक आदमी ने, एक संत से पूछा- इतनी बड़ी दुनिया में मेरी क्या कीमत है?" संत मुसकराए और बोले- पहले मेरा एक काम करो। 'जाओ, इस पत्थर की कीमत पता करके आओ, लेकिन, इसे बेचना मत।'

छोटे अवसर, बड़ी संभावनाएँ This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

छोटे अवसर, बड़ी संभावनाएँ

क्या आप भी हमेशा किसी स्पेशल चीज के पीछे भागते रहते हैं? एक बार, ऐसे ही, नदी किनारे 2 मछवारे, मछली पकड़ने गए। दोनों ने कांटा फेंका, और मछली के फसने का इंतजार करने लगे। थोड़ी देर में, एक मछवारे ने ढेरों मछलियां पकड़ लीं। लेकिन दूसरे मछवारे के कांटे में जब भी कोई मछली फसती, वो उसे देखता और कांटे से छुड़ाकर, वापस पानी में फेंक देता।

happy mahavir jayanti This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

happy mahavir jayanti

आज, जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर- महावीर स्वामी की जयंती है। इस धर्म में, इससे पहले भी 23 तीर्थंकर मतलब महान शिक्षक रह चुके थे, लेकिन भगवान महावीर के धर्म प्रचार से, यह धर्म ज्यादा प्रसिद्ध हुआ। आज, भारत में 0.4 प्रतिशत से भी कम जैन लोग हैं, लेकिन देश की प्रोग्रेस में, इनका 25% काँट्रिब्यूशन है। देश के कुल इनकम टैक्स का 24% जैन देते हैं। कुल डायमंड एंड गोल्ड बिजनेस का 65% इनके पास है। चैरिटी में भी आगे हैं, 42% काँट्रिब्यूशन। 28% से ज्यादा भारतीय संपत्ति के मालिक जैन हैं। इतना ही नहीं, भारत के 46% शेयर ब्रोकर भी जैन समुदाय के लोग हैं।

विश्वास की नींव This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

विश्वास की नींव

ज्ञान, धन और विश्वास, इन सभी में, सबसे ज्यादा जरूरी क्या है? एक समय की बात है। जब ज्ञान, धन और विश्वास, काफी लंबे समय से, एकसाथ रहते आ रहे थे। लेकिन एक दिन आया, जब किसी वजह से, तीनों को अलग होना पड़ा। तीनों, एक-दूसरे को अंतिम विदाई देने के लिए खड़े थे। तब विश्वास ने कहा, कि अगर हमें मिलना होगा, तो दोबारा, कहां मिलेंगे।

ज्ञान और अहंकार की लड़ाई This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

ज्ञान और अहंकार की लड़ाई

आपको क्या लगता है, क्या, कभी ज्ञान, आपका शत्रु बन सकता है? एक गांव में, 3 विद्वान थे। एक दिन वो तीनों, शहर जाने के लिए निकले। एक नाव में बैठे। उनमें से एक विद्वान ने नाविक से पूछा- क्या तुम पढ़े-लिखे हो। उस व्यक्ति ने कहा- नहीं, मुझे पढ़ना लिखना तो नहीं आता है, बस यह नाव चलाता हूं। यह सुनकर, वो विद्वान बोला- पढ़ाई लिखाई ना करके, तुमने अपनी जिंदगी बर्बाद कर दी है।

ज्ञान को बढ़ाने के तरीके This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

ज्ञान को बढ़ाने के तरीके

क्या आपके हाथ में, कभी कोई बड़ा मौका आया? एक बार, ऐसा ही, एक गरीब आदमी के साथ हुआ। जो अपने गुजारे के लिए, कोयला बनाकर बेचता था। एक दिन शिकार पर निकला राजा, भटक कर उसकी कुटिया में आ पहुंचा। उसने राजा की खूब मेहमानवाजी की। जिससे खुश होकर राजा ने उसे, चंदनवन उपहार में दे दिया। और वहां से चला गया। लेकिन आदमी को चंदन के बारे में, ज्ञान नहीं था। इसलिए, दूसरी लकडि़यों की तरह, वो चंदन को जलाता और उसका कोयला बेचकर थोड़े-बहुत पैसे कमाता।

Odisha foundation day This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Odisha foundation day

1 अप्रैल, 1936 में, ब्रिटिश भारत का एक अलग प्रांत बना- उड़ीसा। इसी दिन की याद में, आज हम, उड़ीसा दिवस मना रहे हैं। अब से हजारों साल पहले, उड़ीसा को कलिंग कहा जाता था। यह वही जगह है, जहां खून-खराबे को देखकर, राजा अशोक ने मन बना लिया था, कि वो फिर कभी युद्ध नहीं करेगा। हमारे राष्ट्रीय गीत- ”जन गण मन” में, जो उत्कल शब्द आता है, वो इसी उड़ीसा राज्य के लिए यूज हुआ है। मैं, आपको बताना चाहूंगा, कि भारत के जो 4 धाम हैं, उनमें से एक जगन्नाथ पुरी, उड़ीसा में है। एक ऐसा मंदिर, जिसमें दुनिया की सबसे बड़ी रसोई है।

पॉजिटिव सोच और खुशी के राज जाने This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

पॉजिटिव सोच और खुशी के राज जाने

क्या आपको भी लगता है कि आप, बिलकुल सीधे और सरल स्वभाव के हैं। और इसी वजह से, अक्सर लोग आपके भोलेपन का फायदा उठा जाते हैं। लेकिन ऐसे स्वभाव के भी बहुत, फायदे हैं, आइए इस कहानी के जरिए, समझें। एक सच्चा भक्त था, लेकिन बहुत ही सीधा-सादा। छल कपट का उसे पता ही नहीं था। लेकिन उसकी एक इच्छा थी, कि जल्द से जल्द उसे भगवान के दर्शन हो जाएं। इसके लिए, वो अक्सर, कई लोगों से उपाय पूछता रहता था। एक ठग को उसकी इस हालत का पता चल गया। इसलिए उसने, उस भक्त आदमी के साथ छल करने का सोचा। वो साधु का वेष बनाकर, उस व्यक्ति के पास आया और बोला- मैं तुम्हें आज ही भगवान के दर्शन करवा दूंगा, अपना सारा पैसा और सोना लेकर, मेरे साथ जंगल में चलो। वो आदमी खुशी-खुशी, ढोंगी साधु की बात मानकर, उसके साथ चल दिया। रास्ते में एक कुआं आया। ठग को मौका मिल गया, उसने कहा- इस कुएं में भगवान के दर्शन होंगे। तुम इन पैसों को यहां रख दो और कुएं में झांको।

Ram Navami This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Ram Navami

उनका जीवन पवित्रता, उनका धर्म निष्ठा, वो है सत्य संधान, वो है पार्थ समान। ज्ञान का अभिमान नहीं, बल्कि अभिमान का ज्ञान था उन्हें, भक्ति और श्रद्धा भरी है, मेरे भगवान राम की, हर इक तस्वीर। हिंदू लूनी-सौर कैलेंडर के अनुसार, आज से 8 दिन पहले नवरात्रि शुरू हुई थी। और आज, नौवें दिन, भगवान राम का जन्मदिन है। भगवान राम, भगवान विष्णु के अवतार हैं। माता, सीता धन और समृद्धि की देवी- लक्ष्मी की अवतार हैं।

दुःख की असली वजह को ऐसे सुख में बदले This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

दुःख की असली वजह को ऐसे सुख में बदले

दुख की असली वजह, कहीं बाहर नहीं, बल्कि हमारे ही अंदर है। हमारी सोच और विचारों की वजह से हमने कोई एक्शन लिया, और अब उस एक्शन के रिजल्ट में- हमें या तो खुशी मिल रही है या फिर दुख। आज की हमारी कहानी आपको बताएगी, कि जाने-अंजाने, हम कैसे, अपने ही दुख कारण बन जाते हैं। काफी समय पहले, एक राजा था। एक दिन उसके दरबार में, एक ज्योतिषी आया। उसने राजा से कहा, कि'' महाराज, आपके भाग्य में इतना ज्यादा धन है, कि आपकी 7 पीढि़यों तक खत्म नहीं होगा। ज्योतिषी चला गया, लेकिन राजा चिंता में पड़ गया, यह सोचकर कि उसकी 8वीं पीढ़ी का क्या होगा। राजा को इस बात की इतनी स्ट्रेस हो गई कि वो बीमार रहने लगा। कई वैद्य, हकीम, साधु और योगी आए, लेकिन उसे ठीक नहीं कर सके। फिर एक दिन, दरबार में एक सन्यासी आया, उसने कहा कि मैं, इन्हें ठीक कर सकता हूं। उसने राजा के सिपाहियों को कहा, - जाओ, और एक ऐसे आदमी का कुर्ता लेकर आओ, जिसे कोई चिंता ना हो।

Rajasthan Day('राजस्थान, पधारो म्हारे देश') This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Rajasthan Day('राजस्थान, पधारो म्हारे देश')

राजशाही, हमेशा से ही, अटरेक्टिव रही है। आज, भी ज्यादातर लोग, वेकेशन पर, महलों और किलों को देखना प्रैफर करते हैं। लेकिन भारत का एक ऐसा राज्य है, जहां आज भी राजघराने हैं, जो पहले की तरह रॉयल लाइफ जीते हैं। इनके पास आलीशान महलों से लेकर रॉल्‍स रॉयस जैसी लग्‍जरी गाडि़यां हैं। यहां के लोगों का पहनावा, उनकी भाषा, उनकी मेहमानवाजी और वहां का डिलिशियस फूड, इस राज्य को खास बनाता है। आप भी शायद यकीन न कर पाएं, लेकिन इस रेगिस्तानी राज्य में, बड़े-बड़े पर्वत और जलाशय भी हैं। महाराणा प्रताप, हम्मीर देव चौहान, राणा कुम्भा और सम्राट पृथ्वीराज चौहान जैसे कई महान राजा, इसी राजपूताना धरती के वीर हैं। राजस्थान की अट्रेक्शन, जयपुर का आमेर किला, चित्तौरगढ़ किला, जैसलमेर किला, हवा महल और शीशमहल के अलावा, राजस्थानी लोगों की मेहमानवाजी काबिलेतारीफ है। इसके पकवान इतने डिलिशियस हैं, जो आपको दीवाना बना देंगे। अगर कभी राजस्थान जाएं, तो गट्टे का पुलाव, मिर्ची बड़ा और खासकर दाल बाटी चूरमा और घेवर, खाना मत भूलना, इनके बिना, राजस्थान की आपकी यात्रा, अधूरी रह जाएगी।

ये झूठ आपने भी जरूर बोला होगा This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

ये झूठ आपने भी जरूर बोला होगा

झूठ से, हम सभी को बहुत नफरत है, लेकिन क्या ऐसा है कि आपने, अपनी जिंदगी में, कभी झूठ ना बोला हो? झूठ बोलने की, कई वजह हो सकती हैं, लेकिन लगभग, हर किसी की जुबान से, कभी न कभी तो झूठ निकला ही होगा। यह एक ऐसा सच है, जिसे हम स्वीकार करते हैं, लेकिन सिर्फ अपने मामले में, अगर कोई दूसरा झूठ बोले, तो हमें अच्छा नहीं लगता। सच की शक्ति को, आइए, इस छोटी सी कहानी से समझते हैं।

पहले तोलो, फिर बोलो This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

पहले तोलो, फिर बोलो

एक पुरानी कहावत है, पहले तोलो, फिर बोलो। आजकल, हर कोई इतना प्रो एक्टिव है, कि सामने से अगर किसी ने कुछ बोला, तो फटाक से जवाब मिलेगा। खासकर हमारे बच्चे। और कई बार, हम यह भी नहीं सोचते कि हमारे सामने है कौन। और गुस्से व उतालवेपन में सीधा पलटवार कर देते हैं। आज की हमारी कहानी, आपको अच्छे और बुरे परिणाम के बारे में सोचकर, प्रतिक्रिया करना सिखाएगी। एक बार एक व्यक्ति, अपने खेत से 40-50 गन्ने लेकर, घर जा रहा था। रास्ते में, एक छोटे बच्चे ने उससे गन्ना मांगा, वो व्यक्ति बहुत दिलेर था। उसने एक गन्ना निकाला, और बच्चे को दे दिया। गन्नों का गठ्ठा लेकर, वो दोबारा घर की तरफ बढ़ने लगा। इस बीच, रास्ते में उसे जो भी बच्चा मिलता, उसे एक-एक गन्ना, दे देता।

हार कर जीतने की कला कभी सीखी है आपने ? This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

हार कर जीतने की कला कभी सीखी है आपने ?

मान लीजिए, आपके पास 2 रास्ते हैं। एक धोखे से जीतने का, और दूसरा- ईमानदारी से हारने का, आप क्या चुनेंगे। आज मैं, आपको एक ऐसी कहानी सुनाउंगी, जिसमें एक युवा, सच की रक्षा के लिए, जीत का त्याग कर देता है। एक बार, क्रास कंट्री रेस चल रही थी। अंतिम दौर में सिर्फ 2 एथलीट बचे थे। रेस, लगभग अपने अंतिम पड़ाव पर थी। देखते ही देखते, पहला खिलाड़ी अंतिम रेखा के बिलकुल नजदीक पहुंच गया, लेकिन अचानक उसके कदम धीमे पड़ गए। उसे लगा, शायद उसने रिबन को क्रॉस कर लिया है और रेस जीत गया है, हांलांकि ऐसा था नहीं।

World Theatre Day This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

World Theatre Day

एक तरफ थिएटर का प्ले और दूसरी तरफ सिनेमा हॉल की मूवी हो, तो हम में से ज्यादातर लोग, दूसरी ऑप्शन चुनेंगे। लेकिन जानकर हैरान मत होना क्योंकि बॉलीवुड के किंग खान से लेकर, लगभग हर एक्टर, अपनी परफोरमेंस को और बेहतर करने के लिए, आज भी अपने बिजी शेड्यूल में टाइम निकाल कर थिएटर प्ले करते हैं। पृथ्वीराज कपूर, बलराज साहनी, ओम पुरी, नवाजुद्दीन सिद्दीकी, रत्ना पाठक शाह, शबाना आजमी, से लेकर परेश रावल तक, हर कलाकार ने थिएटर से, अपने करियर की शुरुआत की और आज बॉलीवुड की मशहूर हस्तियों में शामिल हैं। शाहरुख खान के फैन्ज इस आत से अच्छी तरह वाकिफ होंगे कि SRK ने बैरी जॉन एक्टिंग स्टूडियो में थिएटर प्ले के जरिए, एक्टिंग की शुरुआत की और आज, बॉलीवुड के बादशाह बन चुके हैं। यही नहीं, हिंदी सिनेमा के मशहूर विलेन- ओम पुरी ने, पंजाब के एक थिएटर से एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा, और आज, भारत ही नहीं, इंटरनेशनल लेवल पर भी इनके चर्चे हैं। शायद आपको जानकर हैरानी होगी लेकिन अनुपम खेर के अभिनय की कहानी कुछ ऐसी थी, कि उन्हें थिएटर एकेडमी में एडमिशन के लिए, 2 अटेंम्प्ट देने पड़े थे। इस कलाकार को, अपने पहले अटेम्ट में, थिएटर अकेडमी में एडमिशन नहीं मिला था और आज बॉलीवुड की यह जानी मानी हस्ती, दर्शकों के दिलों पर राज करती है। बॉलीवुड के बाबू राव आप्टे यानी परेश रावल ने 70 के दशक में नाटक करना शुरू कर दिया था।

किसी को दान कैसे दे This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

किसी को दान कैसे दे

कंजूसी की आदत, किसी भी व्यक्ति को- वेल्थ और हैप्पीनेस, दोनों से दूर कर देती है। धन को हम 3 तरीके से प्रयोग कर सकते हैं, उसका भोग कर सकते हैं, दान कर सकते हैं या फिर फिजूल में बर्बादी। फिजूलखर्ची एक अलग बात है, लेकिन अगर पैसे का, सही तरीके से भोग और दान नहीं हो रहा, तब भी उसका नाश ही है। आइए, दान की कला सिखाती, हमारी आज की कहानी के साथ आगे बढ़ें।

गुस्से के हाथ की, एक कठपुतली न बनें This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

गुस्से के हाथ की, एक कठपुतली न बनें

जब भी किसी को गुस्सा आता है, तो वो इन्सान यह एक्सक्यूज देता है कि सामने वाले की गलती थी, इसलिए उन्हें गुस्सा आया। हां, जाहिर सी बात है, कोई अचानक आए, और आपका कुछ नुकसान कर दे या फिर आपको गालियां निकालना शुरू कर दे, तो क्रोध तो आएगा ही। लेकिन आज की हमारी कहानी, आपको ऐसी परिस्थितियों में भी, शांत होने की कला सिखा देगी। एक साधु, अपने गुरु के आदेश पर तपस्या करने लगा। गुरु ने उसे एक साल, साधना करने को बोला था। आज तपस्या का अंतिम दिन था और अपनी साधना पूरी करके, वो शाम को, गुरु से मिलने वाला था। जहां पर साधु तपस्या कर रहा था, गुरु के गुप्त आदेश पर, एक औरत ने झाडू़ लगाना शुरू कर दिया। साधू के चारों ओर, कचरा और धूल उड़ने लगी। साधु की तपस्या भंग हो गई और वो, उस औरत पर बुरी तरह से बिगड़ा।

क्या आप, खुद को, दूसरों से कम समझते हैं This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

क्या आप, खुद को, दूसरों से कम समझते हैं

क्या आप, खुद को, दूसरों से कम समझते हैं। आत्मविश्वास खत्म हो गया है और हीन भावना से इतना भर चुके हैं, कि अब आपने भी इस बात को स्वीकार कर लिया हैं कि आप किसी काम के नहीं रहे। आज की हमारी यह कहानी, आपको खुद से प्रेम करना सिखा देगी, और उसके बाद, पूरी दुनिया आपको पहचानेगी। एक मोटिवेशनल स्पीकर, ने लोगों को 20 डॉलर का नोट, दिखाकर अपना सेमिनार शुरू किया। उसने लोगों से पूछा "आप में से कौन इसे पाना चाहता है?" लगभग सभी लोगों ने, अपने हाथ, ऊपर उठा कर कहा- मुझे चाहिए। ।

आपके सामने कोई परेशानी आती है, तो आप क्या करते हैं? This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

आपके सामने कोई परेशानी आती है, तो आप क्या करते हैं?

अगर, आपके सामने कोई परेशानी आती है, तो आप क्या करते हैं। समय पर एक्शन लेते हैं या फिर उसकी कीमत चुकाने के लिए इंतजार। टाइम पर एक्शन लेना कितना जरूरी है, यह आज की हमारी कहानी आपको बताएगी। एक बार एक साइंस लैब में, फिजिकल क्षमता पर टेस्टिंग चल रही थी। इसके लिए, साइंटिस्ट ने, एक मेंढक लिया और उसे एक बर्तन में रखा। फिर उस बर्तन में, पानी भरकर, धीरे-धीरे उसे गर्म करना शुरू किया। बर्तन पर ढक्कन नहीं लगाया गया, ताकि जब मेंढक, पानी के टेंपरेचर को, बर्दाश्त ना कर पाए, तो वो कूदकर, आसानी से बाहर आ सके।

Shaheed Diwas(Bhagat singh) This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Shaheed Diwas(Bhagat singh)

'आजादी ए इंसा के वहां फूल खिलेंगे, भगत सिंह, जिस जगह पे तेरा खून गिरा है।' भगत सिंह के बारे में, यह शब्द एक पाकिस्तानी शायर ने कहे थे। भारत का यह जांबाज क्रांतिकारी, महज 23 साल का था, जब अंग्रेजों ने उन्हें, फांसी पर लटका दिया था! पंजाब के बंगा गाँव में, साल 1907, में 28 सितंबर को, भारत के वीर क्रांतिकारी- भगत सिंह का जन्म हुआ था। किसे पता था कि यह बच्चा बड़ा होकर एक हीरो बनेगा और भारत की आजादी की लड़ाई का प्रतीक बनेगा। जब, वो सिर्फ 12 साल के थे, तब उनके गांव के एक निहत्थे बुजुर्ग को, बहुत सारे ब्रिटिश सैनिकों ने पीटा। यह देखकर भगत सिंह को बहुत दुख हुआ। तब उन्होंने महसूस किया कि भारत के लोगों पर अत्याचार किया जा रहा है और इसके लिए कुछ करने की जरूरत है।

गुस्से को ऐसे पिए This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

गुस्से को ऐसे पिए

क्या आप भी, अपने गुस्से से परेशान हैं? क्रोध पर नियंत्रण को लेकर, मैंने बचपन में एक कहानी सुनी थी। कि कैसे, अपने गुस्से पर काबू पा कर, एक गुस्सैल आदमी, महात्मा बुद्ध का शिष्य बन जाता है। एक दिन श्रावस्ती में, महात्मा बुद्ध की सभा चल रही थी। सब लोग, बुद्ध के प्रवचन सुन रहे थे। बुद्ध ने कहा- जो इन्सान, गुस्सा करता है, वो जहर खुद पीता है, लेकिन मरने की उम्मीद, किसी और से करता है। उनमें एक ऐसा आदमी बैठा था, जिसे बुद्ध की बातें सुनकर गुस्सा आ रहा था। वो आदमी, अचानक उठा, और महात्मा बुद्ध को, बुरा-भला कहने लगा। यह देखकर, पूरी सभा भड़क उठी। लेकिन बुद्ध ने, सभी को शांत किया। और, उस व्यक्ति को विनम्रता से पूछा- तुम्हें कुछ और कहना है। यह सुनकर, वो आदमी वहां से चला गया।

BIHAR DIWAS This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

BIHAR DIWAS

क्या आपने ऋतिक रोशन की- सुपर 30 फिल्म देखी है। वो फिल्म, आनंद कुमार की सच्ची कहानी पर आधारित है, जो आईआईटी-जेईई के लिए, पटना में गरीब छात्रों के लिए एक कोचिंग सेंटर चलाता है। आज हम बिहार की बात करेंगे, क्योंकि आज पूरा देश, बिहार दिवस मना रहा है। 12 दिसंबर, 1911 को ब्रिटिश इंडिया के गवर्नर लार्ड हार्डिंग ने एक अलग प्रांत के रूप में 'बिहार के गठन की, घोषणा की थी। जिसके बाद 22 मार्च 1912 को बिहार की स्थापना हुई। और उसी की याद में, हर साल 22 मार्च को बिहार डे मनाया जाता है, जिसकी शुरुआत, साल 2010 से हुई थी।

कब और कैसे किसे छोड़े देखें इस वीडियो में This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

कब और कैसे किसे छोड़े देखें इस वीडियो में

किसी रिश्ते या परिस्थिति में, कहीं आप उलझ तो नहीं गए हैं। मतलब, आपका मन उसे छोड़ना नहीं चाहता, और उस सिचुएशन में रहना भी, संभव नहीं है। आपने हर मुमकिन, कोशिश कर ली है, लेकिन रिजल्ट कुछ नहीं आ रहा। और अब, वो चीज, आपको खुशी से ज्यादा, तकलीफ दे रही है। तो क्या, यही वो समय है, जब उसे जाने देना चाहिए। लेकिन इसका कैसे पता चलेगा, कि उसे छोड़कर आगे बढ़ने का, ''यही'' सही वक्त है? चलिए, हम आपको, सही समय पर, सही निर्णय लेने की इस कला पर आधारित, एक कहानी सुनाते हैं।

ये कहानी आपका  नजरिया बदल देगी This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

ये कहानी आपका नजरिया बदल देगी

जब तक जिंदा हैं, परेशानियां तो रहेंगी ही। हो सकता है कि, आपकी जिंदगी में भी, कुछ दिक्कतें चल रही हों। लेकिन क्या वास्तव में, वो परेशानी, उतनी बड़ी है भी, जितना आप सोच रहे हैं? कहीं ऐसा तो नहीं कि, प्रोबलम छोटी सी है और आपको पहाड़ जितनी बड़ी लग रही है। आज की हमारी कहानी, आपके नजरिए को हमेशा के लिए बदल देगी। चलिए! शुरू करते हैं। अभी डिनर नहीं बना, और सब आते ही होंगे। यह सब, बड़बड़ाते हुए एक औरत, डायनिंग टेबल पर पड़े कुछ सामान को समेट रही थी। एक 10 साल का बच्चा, उसके पास खड़ा था और उसे कुछ पूछ रहा था। वो बार-बार, कुछ न कुछ पूछकर, उसे तंग कर रहा था। बच्चे की इस हरकत से, वो परेशान हो रही थी।

ऐसे करे नई शुरुआत This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

ऐसे करे नई शुरुआत

ऐसा लगता है, कि सब खत्म हो गया। जिंदगी से लेकर, अपनों तक, हर दरवाजा आपके लिए बंद हो गया हो, उस वक्त क्या करना चाहिए? क्या एक नई शुरुआत हो सकती है? हां, बिलकुल! हमारी स्टोरी का यह बच्चा, अगर ऐसा कर सकता है, तो आप क्यों नहीं? रात के लगभग, 12 बज रहे थे। बारिश में तूफान की आवाज, रात के सनाट्टे को चीरते हुए जा रही थी। चारों तरफ बिलकुल अंधेरा था, लेकिन एक घर से रोशनी आ रही थी, वहाँ चार मोमबत्तियां जल रही थी। बिस्तर पर एक 8 साल का लड़का बैठा था। एकदम बादल गरजे, वो कभी मोमबत्तियों को देखता, तो कभी खिड़की से बारिश को।

मेरी तो किस्मत ही ख़राब है क्या आप भी ऐसा सोचते हैं  This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

मेरी तो किस्मत ही ख़राब है क्या आप भी ऐसा सोचते हैं

मैं अपनी जिंदगी से, बहुत निराश हो चुकी हूं। मेरे साथ कुछ अच्छा नहीं होता, मेरी तो, किस्मत ही खराब है। क्या आपके मन में भी, ऐसे विचार आते हैं? आज मैं आपको एक घड़े की कहानी सुनाउंगी, जो एक व्यक्ति को, भगवान की माया और अपने जीवन का सही मतलब समझाता है। एक गांव में, पीपल के पेड़ के नीचे, संतों की सभा चल रही थी। पेड़ की छाया में, गंगाजल से भरा, एक घड़ा रखा था। उस सभा से थोड़ी दूरी पर, एक आदमी खड़ा था। वो काफी देर से, संतों के वचन सुन रहा था और मन ही मन सोच रहा था कि यह घड़ा कितना भाग्यशाली है। एक तो इसमें, किसी पोखर या तालाब का पानी नहीं, बल्कि गंगाजल भरा है। दूसरा, इस निर्जीव घड़े को, इन संतों की, सेवा का मौका मिला है। और दूसरी तरफ, मैं! जिसके साथ कभी, कुछ अच्छा नहीं होता। सब, किस्मत का ही खेल है।

सब्र का फल मीठा या तीखा This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

सब्र का फल मीठा या तीखा

हम, हर वक्त उतावलेपन में रहते हैं- यह करना है, वो पाना है। हमें लगता है, कि हमें, हर चीज, जल्द से जल्द, मिल जाए। लेकिन सब कहते हैं कि- सब्र से काम लो। पर, इंतजार करना, तो हमें आता ही नहीं है, फिर, कैसे सब्र रखें? एक कहानी सुनेंगे! अब से कई साल पहले की बात है। पहाड़ी की चोटी पर एक छोटा सा खुशहाल गांव था । खेती से लोग, अच्छा खासा पैसा, कमा लेते थे। लेकिन सूखा पड़ने की वजह से, इस बार, गांव में अकाल पड़ गया। लोग 2 मुट्ठी अनाज को तरसने लगे।

National vaccination day This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

National vaccination day

समय था 15वीं शताब्दी का, जब पूरी दुनिया में एक जानलेवा वायरल बीमारी फैली- चेचक यानी स्मॉल पॉक्स। साल 1545 की बात है, जब भारत में भी इसके मामले देखे गए। उस वक्त इसे इंडियन प्लेग बोला गया। हम आपको बताना चाहेंगे कि चेचक दुनिया की पहली बीमारी थी, जिसकी वजह से वैक्सीन यानी टीके का आविष्कार हुआ था। आज 16 मार्च को राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस मनाया जा रहा है। इस दिन को मनाने के पीछे भारत सरकार के, 2 मकसद हैं। पहला हर बच्चे की वैक्सीनेशन और दूसरा- frontline हेल्थ केयर वर्कर्स की कड़ी मेहनत का सम्मान करना। वैक्सीनेशन का मकसद, किसी भी इन्फैक्शन को समाज से मिटाना है।

 CBI देश के प्रधानमंत्री के अधीन क्यों आती है ? This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

CBI देश के प्रधानमंत्री के अधीन क्यों आती है ?

सेकंड वर्ल्ड वॉर के दौरान साल 1941 में, युद्ध से संबंधित चीजों को लेकर करप्शन का मामला सामने आया। इस मामले की इन्वेस्टिगेशन के लिए एक स्पेशल टीम बनाई गई, जिसका नाम था SPE यानी- स्पेशल पुलिस एस्टेब्लिशमेंट। इसके बाद, साल 1963 में एक लीगल फोरमल स्ट्रक्चर बनाया गया और इसका नाम बदलकर CBI- सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन कर दिया गया। सीबीआई सबसे पावरफुल इन्वेस्टिगेटिंग विंग है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि सीबीआई, सीधे सेंटर गवर्नमेंट यानी, हमारे प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करती है। अगर किसी मामले को सीबीआई इन्वेस्टिगेट कर रही है, तो कोई सीनियर ऑफिसर या कोई भी और एजेंसी, उनके बीच नहीं आ सकती और न ही उन पर दबाव बना सकती है। सीबीआई के इतिहास की बात करें, तो सीबीआई अब भारत सरकार की Ministry of Personnel, Pension & Public Grievances के तहत काम करती है और यह मंत्रालय प्रधानमंत्री कार्यालय के तहत आता है। यह याद रखें कि सीबीआई, एक्ट ऑफ पार्लियामेंट से नहीं बनी थी, बल्कि मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स के एक रेजोल्यूशन के तहत इसका गठन हुआ था। शुरुआत में सीबीआई को सिर्फ घूसखोरी और भ्रष्टाचार की जांच का ही अधिकार था, लेकिन 1965 से हत्या, किडनैपिंग, आतंकवाद, वित्तीय अपराध, आदि की जांच भी, सीबीआई के दायरे में कर दी गई। वर्तमान में सीबीआई के डायरेक्टर श्री Subodh Kumar Jaiswal हैं, जिन्हें साल 2021 में 2 साल के लिए अपॉइंट किया गया था।

International Day of Action for Rivers This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

International Day of Action for Rivers

आज नदियों के लिए अंतर्राष्ट्रीय कार्रवाई दिवस मनाया जा रहा है। अगर भारत की बात करें, तो दुनियाभर में कुल जितने जल स्त्रोत हैं, देश में उनका मात्र 4 प्रतिशत मौजूद है, लेकिन दुनिया की 18 प्रतिशत आबादी भारत में बसती है। इससे आप समझ सकते हैं कि हमारे पास जनसंख्या के मुकाबले, कितना कम पानी उपलब्ध है। भारत ही नहीं, आज पूरी दुनिया में लाखों-करोड़ों लोगों को, साफ पीने का पानी नहीं मिल रहा। क्या सच में, अगली सदी के युद्ध पानी के लिए लड़े जाएंगे? आज नदियों के लिए अंतर्राष्ट्रीय कार्रवाई दिवस की 26वीं वर्षगांठ है। जैसा कि हम जानते हैं कि एक डैम बनाने की वजह से, कई लोगों की जिंदगियां प्रभावित होती हैं, और इसी को देखते हुए, मार्च 1997 में, ब्राजील में एक बैठक हुई। इसी की याद में, आज दुनियाभर के कई देश यह दिवस मना रहे हैं। ये तो आप जानते ही हैं कि पृथ्वी का 71 प्रतिशत हिस्सा पानी से ढका हुआ है। लेकिन इसका 3 प्रतिशत से भी कम ताजा पानी है। हमारा अधिकांश पीने का पानी नदियों और झरनों से आता है, लेकिन पिछले कुछ समय में भारत में, वाटर रिसोर्स लगातार कम हो रहे हैं। वास्तव में समस्या यह है कि हमारे पास साफ पीने का पानी खत्म हो रहा है। संयुक्त राष्ट्र और नीति आयोग की रिपोर्ट कहती है कि साल 2030 तक, भारत की 40 प्रतिशत आबादी को साफ पीने का पानी नहीं मिलेगा।

जानें मार्केटिंग के एथिक्स This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

जानें मार्केटिंग के एथिक्स

बिजनेस, बड़ा हो या छोटा, मुनाफे के पीछे भागता है। जाहिर सी बात है, ये शुरू भी इसलिए किए जाते हैं। लेकिन ग्राहकों को टारगेट करने के लिए कुछ कंपनियां अनएथिकल रास्ते अपनाती हैं। एक उदाहरण लेते हैं। कभी आपको लगा है कि कपड़े धोने के किसी डिटर्जेंट की एडवरटीजमेंट में, सिर्फ बढ़ा चढ़ा कर दिखाया गया है। या फिर एक टूथपेस्ट से लेकर, वजन घटाने तक के कई विज्ञापन, झूठे और भ्रामक हैं। वास्तव में ये, कंपनियों के अनैतिक व्यवहार का एक छोटा सा उदाहरण है। एथिकल मार्केटिंग। जैसा कि इसके नाम से ही पता चल रहा है कि यह एक ऐसी मार्केटिंग है, जो कुछ सिद्धांतों और मूल्यों पर आधारित है। इस मार्केटिंग स्ट्रेटेजी में, कंपनी का उद्देश्य, सिर्फ अपने प्रोडक्ट बेचना नहीं होता, बल्कि यह भी ध्यान में रखना होता कि उस कंपनी और उसके प्रोडक्ट्स का समाज पर क्या प्रभाव पड़ रहा है। मतलब एक कंपनी को अपने प्रोडक्ट की क्वालिटी से लेकर, अपनी मार्केटिंग स्ट्रेटेजी बनाने तक, हर चरण में, जनता के लिए वफादार रहना है। कुछ ऐसी कंपनियों की बात करते हैं, जिनकी अनएथिकल प्रैक्टिस लोगों के सामने है। साल 1981 से लेकर, फाइनांशियल सर्विस कंपनी वेल्स फ़ार्गो में एक के बाद एक बड़े घोटाले हुए हैं। हेज़लनट्स, स्किम मिल्क, और कोको पाउडर से बने न्यूटेला से आप सब परिचित होंगे। वास्तव में नुटेला ब्रांड के पीछे कंपनी फेरेरो है। इसे भी अपने झूठे विज्ञापन के चलते, सेटलमेंट करने के लिए कई मिलियन डॉलर का भुगतान करना पड़ा था। इसके अलावा, Volkswagen का emissions scandal। जब उसने उत्सर्जन रीडिंग में हेरफेर किया था, ताकि उसकी कारों को ऐसा दिखाया जा सके जैसे वे पर्यावरण के अनुकूल हों। यही नहीं, बिजनेस की अनएथिकल प्रैक्टिस की इस सूची में, कोका कोला भी शामिल था, जिसने प्रोडक्ट की क्वालिटी से लेकर एडवरटीजमेंट में, जनता की भावनाओं को ठेस पहुंचाई थी।

stand against tobacco This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

stand against tobacco

1605 के करीब, भारत में तंबाकू की खेती पुर्तगालियों ने शुरू की थी। और आज तंबाकू की कंजप्शन और प्रोडक्शन के मामले में भारत दूसरे नंबर पर है। और इससे होने वाली बीमारियों की वजह से देश में हर साल लगभग 1.35 मिलियन लोग मरते हैं। तंबाकू के इतिहास की बात करें, तो यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है। अनुमान लगाया जाता है कि 5000-3000 ईसा पूर्व में, पहली बार इसकी खेती की गई थी। यह भी कहा जाता है कि एशिया में तम्बाकू 12वीं शताब्दी में भी मौजूद था, हालांकि इसके भी पक्के सबूत नहीं है। यह वो समय था, जब तंबाकू का उपयोग बीमारियों को ठीक करने और पूजा-पाठ के लिए किया जाता था। हम आपको बता दें कि साल 1492 में, क्रिस्टोफर कोलंबस, जब अमेरिका की यात्रा पर थे, तब उन्हें पहली बार पता चला था कि तंबाकू से नशा भी होता है। और यह भी उन्हें बाय मिस्टेक पता चला था। जब कोलंबस, टोबैगो आइलैंड पर उतरे, तब उन्होंने देखा कि वहां के स्थानीय लोग तंबाकू के पत्तों को सूंघ रहे थे या फिर धूम्रपान कर रहे थे। तंबाकू को, कोलंबस ने खुद सूंघकर देखा, उन्होंने भी महसूस किया कि इसमें नशा था। इसलिए वो सूखे पत्तों की कुछ मात्रा और बीज, अपने साथ ले गए और इस तरह तम्बाकू यूरोप में भी पहुंच गया।

वफादार ग्राहक बनाने के टिप्स This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

वफादार ग्राहक बनाने के टिप्स

हर बिजनेसमैन चाहता है कि उनके ग्राहक, हमेशा उनके साथ जुड़े रहें। लेकिन ग्राहकों का विश्वास जीतने के लिए, आप क्या कर रहे हैं। ऐसा क्या किया जाए कि कोई कस्टमर आपके पास, बार-बार लौट कर आए? वफादार ग्राहक बनाने के टिप्स क्या आप भी जानना चाहते हैं? बिजनेस चलाना आसान काम नहीं है, और खासकर तब, जब बात, ग्राहकों को, अट्रैक्ट करने की हो। ग्राहकों की वफादारी का सीधा मतलब यह है कि वो आपके प्रोडक्ट को खरीदने में कितनी दिलचस्पी रखते हैं - चाहे वह एयरलाइन हो, जूते का ब्रांड या फिर कार निर्माता हो। कस्टमर लोयलटी का मतलब, आपके ब्रांड के पीछे एक ऐसी जमात को बनाना है जो आपके प्रोडक्ट्स के लिए पागल हो, जो मार्केट में दूसरे विकल्प होने के बावजूद, आपका प्रोडक्ट खरीदें। मशहूर ब्रांड एप्पल का ही उदाहरण ले लेते हैं। इसके प्रोडक्ट सबसे महंगे हैं, लेकिन अपनी क्वालिटी और सर्विस की वजह से टॉप लिस्ट में है। आइए समझते हैं कि एक कंपनी के लिए, कस्टमर लोयलटी यानी ग्राहक वफादारी जरूरी क्यों है। इसका पहला कारण यह है कि आपके वफादार कस्टमर आपके ब्रांड एम्बेसेडर हैं। अगर आपके प्रोडक्ट और सर्विस से वो खुश हुए, तो परिवार, दोस्तों से लेकर सोशल मीडिया पर, आपका प्रोडक्ट वायरल हो सकता है। क्योंकि आज हर कोई, किसी प्रोडक्ट या कंपनी के बारे में जानने के लिए सोशल मीडिया पर रिव्यू चैक करता है। ऐसे में आपके 1 वफादार ग्राहक की, सोशल मीडिया पर की गई, आपकी प्रशंसा, कई नए ग्राहकों को आपके साथ जोड़ सकती है। लेकिन किसी कस्टमर के नेगेटिव रिव्यू आपकी ब्रांड को खत्म कर सकते हैं।

the power of brand awareness This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

the power of brand awareness

आज जितने भी सफल बिजनेस हैं, उनका सीक्रेट वेपन- ब्रांड अवेयरनेस है। मार्केट में इतना ज्यादा कॉम्पिटीशन है, कि किसी नए प्रोडक्ट या स्टार्टअप के लिए बाजार में टिकना, सबसे बड़ी चुनौती है, लेकिन ब्रांड अवेयरनेस, मार्केटिंग और पोजिशनिंग से यह संभव है। यह आपके टारगेट कस्टमर का भरोसा जीतने की कला है, जो आपकी सेल्ज और इक्विटी को प्रमोट करेगी। आइकॉनिक लोगो से लेकर वायरल मार्केटिंग कैंपेन तक, एक स्ट्रेटेजिक ब्रांड अवेयरनेस, आपके व्यवसाय को बदल सकती हैं। लेकिन आखिर क्यों, कुछ प्रोडक्ट अपनी ब्रांड वैल्यू नहीं बना पाते? ब्रांड अवेयरनेस का मतलब है कि कितने ज्यादा लोग आपके प्रोडक्ट या कंपनी को जानते और उस पर भरोसा करते हैं। उसके बारे में लोगों को कितना नॉलेज है, और उससे वो कितना फैमिलियर हैं। ब्रांड अवेयरनेस, मार्केटिंग की ओर पहला कदम है। क्योंकि जब लोग, किसी नए प्रोडक्ट के बारे में जानेंगे, तभी वो उसे ट्राई करने का सोचेंगे। उदाहरण के लिए अगर कोई आपसे कोल्ड ड्रिंक के बारे में पूछता है, तो आप तुरंत कोका-कोला या पेप्सी को याद कर सकते हैं। यही ब्रांड अवेयरनेस है।

superstore vs local store? This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

superstore vs local store?

आज हम बिग बॉक्स स्टोर के बारे में बात करेंगे। यह रिटेल स्टोर हैं। कुछ दशक पहले, ये सिर्फ, किराने और दूसरी घरेलू चीजें बेचते थे, लेकिन आज इनमें कपड़े से लेकर, इलेक्ट्रॉनिक्स, तक हर चीज, उपलब्ध है। वॉलमार्ट और कॉस्टको स्टोर, इसी के उदाहरण हैं। ये सुपरस्टोर थोक में चीजें खरीदते हैं, या खुद मैन्युफैक्चरिंग करते हैं और आगे उन्हें ग्राहकों को बेचते हैं। इसी वजह से, इनके प्रोडक्ट, किसी स्थानीय दुकान की तुलना में सस्ते होते हैं। सबसे पहले रिटेल को समझते हैं कि यह है क्या। वास्तव में ग्राहकों को वस्तुएं और सेवाएं बेचने की प्रक्रिया, रिटेल कहलाती है। इसमें फिजिकल और ऑनलाइन स्टोर दोनों हो सकते हैं। आसान शब्दों में कहें, तो प्राचीन काल के यात्रा करने वाले व्यापारी से लेकर बड़े शॉपिंग मॉल, बड़े-बॉक्स स्टोर और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म तक, सब रिटेल के तहत आते हैं। अब से कुछ दशक पीछे देखें, तो रिटेल मार्केट की एक चेन देखने को मिलती थी। जिसमें मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री के विभिन्न डिपो, होते थे, जो कई राज्यों में डीलर्स को सामान बेचते थे। उसके बाद ये डीलर, होलसेलर को बल्क में अपना माल बेचते थे। और ये होलसेलर आगे रिटेलर्स को प्रोडक्ट बेचते थे। ये साइकल यूं ही चलता रहा, लेकिन एक समय वो आया, जब साल 2007 में वॉलमार्ट ने bharti enterprises के साथ मिलकर और रिलायंस रिटेल जैसी बड़ी कंपनियों ने मार्केट में एंट्री की और सीधे, आम ग्राहकों के साथ जुड़े।

Happy holi This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Happy holi

कृष्ण प्रेममयी राधा; राधा प्रेममयो हरिः यानी राधा कृष्ण के शुद्ध प्रेम से और हरि, राधा के शुद्ध प्रेम से बने हैं। अपनी शरारतों से, गोपियों को परेशान करने वाले, नटखट नंदलाल। माखन चोर, मां यशोदा के कान्हा आनंद स्वरूप हैं, जिनके सांवले रंग के बावजूद, नवल किशोरी राधा उनकी दीवानी हो गई। आज भी कहीं बांसुरी की धुनते हैं, तो ब्रज के मेरे बांके बिहारी का चेहरा आंखों के सामने आ जाता है, तब समझ में आता कि मुरलीधर के रंग में रंगी, वो राधा रानी क्यों प्रेम मग्न होकर झूमती थी। आज 'वसंत, 'रंग और 'प्यार की होली है! इसे धुलेंडी, धुलिवन्दन, धुरखेल और वसंतोत्सव भी बोला जाता है। होली की कोई सीमा नहीं है। इसमें हैरानी की कोई बात नहीं कि दुनिया भर में हजारों लोग अपनी संस्कृति और आस्था के बावजूद इस दिन को मनाते हैं। होली के पीछे कई मान्यताएं हैं। एक कथा यह है कि एक बच्चे के रूप में भगवान श्रीकृष्ण को पूतना के स्तन से जहर दिया गया था, तो इस वजह से उनकी त्वचा का रंग नीला हो गया था। भगवान कृष्ण सांवले रंग के थे, और राधा बहुत गोरी थीं। कृष्ण को लगा कि सांवले रंग के कारण, राधा उन्हें स्वीकार नहीं करेगी। गोपाल ने अपनी यह दुविधा, यशोदा मां को बताई। यशोदा ने चंचलता से कृष्ण को सुझाव दिया कि कोई भी मतभेद दूर करने के लिए, राधा के चेहरे पर रंग लगा देना। कृष्ण ने राधा के चेहरे पर गुलाल लगाया। राधा ने भी सांवले कन्हैया को स्वीकार किया और इस तरह, उस दिन से लोग होली मनाने लगे।

Holika Dahan This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Holika Dahan

आज छोटी होली व होलिका दहन है, जो होली के त्योहार की एक खास रस्म है। होली, फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को आती है। इस खास त्योहार की जड़ें, हिंदू धर्म से जुड़ी हैं, लेकिन आज यह त्योहार, अपने धार्मिक बंधनों से आजाद होकर, हर किसी की जिंदगी में नया रंग लाता है। गुलाल और ढेरों रंगों के साथ, परिवार और मित्रों से मौज-मस्ती, इस दिन का अहम हिस्सा बन चुका है। होली संस्कृत भाषा का शब्द है, जो मूल रूप से हिरण्यकश्यप की बहन "होलिका" से जुड़ा है। होलिका दहन को लेकर बिहार का पूर्णिया जिला प्रसिद्ध है, क्योंकि माना जाता है कि होलिका का दहन वहीं हुआ था। होलिका दहन, होली से एक दिन पहले मनाया जाता है। इसके पीछे, एक पौराणिक कथा है। हो सकता है, अपने बचपन या, कभी न कभी आपने भी, हिंदुओं के धार्मिक ग्रंथ पुराण की यह कथा सुनी हो। हिरण्यकश्यप नाम का एक दैत्य राजा था। वो बहुत पराक्रमी और शक्तिशाली था। पत्नी कयाधु से उसे, प्रह्लाद नाम का एक पुत्र था। एक बार हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद को बड़े प्यार से पूछा कि तुम्हें सबसे ज्यादा क्या पसंद है। प्रह्लाद ने प्रसन्न होकर जवाब दिया कि मुझे भगवान विष्णु की उपासना करने में सबसे ज्यादा खुशी मिलती है। यह सुनकर हिरण्यकश्यप को क्रोध आ गया, क्योंकि घमंड में चूर होकर, वो खुद को भगवान मानने लगा था। लेकिन उसका पुत्र प्रह्लाद, भगवान विष्णु का भक्त था, जो हिरण्यकश्यप को बिलकुल गवारा नहीं था। वो नहीं चाहता था कि उसका पुत्र भगवान विष्णु की आराधना करे, लेकिन प्रह्लाद अपने पिता की बात नहीं मान पाए, क्योंकि वो जन्मजात विष्णु भक्त थे। जब उनकी मां, गर्भावस्था में थीं, तब नारद उन्हें आश्रम लेकर आए थे, जहां वो, भगवान भक्ति, कीर्तन और आत्मनिवेद की विद्या मां के गर्भ में ही सीख चुके थे।

जाने टाइम मैनेज करने का बेहतरीन तरीका This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

जाने टाइम मैनेज करने का बेहतरीन तरीका

क्या आप यह बता सकते हैं कि आपने आखिरी बार कब आराम की सांस ली थी, बच्चों के साथ मौज-मस्ती की थी, या परिवार व अच्छे दोस्तों के साथ टाइम बिताया था? क्या दुनिया के साथ भागने की आपकी यह रफ्तार, आपको उन लोगों के साथ कनेक्ट होने से रोकती है, जो वास्तव में आपके लिए मायने रखते हैं? अगर हां, तो आइए, आज एक कहानी सुनते हैं। आराम से बैठिए और, तैयार हो जाइए, क्योंकि यह आपको कुछ नया सीखने के लिए प्रेरित करने वाली है। चलिए शुरू करते हैं! एक बार, एक प्रोफेसर, हर रोज की तरह क्लास में गए। साइंस की लैब थी, तो वहां कई बीकर, सेफ्टी ग्लास, क्रिस्टल और कई प्रकार के पत्थर रखे हुए थे। क्लास में काफी बच्चे प्रेजेंट थे, लेकिन कुछेक उन्हें अबसेंट दिखे। जब कक्षा शुरू हुई, तो उन्होंने बिना एक भी शब्द बोले, वहां रखा एक बड़ा खाली जार उठाया और उसे ठीक ऊपर तक चट्टानों से भर दिया। उन चट्टानों का व्यास लगभग 2 इंच था। जार को भरने के बाद, उन्होंने छात्रों से पूछा कि क्या जार भर गया है। तो बच्चों ने जल्दी से हां में जवाब दिया। यह देखकर, प्रोफेसर ने फिर छोटे-छोटे कंकड़ का एक डिब्बा उठाया और उन कंकड़ों को, उसी चट्टानों से भरे जार में डाल दिया। उन्होंने जार को हलके से हिलाया। और ऐसा करते ही, वो छोटे-छोटे कंकड़, जार में चट्टानों के बीच खुद ब खुद एडजस्ट हो गए। छात्र हँसे। प्रोफेसर ने अपने छात्रों से एक बार फिर पूछा कि क्या जार भर गया है। इस बार, विद्यार्थी बिलकुल sure थे और उन्होंने कहा कि, हाँ, अब यह जार भर चुका है।

What is animal care and why is it important? This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

What is animal care and why is it important?

खास लम्हे के आज के एपिसोड में हम बात करेंगे, एनिमल वेलफेयर यानी जानवरों की देखभाल के बारे में। पशु, पृथ्वी की विविधता का एक अभिन्न हिस्सा हैं। गाय, कुत्ता और बंदर जैसे कई जानवर, हम अपने आसपास तकरीबन रोज देखते हैं! अक्सर चिड़ियाघर में जंगली जानवरों को देखने के लिए जाते हैं। लेकिन क्या हर जानवर को उचित आवास और जरूरत पड़ने पर, सही मेडिकल केयर मिल पा रही है? पशु कल्याण में कई चीजें शामिल हैं, जैसे कि कोई जानवर किस हालात में है, उसका मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य, आवास, पोषण और जिम्मेदार देखभाल आदि। मतलब वो जानवर स्वस्थ, आरामदायक, जिंदगी जीने में सक्षम है, या फिर दर्द, डर और संकट की परिस्थितियों में तो नहीं है। क्योंकि दुनिया भर में बहुत सारे जानवर ऐसे हैं, जो मनोरंजन, भोजन, चिकित्सा, फैशन और वैज्ञानिक उन्नति के लिए उपयोग होने की वजह से वो पीड़ित हैं। हम मनुष्यों के अलावा, और भी कई जीव-जंतु, वनस्पतियां हमारे साथ प्रकृति को साझा कर रही हैं। जानवर, मनुष्य का कल्याण सुनिश्चित करते हैं, जैसे गाय से हमें डेयरी प्रोडक्ट मिलते हैं, कुत्ता हमारी और हमारे घर की सुरक्षा के साथ-साथ हमारे साथ मौज मस्ती करने वाला साथी बन जाता है। वास्तव में एक पशु पालना, सबसे सुखद अनुभवों में से एक है।

क्या आप जानते है global day of the engineer के बारे में? This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

क्या आप जानते है global day of the engineer के बारे में?

आज का दिन विश्व स्तर पर इंजीनियर्स के लिए सेलिब्रेट किया जा रहा है। सस्टेनेबल डेवलपमेंट की जरूरत को देखते हुए साल 2019 में यूनेस्को ने वर्ल्ड इंजीनियरिंग डे की घोषणा की थी। उसके बाद, 2020 से, हर साल 4 मार्च को यह दिवस मनाया जाने लगा। हम आपको बता दें कि 1968 में आज के ही दिन , वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ इंजीनियरिंग ऑर्गनाइजेशन स्थापित की गई थी। आज का दिन युवाओं को इंजीनियरिंग फील्ड में करियर के लिए प्रोत्साहित करता है और उन इजीनियरों को सम्मान देता है, जिनके प्रयास से दुनिया बदल रही है। आज हम आपको इंजीनियरिंग की दुनिया के कुछ अजूबों के बारे बताएंगे। साल 1937 का गोल्डन गेट ब्रिज, हमारे इंजीनियर्स की काबिलेतारीफ उपलब्धि थी, जिसे न सिर्फ हॉलीवुड फिल्मों में जगह मिली, बल्कि यह दुनिया में सबसे ज्यादा फोटो खिंचवाने वाला पुल भी है! जो अमेरिका की मशहूर सिटी सैन फ्रांसिस्को में है। एक और ऐसा ही अजूबा, बुर्ज खलीफा है। हो सकता है, आप में से भी कई ऐसे रोमांटिक कपल होंगे जो अपने पार्टनर को Eiffel Tower के सामाने प्रोपोज करने का प्लान कर रहे होंगे। इसके अलावा, विदेशियों की अट्रैक्शन, भारत की प्राचीन धरोहर "ताजमहल" को कैसे भूल सकते हैं। वास्तव में हमारे इंजीनियरों ने कई ऐसे निर्माण किए हैं, जो एक कल्पना जैसे लगते हैं।

जमशेदजी टाटा के एम्पायर के साथ जाने World Wildlife day बारे में This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

जमशेदजी टाटा के एम्पायर के साथ जाने World Wildlife day बारे में

आज 3 मार्च है, और यह तारीख, भारत के इतिहास के साथ-साथ, फ्यूचर के लिए भी बहुत इंपॉरटेंट है, क्योंकि आज जमशेदजी टाटा की बर्थ एनीवरसरी और वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ डे है। मुंबई में भारत का पहला और बेहतरीन लक्ज़री होटल बना था। साल 1898 में उसकी नींव रखी गई थी, और 16 दिसंबर 1903 को, 17 मेहमानों के लिए उस पैलेस के द्वार खोल दिए गए थे। हम बात कर रहे हैं, ताज पैलेस की, जिसे जमशेदजी टाटा ने बनवाया था। उस वक्त, यह भारत का पहला और इकलौता होटल था, जिसमें बिजली, अमेरिकी पंखे, जर्मन लिफ्ट, तुर्की बाथरूम के साथ-साथ, अंग्रेजी बटलर थे। और यही वो होटल था, जिसे फर्स्ट वर्ल्ड वॉर के दौरान, 600 बिस्तर वाले अस्पताल में बदल दिया गया था। A-टाटा एंड संस ग्रुप के फाउंडर, जमशेदजी टाटा का जन्म 3 मार्च, 1839 को गुजरात के नवसारी शहर में हुआ था। वे पारसी पुजारियों के परिवार से थे, और पिता नुसरवानजी टाटा की इकलौती औलाद थे । उनके परिवार की कई पीढि़यां पुरोहिताई में लगी रहीं, लेकिन जमशेदजी टाटा के पिता ने यह कल्चर बदल कर, बिजनेस में हाथ आजमाने का सोचा। और 14 साल की उम्र में जमशेदजी, बॉम्बे में अपने पिता के पास चले गए। जब वो 16 साल के थे, तब उनकी शादी हीराबाई से हो गई थी। इस दंपति के दो बच्चे हैं, दोराबजी टाटा और रतनजी टाटा, जो जो आगे चलकर जमशेदजी के उत्तराधिकारी बने। जमशेदजी तकरीबन 20 साल के थे, तब उन्होंने अपने पिता के साथ फर्म में काम करना शुरू कर दिया। और 29 साल की उम्र में सिर्फ 21, हजार रुपये के साथ एक trading कंपनी की शुरुआत की। वो पहले ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने काम के घंटे, सिक लीव, पेंशन और ग्रेच्युटी की पेशकश की थी, जिसके बारे में उस वक्त, कोई और कोरपोरेट हाउस सोच भी नहीं रहा था। हालांकि साल 1904 में भारत ने इन्हें खो दिया, लेकिन टाटा इंडस्ट्री, आज पूरी दुनिया में सुर्खियों में है।

World Teen Mental Wellness Day This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

World Teen Mental Wellness Day

आज ज्यादातर पेरेंट्स बच्चों के नेचर से परेशान हैं। आप में से कितने लोगों को लगता है कि उनके बच्चे जैसे -जैसे बड़े हो रहे हैं, वैसे-वैसे उनमें चिढ़चिढ़ापन और गुस्सा बढ़ता जा रहा है? या फिर आप में से कितने, एडोलसेंस को यह लगता है वो पेरेंट्स से लेकर सोसायटी तक, किसी को कुछ नहीं समझा सकते? आज यह सवाल, इसलिए, क्योंकि आज, हर साल की तरह, पूरी दुनिया वर्ल्ड टीन मेंटल वेलनेस डे मना रही है? वर्ल्ड टीन मेंटल वेलनेस दिवस को मनाने का मोटिव टीनेर्ज की प्रोबलम्ज के लिए, समाज को अवेयर करना है। डब्ल्यूएचओ (WHO) के डाटा की बात करें, तो दुनियाभर में 10-19 साल के बीच, हर 7 में से एक बच्चा, mental disorder का शिकार है। वहीं 15-29 साल के एडल्ट्स में, मौत का चौथा कारण सुसाइड है। बचपन का मतलब ही एक स्ट्रेसफ्री और मौज-मस्ती की जिंदगी है। और जब बच्चे इस सबसे अच्छे पड़ाव, से एडल्टहुड की तरफ बढ़ते हैं, तो कई मुश्किलें, चुनौतियां उनके सामने होती हैं। बचपन में एक क्यूट और इनोसेंट बच्चा, जब टीनेज में पहुंचता है, उनके हार्मोन में बदलाव आता है। और इसी वजह से उनकी आदतें और इंटरस्ट बदलने लगता है। किसी का सही या गलत ट्रीटमेंट भी समझ आता है। टीनेज में बच्चे अट्रैक्टिव दिखना चाहते हैं, और एटेंशन सीकर होते हैं और कई बार इसी वजह से या फिर पीयर प्रेशर के चलते, कई नए काम करते हैं।

Zero Discrimination Day This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Zero Discrimination Day

हर साल की तरह, आज 1 मार्च को जीरो डिस्क्रिमिनेशन डे सेलिब्रेट किया जा रहा है। क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि स्कूल या कॉलेज में दूसरे बच्चे आपके साथ, किसी भी चीज को लेकर भेदभाव करते हैं ऑफिस या फिर सोसायटी में आपके स्टेटस और काम को लेकर भेदभाव किया गया हो। या आपने किसी के साथ, ऐसे अनफेयर ट्रीट किया हो। क्या आपने कभी सोचा है कि नॉर्मल दिखने वाली, हमारी ऐसी एक्टिविटी दूसरों को किस हद तक हर्ट कर सकती हैं? वर्ल्ड डिस्क्रिमिनेशन डे व जीरो डिस्क्रिमिनेशन डे, की हिस्ट्री की बात करें, तो साल 2014 में आज के ही दिन, ये दिवस पहली बार मनाया गया था। हालांकि 1 दिसंबर 2013 को, वर्ल्ड एड्स डे के मौके पर, इस दिन को मनाने की घोषणा की गई थी। वास्तव में आज का यह दिन हमें समाज में एक बदलाव के लिए empathy, tolerance और हर किसी की रिस्पेक्ट करने के लिए मोटिवेट करता है। यह दिन, हमें सिखाता है कि किसी भी आधार पर, हमें दूसरों के साथ भेदभाव नहीं करना चाहिए। इस बार इसकी थीम की बात करें, तो यह वीमेन सेंट्रिक है। हम आपको बता दें कि डब्ल्यूएचओ के अनुसार पूरी दुनिया में तकरीबन 380 मिलियन महिलाएं हैं, जो गरीबी में जी रही हैं और हर 11 मिनट में एक महिला या लड़की को, उनके परिवार का ही कोई न कोई मैंबर, उनका मर्डर कर देता है। वीमेन एम्पॉवरमेंट के लिए ही, इस बार इस दिन को महिलाओं के लिए डेडिकेट किया गया है। आइए सबसे पहले डिस्क्रिमिनेशन को समझते हैं। इसका मतलब किसी के साथ अनफेयर तरीके से ट्रीट करना, है। इसकी वजह कुछ भी हो सकती है, उदाहरण के लिए उम्र, जैंडर, धर्म-जाति, Disability, Status या फिर किसी और कंट्री का होना।

National Science day  This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

National Science day

आज से लगभग 95 साल पहले, रमन इफेक्ट का पता लगाया गया था। बहुत से लोगों को शायद यह मालूम नहीं है, रमन इफेक्ट की खोज में, के.एस. कृष्णन ने भी सीवी रमन का साथ दिया था। साल 1930 में जब रमन को नोबेल पुरस्कार मिला, तो कुछ लोगों को लगा कि कृष्णन को उनके योगदान का प्रर्याप्त श्रेय नहीं मिला। जबकि कृष्णन उनके बहुत अच्छे व्यावसायिक मित्र थे, जिसकी चर्चा रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी में भी हुई है। कृष्णन ने खुद भी कहा था कि नोबेल पुरस्कार अपने आप में, इस विषय पर हमारी प्रगति और इतिहास का एक सच्चा और ईमानदार साक्ष्य है, और उन्हें उम्मीद भी थी कि सीवी रमन अपने भाषण में केआर रामानाथन के साथ शुरू करते हुए सभी को उनका उचित श्रेय देंगे। और, जब सीवी रमन को नोबेल पुरस्कार मिला, तब उन्होंने अपनी स्पीच के दौरान कृष्णन की बहुत तारीफ की थी। भारत रत्न सीवी रमन के योगदान को देखते हुए, भारत, हर साल 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाता है। इस दिवस की घोषणा साल 1986 में हुई थी और साल 1987 में पहली बार यह दिन मनाया गया था। भारतीय वैज्ञानिक चंद्रशेखर वेंकट रमन पहले भारतीय और एशिया के पहले व्यक्ति थे, जिन्हें साइंस का पहला नोबेल पुरस्कार मिला। इतना ही नहीं, वो एकमात्र non-White मतबल गैर-श्वेत भारतीय वैज्ञानिक थे, जिन्हें यह अवॉर्ड मिला था।

NGO के सही गलत की पहचान कैसे करे ?  This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

NGO के सही गलत की पहचान कैसे करे ?

आज, दुनियाभर में वर्ल्ड एनजीओ डे मनाया जा रहा है। आज, एनजीओ के कई चेहरे देखने को मिलते हैं। एक वो, जो सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लोगों की मदद कर रहे हैं। दूसरे वो एनजीओ, जो लोगों के मुद्दों, उनकी मांगों को लेकर, सरकार के रोल को, चेक एंड बैलेंस करने का काम करते हैं, फॉर एग्जांपल नर्मदा बचाओ आंदोलन में वॉलंटियर्स का काँट्रिब्यूशन। एनजीओ का एक और टाइप भी है, वो ऐसे एनजीओ हैं, जो लालच के चलते न तो सरकार के खिलाफ काम करते हैं, और न उनके फेवर में। उनका मेन मोटिव सिर्फ अपना प्रॉफिट बनाना है, बाकि किसी से कोई लेना-देना नहीं। और एनजीओ की यही वो कैटेगरी है, जो देश को खोखला कर रही है। एनजीओ की इंपॉरटेंस और इनके वॉलंटियरों को सम्मान देने के लिए हर साल, 27 फरवरी को वर्ल्ड एनजीओ डे मनाया जाता है, जो आज 89 से ज्यादा देशों में सेलिब्रेट किया जाता है। इस दिन को मनाने का विचार, साल 2009 में आया था, हालांकि यह दिन, पहली बार 27 फरवरी, 2014 को मनाया गया था। एनजीओ है क्या। यह एक नॉन प्रॉफिट आग्रेनाइजेशन है, जिसका इतिहास काफी पुराना है, लेकिन आज भी दुनिया को ngo की जरूरत है। यह एक सिविल पार्टनरशिप है, जिसमें ऑर्डिनरी नागरिक एक मिशन और विजन को सपोर्ट करने के लिए एक साथ आते हैं। अब अगर इनकी फंडिंग की बात करें, तो इन्हें कोई इंडिविजुअल या कोई कंपनी भी फंड दे सकती है, इसके अलावा ये गवर्नमेंट और विदेशी फंडिंग भी ऑब्टेन कर सकते हैं।

साइबर सिक्योरिटी क्यों समय की माँग बन चुकी है This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

साइबर सिक्योरिटी क्यों समय की माँग बन चुकी है

हैकिंग, एक टेक्निकल थ्रेट है, आसान शब्दों में कहें, तो जब कोई, आपकी परमिशन के बिना, आपके नेटवर्क सिस्टम और सरवर को अपने कंट्रोल में कर लेता है। और ऐसा करने वाला व्यक्ति, हैकर है। हैकर्स, बेसिकली, 3 टाइप होते हैं। पहला ब्लैक हैट हैकर्स, जो खराब ईरादे से अपने आईटी स्किल का यूज करते हैं। दूसरा व्हाइट हैट हैकर्स, यानी एथिकल हैकर्स जो किसी इंडिविजुअल या कंपनी के लिए एक defensive purposes से काम करते हैं। और तीसरी कैटेगरी- ग्रे हैट हैकर्स, की है, जो एथिकल और अनएथिकल दोनो टाइप की एक्टिविटीज में इन्वोल्व होते हैं। The Matrix, A Wednesday और V for Vendetta। क्या आपने ये मूवीज देखी हैं। कैसी लगीं। फिल्मों में हैकर्स की प्लानिंग, उनका हर एक्शन हमें बहुत इंटरस्टिंग लगता है। लेकिन यही, साइबर थ्रेट अगर रियालिटी में, हमारे साथ हो जाएं, तो? आज इंटरनेट ही हमारी दुनिया है, जहां शॉपिंग, बैंकिंग से लेकर, लोगों से कनेक्ट करना, हर चीज के लिए हम, इस पर डिपेंड हो चुके हैं। लेकिन इस नेटवर्क सिस्टम का नुकसान भी है। आज ऑनलाइन धोखाधड़ी, रैंसमवेयर और फिशिंग अटैक जैसे साइबर थ्रेट हर बीत रहे दिन के साथ बढ़ रहे हैं। सिर्फ लोग ही नहीं, कंपनियों को भी ट्रैप किया जा रहा है।

ना बोलने में हिचकिचाहट क्यों ? This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

ना बोलने में हिचकिचाहट क्यों ?

आप किचन में ऑलरेडी बिजी हैं, लेकिन किसी ने आपको, कोई और काम करने का ऑर्डर दे दिया। या आज आप आराम करना चाहते थे, इसलिए आपने खुद का ऑफिस का काम या स्टडी भी नहीं की, लेकिन कोई आपको फ्री देखकर, अपना काम थमा कर चला जाए। या फिर, आप ऑफिस ऑफ होते ही घर भागने की फिराक में थे, और बॉस ने एक्स्ट्रा वर्क के लिए बोल दिया। तो बताइए आप क्या करेंगे। ऐसी सिचुएशन में आपका मन बार-बार नो बोल रहा होगा, लेकिन आपकी जुबान से हां निकल गया होगा। क्या आप भी उन लोगों में से एक हैं, जिन्हें नो बोलना नहीं आता? घर, फ्रेंडसर्कल, ऑफिस या सोसायटी में कभी आपका, मन हुआ हो, किसी बात को डिनाय करने का, लेकिन आप नहीं कर पाए। एक्चुअली किसी को मना करना, हर्गिज गलत नहीं है। कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो डायरेक्ट मना कर देते हैं। कुछ ऐसे होते हैं, जो कभी “ना” नहीं बोल पाते, और एक कैटेगरी उन लोगों की होती है, जो साफ मना भी नहीं करेंगे, और न ही हां बोलेंगे। मतलब वो ऐसा कहेंगे कि- अच्छा, सोचेंगे, बाद में बताते हैं। ऐसे लोग अपने आप को और दूसरों को भी प्रोबलम में डालते हैं, क्योंकि वो पहले मना नहीं करेंगे, और जब लोग उनसे उम्मीद लगा लेंगे, तब ऐन मौके पर मना कर देंगे। ऐसे में सामने वाले का वक्त बर्बाद होता है। अगर आप उसी वक्त मना कर देते हैं, तो उसे बुरा जरूर लगेगा, लेकिन उसका वक्त जाया होने से बच जाएगा। इसलिए कहा जाता है कि टाइम पर ना बोलना, एक आर्ट है।

central excise day This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

central excise day

आज 24 फरवरी को, सेंट्रल एक्साइज डे मनाया जा रहा है। ब्रिटिश दौर की बात करें, तो उस वक्त साल्ट, आबकारी और कस्टम डिपार्टमेंट, एक साथ थे। लेकिन मद्रास साल्ट एक्ट 1889 के तहत, नमक और आबकारी को मद्रास साल्ट डिपार्टमेंट के तहत ऑग्रेनाइज किया गया, जो मद्रास कस्टम हाउस से काम करता था। साल 1934 में एक टैरिफ एक्ट लाया गया। और यही वो समय था, जब Central Board of Revenue का गठन किया गया, जब कई चीजें टैक्स के दायरे में आ गई। शायद आप जानते होंगे कि साल 1924 तक शराब पर Excise duty, राज्य सरकार के अंडर थी। क्या आप एक्साइज ड्यूटी के बारे में जानते हैं। नो डाउट, आपको इस बारे में थोडी-बहुत जानकारी तो जरूर होगी! यह, एक Indirect Tax टैक्स है, जो चीजों की प्रोडक्शन या मैन्युफैक्चरिंग पर लगाया जाता हैं। सबसे पहले यह समझते हैं कि- टैक्स है क्या। 'टैक्स' शब्द लैटिन शब्द टैक्सारे या टैक्सो से लिया गया है। जिसका मतलब है- 'किसी चीज के मूल्य का आकलन करना'। यह सरकार द्वारा गुड्ज या सर्विसेज की खरीद और बिक्री पर लगाए जाते हैं। टेक्सेशन सिस्टम आज का नहीं है, हजारों साल पहले भी लोग, कोई न कोई टैक्स पे करते थे। यहां तक कि कौटिल्य का अर्थशास्त्र, एक प्लान्ड और वैल मैनेज्ड टैक्स सिस्टम के बारे में बताता है। जैसा कि आज हम जानते हैं कि आयकर भारत में पहली बार 1860 में अंग्रेजों द्वारा पेश किया गया था।

भगवान शिव की तरह परिवार को जोड़कर रखने का आर्ट क्या आप में भी है  This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

भगवान शिव की तरह परिवार को जोड़कर रखने का आर्ट क्या आप में भी है

गृहस्थी की गाड़ी कई पहियों पर टिकी होती है, और इसमें से किसी एक पहिए का भी बैलेंस बिगड़ गया, तो गाड़ी अपने ट्रैक से नीचे उतर जाती है। इसी संतुलन को बनाए रखने के लिए, फैमिली मेंबर्स के साथ आपसी तालमेल बिठाना यानी एक फैमिली मैनेजमेंट बहुत जरूरी है। लेकिन परिवार को बांध कर रखने का यह आर्ट, सीखे कहां से? इस सवाल का जवाब, भगवान शिव की जिंदगी में छिपा है। परिवार की एक फॉर्मल डेफिनेशन की बात करें, तो ये 2 या इससे ज्यादा लोगों का एक ऐसा ग्रुप है, जो by birth, marriage या adoption से एक-दूसरे के साथ जुड़े हैं। basically, परिवार को ब्लड रिलेशन से ही डिफाइन किया जाता है। आसान शब्दों में फैमिली का मतलब, एक छत के नीचे रहने वाले लोगों का ग्रुप है, वो छत घर और एक ऑफिस की भी की हो सकती है और यूनिवर्स की भी। उदाहरण के लिए हम, पूरे यूनिवर्स को ही एक फैमिली मानते हैं। इसका मतलब यह है कि हम हर किसी को, अपनों की तरह ट्रीट करें। परिवार में हर एक सदस्य अलग होता है। सभी के अलग इंटरेस्ट, अलग ज़रूरतें और अलग मुद्दे हैं, लेकिन फिर भी सब मिलकर एक परिवार बनाते हैं। वैवाहिक जीवन को सही तरीके से चलाना, जितना आसान दिखता है, उतना ही चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि यहां हर कोई दूसरे से अलग होता है। ज्यादातर परिवारों में मनमुटाव और अलगाव देखने को मिलता है, आखिर इसका कारण क्या है।

एक अच्छी विदेश नीति के फायदे This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

एक अच्छी विदेश नीति के फायदे

किसी भी देश की इकोनॉमिक, पॉलिटिकल और सोशल ग्रोथ में, इंटरनेशनल रिलेशन, का बहुत अहम रोल होता है। यह ठीक वैसा ही है, जैसे हमारे लिए हमारे पड़ोसियों से लेकर, हमारी जान-पहचान वाले बाकी लोग। हर कंट्री का कॉन्सेप्ट भी ऐसा ही है। अपनी आजादी के 75 साल के बाद, भारत एक युवा देश है, जिसके इंटरनेशनल रिलेशन और ग्रोथ ने, इसे ग्लोबल लेवल पर एक नई पहचान दी है। वास्तव में इंटरनेशनल रिलेशन में दोनों देशों का फायदा होता है। दोनों में इन्वेस्टमेंट और बिजनेस बढ़ता है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था विकसित होती है। सबसे पहले यह समझते हैं कि भारत की विदेश नीति है क्या। यह political goals का एक ऐसा सेट है, जो यह तय करता है कि एक देश, दुनिया के दूसरे देशों के साथ कैसे बातचीत करेगा। आसान शब्दों में कहें, तो डिप्लोमैटिक डिलींग का प्लान। विदेश नीति का उद्देश्य, दूसरे देशों के साथ कोलेबोरेशन (collaboration) के जरिए अपने विकास के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय शांति को बरकरार रखना, यानी दुनिया की एकता को बनाए रखना है। सरकार देश के विकास के लिए काम करती है। भारत की विदेश नीति का कार्य देश की अखंडता, नागरिकों, मूल्यों और संपत्तियों की रक्षा और सुरक्षा करना है। इंटरनेशनल रिलेशन को डेडिकेटेड, विदेश मंत्रालय, सरकार की एक एजेंसी है, जो भारत के पूरी दुनिया के साथ रिलेशन सुनिश्चित करती है। यह विदेश नीति बनाने, उसे लागू करने के लिए जिम्मेदार है। और इसी के जरिए, Indian Foreign Services के सदस्य दूसरे देशों में भारत की एंबेसी काम करती हैं, जिनका काम ग्लोबल मंच पर देश को रिप्रेजेंट करना है।

International Mother Language Day This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

International Mother Language Day

आज इंटरनेशनल मदर लैंग्वेज डे सेलिब्रेट किया जा रहा है। भाषा, है क्या, अपने इमोशन और थॉट्स को एक्सप्रेस करने का जरिया। लेकिन जो मदर लैंग्वेज है, वो खुद एक इमोशन है। कुछ समझाने से लेकर, चाहे किसी के लिए प्यार जताना हो, या गुस्सा करना हो, अपनी नेटिव या मातृभाषा में, इन इमोशन को एक्सप्रेस करने का फील ही कुछ और है। हमारा मन ही नहीं, हमारे दिमाग का भी मदर लैंग्वेज से इतना लगाव होता है, कि नींद में सपने भी हमें नेटिव लैंग्वेज में ही आते हैं। इंटरनेशनल मदर लैंग्वेज डे को मनाने का थॉट, सबसे पहले बांग्लादेश को आया था, हालांकि वो सिर्फ बांग्ला भाषा के लिए था। लेकिन यूनाइटेड नेशन जनरल एसेंबली को बांग्लादेश की यह राय अच्छी लगी, उसने 21 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के तौर पर मनाने की घोषणा की। और साल 2000 से यह दिन, हर साल मनाया जाने लगा। इस दिन को मनाने का मकसद दुनिया भर की, सभी मातृभाषाओं को प्रोमोट करना है। यूनेस्को का डाटा बताता है कि साल 2100 तक दुनिया की आधी भाषाएँ खत्म हो जाएँगी। इसके अनुसार, हर महीने में लगभग, 2 भाषाएं खत्म हो जाएंगी।

statehood day of Arunachal pradesh and mizoram This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

statehood day of Arunachal pradesh and mizoram

आपको क्या लगता है, कि अगर आपके पास भारतीय नागरिकता है, तो क्या आप देश का हर राज्य घूम सकते हैं। दरअसल ऐसा बिलकुल भी नहीं है। भारत के कुछ राज्य ऐसे हैं, जहां पर जाने के लिए, न सिर्फ विदेशियों को, बल्कि भारतीय नागरिकों को भी परमिट की जरूरत पड़ती है। इनमें से एक- 'उगते सूरज की भूमि' के नाम फेमस- अरुणाचल प्रदेश है, और दूसरा- मिजोरम। आज ये दोनों राज्य अपना स्टेटहुड डे मना रहे हैं, जिनका एक समृद्ध इतिहास आज भी कायम है। A- भारत 1947 में आजाद हुआ, लेकिन इसके कई राज्य, इसमें बाद में शामिल हुए। उनमें से 2 राज्य अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम हैं। भोर के जगमगाते पहाड़ों के नाम फेमस अरुणाचल प्रदेश को नॉर्थ-ईस्ट फ्रंटियर एजेंसी यानी नेफा के रूप में जाना जाता था। साल 1972 में, यह भारत का केंद्र शासित प्रदेश बन गया और तब इसका नाम बदलकर अरुणाचल प्रदेश कर दिया गया। यह राज्य, साल 1987 से हर साल 20 फरवरी को अपना स्थापना दिवस मनाता है, क्योंकि इस दिन अरुणाचल प्रदेश भारत का राज्य बना था। दरअसल, अरुणाचल प्रदेश- असम से अलग होकर बना है, जिसकी राजधानी ईटानगर है। शायद आपको पता होगा, अगर नहीं तो हम आपको बता दें कि ईटानगर का नाम ईटा किले के नाम पर रखा गया है, जिसका मतलब है- ईंटों का किला। यह किला तकरीबन 14वीं शताब्दी ईस्वी में बनाया गया था। इतना ही नहीं, अरुणाचल प्रदेश का जिक्र- कालिका-पुराण, प्राचीन हिंदू साहित्य और महाभारत और रामायण जैसे कुछ प्राचीन महाकाव्यों और कविताओं में भी मिलता है।

Chhatrapati Shivaji Maharaj Jayanti This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Chhatrapati Shivaji Maharaj Jayanti

मराठा साम्राज्य के फाउंडर, छत्रपति शिवाजी महाराज- एक ऐसा नाम है, जो हर भारतीय, के दिल में बसता है! आज देश में, खासकर उनके गृहराज्य, महाराष्ट्र में उनकी जयंती मनाई जा रही है। शायद आप जानते होंगे, छत्रपति शिवाजी को भारतीय नौसेना के पिता के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि वही थे, जिन्हें सबसे पहले नौसेना की अहमियत का एहसास हुआ था। और इसलिए उन्होंने एक नौसेना तैयार की थी। भारत के सबसे ज्ञानी और जिम्मेदार राजाओं में से एक, छत्रपति शिवाजी का जन्म 19 फरवरी 1630 को पुणे के शिवनेरी दुर्ग में जीजाबाई और शाहजी भोंसले के यहाँ हुआ था। उन्हें या तो शिवाजी बुलाया जाता था या फिर शिवाजी राजे भोसले। शिवाजी महाराज की जयंती को मनाने की शुरुआत, साल 1870 में पुणे में समाजसेवी ज्योतिराव फुले ने की थी। उन्होंने रायगढ़ में शिवाजी की समाधि की खोज की थी। इसके बाद उनकी जयंती को मनाने की परंपरा बाल गंगाधर तिलक ने जारी रखी। एक महान योद्धा, रणनीतिकार और लीडर, छत्रपति शिवाजी ने कई बार मुगलों और अंग्रेजों की सेना को धूल चटाई थी। गोरिल्ला युद्ध नीति के बारे में आप सभी सुना होगा, यह नीति भी मराठा साम्राज्य के योद्धा वीर शिवाजी की थी। उन्होंने इसी रणनीति के साथ कई युद्ध लड़े और जीते भी। साल 1640 में शिवाजी महाराज का विवाह सईबाई से हुआ था और साल 1674 में, उन्हें ऑफिशियली 'छत्रपति' या सम्राट के रूप में ताज पहनाया गया। 3 अप्रैल 1680 को 52 साल की उम्र में उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी मृत्यु के साढ़े तीन सौ साल से ज्यादा समय के बाद भी, आज भी उनकी वीरता, विजय और एक अच्छी शासन कला का गुणगान, राज्य के हर नुक्कड़ पर गूंजता है।

A night of consciousness-Mahashivratri This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

A night of consciousness-Mahashivratri

आज महाशिवरात्रि है। महाशिवरात्रि और महादेव के जन्म से लेकर, उनके विवाह की कई रोचक कथाएं, हम सुनते आए हैं। लेकिन शिव हैं क्या। शिव पुराण के वो, आग के खंभे से प्रकट महादेव या विष्णु के माथे के तेज से उत्पन्न अवतार, या फिर ब्रह्मा के पुत्र। आदि, अंत, प्रकाश या फिर अंधकार, क्या शिव की व्याख्या संभव है। शिव वो केंद्र है, जिसमें से सब कुछ पैदा हुआ है और अंत में उसी में समा जाता है। या यूं कहें कि हर चीज का शुरू और अंत, शिव हैं। दादी और मां के साथ, अक्सर मंदिर जाना होता था। वो कई देवी-देवताओं की कहानियां सुनाती थीं। महादेव के बारे में भी- कि एक ऐसा योगी था, जिसके गले में नाग था, सिर पर चांद था और कैसे उस योगी ने, एक राजा की बेटी से शादी की थी। हर साल, एक दिन ऐसा आता था, जब उस योगी महादेव की पूजा की जाती थी। वो दिन महाशिवरात्रि का था, यानी शिव की रात। एक स्पेशल तरीके से उनकी पूजा-अर्चना किया करते थे। शिव के मंदिरों में लोगों की भीड़ में, लंबी कतारों में भक्त उनके दर्शन के लिए खड़े मिलते। पूजा के साथ-साथ, दादी और मां की देखादेखी में, मैं भी व्रत कर लिया करती थी। हां, इसका एक सीक्रेट यह भी था कि दादी ने कहा था कि शिव का व्रत करने से पार्टनर शिव की तरह बहुत अच्छा मिलेगा।

Relationship between Government and Business This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Relationship between Government and Business

responsibility, accountability, obligation और duty, ये ऐसी चीजें हैं, जो गर्वनमेंट और Business हाउस का रिलेशन डिफाइन करती हैं। यानी दोनों सेक्टर एक-दूसरे से कनेक्टेड हैं। Business governance की बात करें, तो यह कुछ रूल्ज और कानूनों का, एक काँबिनेशन है, जिसके जरिए बिजनेस को ऑपरेट, रेगुलेट और कंट्रोल किया जाता है, जो कंपनी के stakeholders, shareholders, customers और suppliers के साथ-साथ, बिजनेस से जुड़ी हर चीज को इफेक्ट करते हैं। एग्रीकल्चर के बाद, बिजनेस हाउस में सबसे ज्यादा इॅम्पलोयमेंट जेनरेट होती है। जिस भी एरिया में कोई कंपनी खुलती है, वहां के लोगों को रोजगार के मौके मिलते हैं। एक बिजनेस हाउस, न सिर्फ उसके फाउंडर, बल्कि कई लोगों से जुड़ा होता है। यह सीधे तौर पर देश की ग्रोथ का सिंबल है। इस सेक्टर का, सरकार के साथ, एक्टिव रिलेशन है, जहां दोनों के कार्य या डिसिजन, एक- दूसरे को इफेक्ट करते हैं। दोनो ही सेक्टर, एक-दूसरे पर डिपेंडेंट हैं, और एक दूसरे से एक्सपेक्टेशन रखते हैं।

ऐसे struggle ने बनाया मुझे जीरो से हीरो। This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

ऐसे struggle ने बनाया मुझे जीरो से हीरो।

एक एंट्रप्रेन्योर, लीक से हटकर सोचता है। वो एक ऐसा रिस्क टेकर है, जो कुछ एडवेंचरस, समाज के लिए कुछ बड़ा करने और अपने कम्फर्ट जोन से बाहर निकलने का जज्बा रखता है। और उसका बिजनेस, न सिर्फ उस फाउंडर के लिए, बल्कि पूरे देश की इकॉनमी को इफेक्ट करता है। एक एंट्रप्रेन्योर, लोगों के रोजगार और उनकी इनकम का जरिया बनता है। लेकिन, अक्सर एंथ्रप्रेन्योरशिप कल्चर में टैक्स चोरी जैसे कई इल्लीगल या अनएथिकल काम देखने को मिलते हैं। तो क्या किसी कारोबारी की ऐसी सफलता को, जस्टिफाई किया जा सकता है? जब भी कोई फाउंडर एक इंडस्ट्री शुरू करता है, तो उसका पहला लक्ष्य- अपने फ्यूचर को सेक्योर करना और ज्यादा से ज्यादा प्रोफिट कमाना होता है। इसलिए वो, उसमें और ज्यादा इन्वेस्ट करता है। इन्वेस्टमेंट की आउटपुट, दीर्घकालिक होती है, यानी निवेश के कुछ साल बाद, उससे लाभ मिलना शुरू होता है। ऐसे में, किसी भी बिजनेस की सफलता में 2 चीजें, बहुत अहम रोल निभाती हैं। इसमें पहली चीज- उस कंपनी का प्रोडक्ट और उसकी सर्विस है। अगर उसके प्रोडक्ट की क्वालिटी अच्छी होगी, तभी लोग उस प्रोडक्ट को खरीदेंगे और उस कंपनी पर भरोसा करेंगे। दूसरा अहम फैक्टर- आर्गेनाइजेशन की पहचान है। ज्यादातर कंपनियां, सोशल वेलफेयर से जुड़ती हैं, जिसका इम्पैक्ट उनकी कंपनी की ग्रोथ पर पड़ता है। ज्यादातर कंपनियां जरूरतमंद लोगों और संस्थाओं को डोनेशन देती हैं। इतना ही नहीं, टाटा और विप्रो जैसी कुछ कंपनियों के बारे में आप भी जानते होंगे, जो समाज का भला कर रही हैं। उनके ऐसे काम की वजह से लोग उन पर विश्वास करते हैं, और उनके साथ जुड़ते हैं। उदाहरण के लिए बाबा रामदेव, योग और आध्यात्म के जरिए, करोड़ों लोगों से जुड़े थे, और आज यही कारण है कि बहुत कम समय में पतंजलि के प्रोडक्ट ने मार्केट में अच्छी जगह बना ली। ग्राहक किसी भी बिजनेस का सबसे अहम पार्ट हैं, जिनके बिना, कोई भी बिजनेस खत्म हो सकता है। प्रोडक्ट की क्वालिटी बहुत जरूरी है, लेकिन उसके साथ-साथ ग्राहकों के लिए कंपनी की सर्विस और उनके मालिक की पहचान, बिजनेस की ग्रोथ में अहम रोल निभाती हैं।

गर्लफ्रेंड के हाथ से तीखा खाना भी मीठा क्यों लगता है ? This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

गर्लफ्रेंड के हाथ से तीखा खाना भी मीठा क्यों लगता है ?

हम सब की लाइफ में भोजन, एक सेंटर पॉइंट है। हर कोई कमाता भी खाने के लिए ही है, बाकी जरूरतें इसके बाद आती हैं। इस बात में कितना सच है या नहीं, लेकिन कहते हैं दिल तक पहुंचने का रास्ता भी, पेट से होकर जाता है। इतना ही नहीं, एक भिखारी भी 2 जून की रोटी मांगता है और फूड लवर्स की तो बात ही कुछ और है। मां के हाथ से बना खाना, किसे पसंद नहीं, लेकिन कई बार हम, दूसरों के बनाए भोजन में कमियां निकालते हैं। अब सवाल यह है है कि भोजन जीभ के स्वाद के लिए खाना चाहिए, या फिर सिर्फ जिंदगी जीने के लिए। हम खाना क्यों खाते हैं, कुछ लोग पेट भरने के लिए। कुछ लोग, टेंशन में ज्यादा खाते हैं, और कुछ एन्जॉय करने के लिए। कुछ अपने खाने की आदत की वजह से " गैस्ट्रोनॉमी " और "पेटू" का खिताब पा चुके होंगे। लेकिन कई बार कुछ लोग, खाने में कमियां निकालते हैं। हां एक स्पेशल कैटेगरी के लोग भी होते हैं, जो अपने पार्टनर की बनाई हुई जली हुई रोटियां भी खुशी से खा लेते हैं। क्योंकि यहां पर कंप्लेंट करने का मतलब, खुद की शामत को इनविटेशन देने जैसा है।

Pulwama attack-Soldiers sacrifice This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Pulwama attack-Soldiers sacrifice

साल 2019 में आज के ही दिन, जम्मू-कश्मीर की पुलवामा डिस्ट्रिक्ट में, हमारे देश के सैनिकों पर हमला हुआ। इस आतंकी हमले में, भारत ने सीआरपीएफ के 40 शूरवीर खो दिए थे। उस दर्दनाक हादसे के कारण, 14 फरवरी का प्यार भरा दिन भी, हर साल, उन परिवारों को गमगीन कर जाता है, जिन्होंने अपना अंश खो दिया। प्यार भरा दिन इसलिए, क्योंकि जैसा कि हम सब जानते हैं कि यह दिन वैलेंटाइन डे के तौर पर सेलिब्रेट किया जाता है। अच्छा यह बताइए, वैलेंटाइन नाम सुनते ही, आपके दिमाग में सबसे पहली चीज क्या आती है- फूलों के गुलदस्ते, दिल की शेप वाले गुब्बारे, चॉकलेट, टेडी या फिर उस शख्स का चेहरा, जिसे आप डेट करना चाहते हैं। लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि यह प्यार का इजहार करने की यह परंपरा शुरू कैसे हुई? A-14 फरवरी 2019 को, सीआरपीएफ के काफिले पर जैश ए मोहम्मद के आतंकियों ने हमला कर दिया था। पुलवामा जिले में तकरीबन 350 किलो बारूद से भरी एक स्कॉर्पियो कार से सीआरपीएफ काफिले की बस को टक्कर मारी थी। यह हमला उन 44 सैनिकों के साथ-साथ, देश की अस्मिता पर सीधा हमला था। लेकिन उसके बाद जो हुआ, उसे पूरी दुनिया ने देखा। 2 हफ्तों के अंदर, 26 फरवरी की सुबह भारत ने इसका बदला लिया। भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमान तड़के तीन बजे पाकिस्तानी सीमा में दाखिल हुए और बालाकोट में जैश के आतंकी ठिकानों पर बम की बरसात की। जम्मू-कश्मीर का उरी हमला भी कुछ ऐसा ही था। और न जाने, कितनी बार, देश की रक्षा में हमारे जवान शहीद होते हैं। भारत माता की जय जयकार करने वाले, इन सैनिकों से, देश के हर नागरिक को सीख लेनी चाहिए कि कैसे, अपने मजहब, अपनी जात और यहां तक कि अपनों को भूलकर, देश प्रेम निभाया जाता है। अपने आप, और अपनों का ख्याल रखना, उनसे प्रेम करना और खुद के फायदे के लिए लड़ना, बहुत आसान है, लेकिन देश के ये जांबाज सैल्यूट डिजर्व करते हैं, जो दूसरों या यूं कहें कि देश के लिए, खुद को दांव लगाते हैं।

क्या आपको पता है बिना लाइसेंस के रेडियो सुनना कभी एक क्राइम था This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

क्या आपको पता है बिना लाइसेंस के रेडियो सुनना कभी एक क्राइम था

आज वर्ल्ड रेडियो दिवस है। अब से कुछ दशक पहले तक घर- घर में रेडियो बजता था। वो भी 24/7। हालांकि यह डिवाइस एंटरटेनमेंट के अलावा, हमें पूरी दुनिया से अपडेट रखती थी। शायद आपने भी अपने दादा-या पिता की परमिशन के बिना, चोरी चुपके उनके रेडियो से गीत सुने होंगे, लेकिन क्या आप जानते हैं कि साल 1885 के Indian Telegraph Act के तहत, घर में रेडियो रखने के लिए एक लाइसेंस लेना पड़ता था। बिना लाइसेंस के रेडियो सुनना, एक क्राइम था। इसके अलावा, आज भारत की कोकिला की याद में, पूरा देश राष्ट्रीय महिला दिवस भी मना रहा है। A. रेडियो की अहमियत को देखते हुए सितंबर 2010 में स्पेन ने पहली बार, रेडियो दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा। दुनियाभर की ब्रॉडकास्टिंग एसोसिएशंज के सहयोग से, इसे नवंबर 2011 में यूनेस्को के सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से अपनाया। और उसी साल, यूनेस्को की एक जनरल कॉन्फ्रेंस में 13 फरवरी को विश्व रेडियो दिवस डिक्लेयर किया गया था। मनोरंजन से लेकर खबरों के लिए, आजकल हमारे पास टेलिविजन, मोबाइल और कम्प्यूटर जैसे कई tools हैं, इसमें से एक रेडियो भी था। हालांकि आज भी कई घरों में शोपीस बनी यह अनोखी डिवाइस देखी जा सकती है। इसके इतिहास की अगर बात करें, तो जेम्स क्लर्क मैक्सवेल पहले व्यक्ति थे, जिन्होंने रेडियो के आविष्कार की पॉसिबिलिटी बताई थी, लेकिन पहले रेडियो का आविष्कार एक इटालियन इनोवेटर गुग्लिल्मो मार्कोनी ने किया था।

दयानंद सरस्वती नाम तो सुना ही होगा This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

दयानंद सरस्वती नाम तो सुना ही होगा

आज स्वामी दयानंद सरस्वती जी की जयंती है। सब जानते हैं कि जब वो जोधपुर में थे, तब उन्हें धोखे से मारा गया था। इसकी साजिश का मास्टरमाइंड कोई और नहीं, उनका रसोईया था। लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि यह सच जानते हुए भी, स्वामी जी ने उसे कुछ धन देते हुए जल्दी से जल्दी जोधपुर से बाहर निकलने को बोला था, क्योंकि वो जानते थे कि राजा उसे बिना दंड दिए नहीं मानेगा। स्वामी जी की तरह माफ करने का गुण, आज शायद ही देखने को मिले। स्वामी दयानंद सरस्वती का जन्म 12 फरवरी, 1824 को गुजरात के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम, लालजी तिवारी और माता का नाम यशोदाबाई था, और वो ब्राह्मण परिवार से थे दयानंद सरस्वती जी को बचपन में मूल कहा जाता था, क्योंकि उनका जन्म मूल नक्षत्र में हुआ था। एक दार्शनिक, सामाजिक नेता स्वामी दयानंद जी ने भारत में वैदिक धर्म को सुधारने का आंदोलन शुरू किया था। वो धार्मिक कर्मकांड और अंधविश्वास के खिलाफ थे, इसी दिशा में उन्होंने आर्य समाज नींव रखी। वो पहले ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने साल 1876 में स्वराज को "भारतीयों के लिए भारत" कहा था।

International Day of Women and Girls in Science This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

International Day of Women and Girls in Science

आज 11 फरवरी को, साइंस में महिलाओं और लड़कियों का इंटरनेशनल डे सेलिब्रेट किया जा रहा है। यूनेस्को की रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर की रिसर्च में महिलाएं, सिर्फ 30% से भी कम हैं। आज से दशकों पहले, वो टाइम भी था जब, माना जाता था कि लड़कियों को पढ़ाई नहीं करनी चाहिए। लेकिन समाज के सहयोग की वजह से, आज लड़कियां न सिर्फ पढ़ाई, बल्कि हर फील्ड में जॉब और लीडरशिप कर रही हैं। विज्ञान में महिलाओं और लड़कियों का अंतर्राष्ट्रीय दिवस का उद्देश्य, साइंस में महिलाओं और लड़कियों की भागीदारी बढ़ाना है। एक ऐसा एन्वायरनमेंट या फिर उन्हें अवसर मुहैया करवाना है, जिसके जरिए, ज्यादा से ज्यादा महिलाएं इस फील्ड में काम करें। वीमेन एम्पावरमेंट को बढ़ाए बिना कोई भी देश तरक्की नहीं कर सकता, और इसी को ध्यान में रखते हुए, महिलाओं के सपोर्ट के लिए कई अंतरराष्ट्रीय दिवस और प्रोग्राम चलाए जाते हैं। उन्हीं में से एक, आज का दिन है। इसके इतिहास की बात करें, तो दिसंबर 2015 में, संयुक्त राष्ट्र ने 11 फरवरी को विज्ञान में महिलाओं और लड़कियों के अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी। यह दिवस यूनेस्को और यूएन-महिलाओं द्वारा संस्थानों और सिविल सोसाइटी पार्टनर्स के सहयोग से शुरू किया गया था। और पहली बार यह दिवस, साल 2016 में मनाया गया था। कोविड 19 की वजह से दुनिया भर में कई लोगों की मौत हुई, और उस दौरान भी रिसर्च में महिला साइंटिस्ट ने अहम रोल निभाया। यही नहीं, कई महिला डॉक्टर और नर्सों की ड्यूटी के दौरान जान तक चली गई, हालांकि पुरुषों का योगदान भी अतुलनीय है।

आस्था या फिर निजी स्वार्थ This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

आस्था या फिर निजी स्वार्थ

एक ऐसे मर्यादा पुरुषोत्तम शख्स, जिनका पूरा जीवन परेशानियों से भरा रहा, लेकिन फिर भी उन्होंने हर जाति, हर वर्ग के दोस्तों के साथ, दिल से रिश्ता निभाया। अपना संयम और धैर्य कभी नहीं खोया। यही हमारे, भगवान श्री राम थे, जिनका पूरा जीवन हमें सिखाता है, कि अपने स्वभाव में रहते हुए, कैसे परिस्थितियों से लड़ना है। लेकिन कई बार, कुछ लोग उनके जीवन पर सवाल उठाते हैं। और आज फिर राम के जीवन पर लिखी गई रामचरितमानस की आलोचना हो रही है। क्या हमारे लिए, भगवान श्री राम का चरित्र ज्यादा जरूरी है या फिर ये विवाद? भगवान श्री राम की जीवन कथा, रामायण है। यह ग्रंथ महर्षि वाल्मीकि ने लिखा है। उसकी एक कॉपी- रामचरितमानस महाकाव्य है, जिसे गोस्वामी तुलसीदास जी ने 16वीं सदी में लिखा था। त्रेतायुग में धर्म की स्‍थापना के लिए, भगवान श्री राम ने राजा दशरथ के घर जन्‍म लिया था। हम सब जानते हैं कि छोटी-बड़ी समस्याएं हमारे जीवन का अहम हिस्सा हैं, इससे भगवान राम भी अछूते नहीं थे। उनकी पूरी जिंदगी कष्ट में बीती। सबसे पहले अपना राजपाट छोड़ना पड़ा, राजघराने की विरासत, एक ऐशोआराम की जिंदगी छोड़नी पड़ी। उसके बाद 14 साल वनवास झेलना पड़ा। ऊपर से पत्नी का विरह देखना पड़ा, जब रावण ने छल से सीता माता का अपहरण कर लिया। वो किसी भी हालत में किसी को कष्ट नहीं पहुंचाना चाहते थे, लेकिन

Stock Market This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Stock Market

हम अपना पैसा या तो बैंक में नकद या गोल्ड के तौर पर सेव करते हैं। या फिर प्रॉपर्टी और शेयर बाजार में इन्वेस्ट करते हैं। शेयर बाजार में रिटर्न ज्यादा होता है, और इसलिए लोग स्टॉक मार्केट में इन्वेस्ट करना सही समझते हैं। कुछ लोग इसे एक जुए की तरह देखते हैं, लेकिन जाहिर सी बात है कि लोग स्टॉक मार्केट में इन्वेस्टमेंट से मुनाफा कमाते हैं, जिसे वो आगे कहीं और इन्वेस्ट करते हैं, इससे रोजगार बढ़ता है और दूसरे लोगों की इनकम भी। इसलिए शेयर बाजार में इन्वेस्ट करना, इन्वेस्टर्स के साथ-साथ देश की इकोनॉमिक ग्रोथ के लिए भी बहुत फायदेमंद है। स्टॉक, शेयर और इक्विटी मार्केट, तीनों का एक ही मतलब है, जहां पर आप कंपनी के शेयर, खरीद और बेच सकते हो। शेयर खरीदने का मतलब है कि आप उस कंपनी के कुछ परसेंट हिस्से के मालिक बन जाते हैं। आपके शेयर या इन्वेस्टमेंट के अनुसार, उस कंपनी की कुछ ओनरशिप आपको मिल जाती है। ऐसे में जब भी कंपनी को फायदा होगा, उस प्रॉफिट का कुछ परसेंट आपको मिलेगा। तो जाहिर सी बात है, कंपनी को नुकसान होने पर, उस लॉस के हिस्सेदार भी आप ही होंगे। आज लगभग हर देश में स्टॉक मार्केट हैं, जहां हर देश के नागरिक, इन्वेस्ट करते हैं। अमेरिका के लगभग 56 से 58% लोग शेयर मार्केट में पैसे लगाते हैं, जबकि यूके की 33 परसेंट पोपुलेशन, चीन की लगभग 13 परसेंट और भारत की सिर्फ 3 परसेंट जनसंख्या, शेयर बाजार में निवेश करती है।

Paramount of a successful organization This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Paramount of a successful organization

एक कंपनी को सफल बनाने में कई चीजों का रोल है, जैसे बजट, प्लानिंग, कन्ज्यूमर और कर्मचारी। लेकिन एक संस्था की सफलता में कर्मचारियों का बहुत अहम रोल होता है। बिजनेस, रोजगार या फिर किसी भी कारण से, हम में से ज्यादातर लोग किसी न किसी ऑग्रेनाइजेशन से जुड़े हुए हैं, लेकिन आपको क्या लगता है कि एक आग्रेनाइजेशन में, वो संस्था खुद सबसे महत्वपूर्ण फैक्टर है, या फिर इसके कर्मचारी? आग्रेनाइजेशन कोई भी हो, सभी में एक बात सेम है, कि वो सब अंततः सफल होना चाहती हैं। चाहे जिन्होंने इसे बनाया है वो, या फिर भूतपूर्व और वर्तमान में काम करने वाले कर्मचारी हों, किसी भी संस्था की सफलता उसके सदस्यों पर निर्भर करती है। संस्था के फाउंडर और अध्यक्षों की सूझबूझ, ज्ञान और अनुभव, कंपनी को सफल बनाते हैं। वहीं कंपनी का हर छोटे से लेकर बड़ा कर्मचारी, आपके मिशन और विजन को अंजाम देता है। वो कंपनी की “जान” हैं। लेकिन कई बार, डिफरेंट व्यूज के कारण कई सीनियर और युवा कर्मचारियों में आपस में अनबन हो जाती है। जाहिर सी बात है, संस्थाओं को जिंदा रखना है, तो यंग empolyee बहुत जरूरी हैं। इसलिए घर-परिवार की तरह, आग्रेनाइजेशन में भी जेनेरेशन गैप को सही तरीके से समझने, उसका सम्मान करने की जरूरत है, ताकि विचारों की भिन्नता को smoothly मैनेज किया जा सके।

Internet Safer Day This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Internet Safer Day

इंटरनेट के इतिहास की बात करें, तो इसकी बर्थ डेट 1 जनवरी, 1983 मानी जाती है, लेकिन इससे कई साल पहले इसे बनाने के बारे में कोशिशें जारी हो चुकी थीं। इंटरनेट के आविष्कार का श्रेय किसी एक व्यक्ति को नहीं दिया जा सकता है। कई वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की सालों की रिसर्च के बाद यह कनेक्टिविटी और कम्युनिकेशन मॉडल विकसित हुआ था। एक सुरक्षित इंटरनेट यूज के लिए, हर साल, सुरक्षित इंटरनेट दिवस मनाया जाता है, और आज इसका 19वां एडिशन सेलिब्रेट किया जा रहा है। सवालों के जवाब पाने के लिए, करंट इवेंट्स से अवेयर रहने और खासकर, दुनिया भर के लोगों के साथ कनेक्ट रहने के लिए इंटरनेट की मदद से हर रोज, न जाने कितनी डिवाइस पर आप क्लिक और टैप करते हैं। 1960 के दशक में इंटरनेट की कल्पना, 2 कंप्यूटरों को जोड़ने के लिए की गई थी, लेकिन आज, हममें से अरबों लोग अपने विचारों, भावनाओं, डेटा और सोर्सेज को पूरी दुनिया के साथ ऑनलाइन साझा करते हैं। ज्यादातर लोग वर्ल्ड वाइड वेब या डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू को, इंटरनेट के रूप में पहचानते हैं, जिसे साल 1990 में, टिम बर्नर्स-ली ने इन्वेंट किया था। साल 2023 में इसी डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू अपना, 34वां जन्मदिन मनाया है।

modern society This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

modern society

कोई भी गांव, देश हो या फिर कोई भी चीज, वो हर गुजरते लम्हों के साथ बदलती है। हमारा व्यक्तित्व भी। और ग्रोथ के लिए समय के साथ बदलाव, जरूरी भी है। आज मार्डन दिखने की चाहत में, कहीं हम रूढि़यों की जगह अपने संस्कारों को तो नहीं छोड़ रहे? और अगर ऐसा है भी, तो क्या इसके लिए सिर्फ हमारी यंग जेनेरेशन जिम्मेदार है, या फिर घर के बड़ों से कोई कोताही हो रही है? मार्डन शब्द का मतलब है कि - पारंपरिक रूढियों को त्याग कर, नए युग की परिस्थितियों के अनुसार आचरण करना। इसका सीधा सा अर्थ है- अप टू डेट रहना। लेकिन आज हम, आधुनिकता की होड़ में अपने संस्कारों की आहुति दे रहे हैं। अपने शौक पूरे करना, अपने तरीके से लाइफ जीना, सही है, लेकिन अपने गार्जियंस, अपने बड़ों के सामने थोड़ा पर्दा रखना भी जरूरी है। उदाहरण के लिए एक दोस्त के साथ फ्रेंकली बात की जा सकती है, उसे वो चीज कूल लगेगी, लेकिन हो सकता है कि जो लोग आपसे उम्र में ज्यादा बड़े हैं, उन्हें वो बातें बुरी लग जाएं। हो सकता है कि उन्हें लगे कि आप उनकी रिस्पेक्ट नहीं करते। क्योंकि एक जेनरेशन गैप है, और वो हमेशा रहेगा। हमें उसकी वैल्यू और अस्तित्व दोनों को समझने की जरूरत है। मॉर्डन होना, हमेशा जरूरी रहेगा, लेकिन हमें कुछ रिश्तों की पोजीशन, उनकी गरिमा को निभाते हुए चलना होगा।

Guru Ravidas Jayanti This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Guru Ravidas Jayanti

''मन चंगा तो कठौती में गंगा'' यह मुहावरा अक्सर हमारी जुबान पर रहता है। यह गुरु रविदास जी के शब्द थे। अगर आपका हृदय शुद्ध है, तो नहाने के लिए बाल्टी का जल पवित्र है। पवित्र स्नान करने के लिए आपको कहीं जाने की आवश्यकता नहीं है। आज इन्हीं गुरु रविदास जी की जयंती के 646 साल पूरे हो रहे हैं। इसके अलावा मुंबई में, देश के सबसे बड़े कल्चरल इवेंट्स में एक, काला घोड़ा फेस्टिवल भी शुरू हो चुका है। आइए इस दिन की खासियत के साथ, लौट रहे इतिहास के खास लम्हों के साथ आगे बढ़ते हैं। आज 5 फरवरी को गुरु रविदास जयंती है, और इतिहासकारों के अनुसार गुरु रविदास का जन्म 1377 C.E. के दौरान उत्तर प्रदेश के सीर गोवर्धनपुर गांव में हुआ था। महान कवि, संत और भक्त रविदास जी निम्न जाति के थे, लेकिन उनके जीवन पर जाति का कोई प्रभाव नहीं पड़ा। रविदास जी भारत के उन महान लोगों में से एक हैं, जिनके विचार आज भी, हमें बड़ी सीख देते हैं। गुरु रविदास जी के न सिर्फ विचार, बल्कि उनके जीवन से जुड़ी कई महान और चमत्कारी घटनाएं आज भी सभी के प्रेरणा हैं। "गुरु ग्रंथ साहिब" में उनके 41 भक्ति गीत और कविताएँ हैं। उनके विचार आज भी संपूर्ण मानवता को सद्भाव सिखाते हैं। रविदास जी का जन्म निम्न जाति के परिवार में होने के कारण, लोग उन्हें अछूत मानते थे, लेकिन एक ऐसा समय आया, जब उनकी शिक्षाओं से प्रेरित होकर, ब्राह्मण, पुजारी और अन्य उच्च जाति के लोग भी गुरु रविदास जी के सामने झुकते थे। उनका मानना था कि जिस परिवार में भगवान का सच्चा भक्त है, वह न तो उच्च जाति है और न ही निम्न जाति, स्वामी और गरीब।"

Godman-Faith or Blind trust This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Godman-Faith or Blind trust

हर किसी की लाइफ में उतार-चढ़ाव आते हैं। कुछ लोगों का हौसला या अपनों का साथ, उन्हें प्रॉब्लम से बाहर निकलने में मदद करता है, तो कुछ लोग अकेले पड़ जाने की वजह से हार मान लेते हैं। ऐसे ही जिंदगी से हारे कुछ लोग या परिवार, एक ऐसा चमत्कार चाहते हैं, जो उन्हें उनकी परेशानियों से बाहर निकाल दे। और तब वो इस तलाश में जुट जाते है कि कौन उनके दुख, हताशा और निराशा का समाधान देगा। समस्याएं हमारी जिंदगी का हिस्सा हैं। कोई गरीबी से परेशान है, कोई अपनी पर्सनल या प्रोफेशनल लाइफ से, किसी को अपने प्यार को शादी के लिए राजी करना है, किसी को अच्छे मार्क्स लाने हैं, किसी की हेल्थ प्रॉब्लम और न जाने कितनी ही समस्याएं है मान लीजिए किसी के परिवार का कोई सदस्य बीमार पड़ जाता है। नैचुरल सी बात है, इलाज के लिए वो लोग डॉक्टर के पास जाएंगे। लेकिन कई बार, जब गंभीर बीमारी के चलते, डाक्टरी इलाज से भी उन्हें निराशा मिलती है, तो ऐसे लोग भगवान से उम्मीद लगाते हैं कि कोई चमत्कार हो जाए। ऐसी स्थिति में पूरे परिवार का साथ होता है, लेकिन फिर भी दुख के चलते कोई दूसरा रास्ता नहीं दिखता, तब आसपास के लोगों की राय या फिर वो व्यक्ति, खुद एक ऐसी तलाश में जुट जाता है, कि कहीं से उसकी समस्या का हल मिल जाए। और चमत्कार की इसी उम्मीद के साथ उसे, किसी दूसरे व्यक्ति, ईश्वर, एस्ट्रोलॉजी, झाड़-फूक, बाबा, तांत्रिक और आध्यात्मिक गुरुओं के बारे में पता चलता है। और इस तरह, जिंदगी से हारा वो इंसान या दुखी परिवार, अंत में किसी बाबा या तांत्रिक की शरण में पहुंच जाता है। भले ही उनकी वो बीमारी ठीक हो या नहीं, लेकिन एक उम्मीद उन्हें जीने का हौसला देती है।

who is responsible for communal riots? This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

who is responsible for communal riots?

देश की आजादी के बाद, 1970 का भिवंडी दंगा, साल 1984 के सिख विरोधी दंगे, 1989 के कश्मीर दंगे, 1992 का बाबरी मस्जिद विध्वंस और 2002 के गुजरात दंगों से लेकर साल 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों तक, देश के बहुत से, नागरिकों ने अपनों को खोया या फिर आर्थिक नुकसान झेला। और आज भी देश के किसी न किसी कोने में, कई राजनीतिक, धार्मिक और सांप्रदायिक दंगे देखने को मिलते हैं। लेकिन इनके लिए जिम्मेदार कौन है- जनता, administration या फिर राजनेता। भारत को एक शांत और अहिंसक देश कहा जाता है। यहीं पर गौतम बुद्ध, महावीर और गांधीजी जैसे पुरुषों ने शांति और सद्भाव के बारे में बात की है। लेकिन देश में दंगे आम बात है, सोचने की बात यह है कि दंगा आखिर करता कौन है। लाखों-करोडो लोगों की एक ऐसी भीड़, जिसमें मौजूद हर व्यक्ति को लगता है कि वो अपने आप में नेता है और न्याय करना, उसकी ड्यूटी है।

Social media's role and need for reform This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Social media's role and need for reform

आज के टाइम में इन्फॉरमेशन ही सब कुछ है और ये, या तो हमें, मीडिया प्रोवाइड कराती है। या फिर सोशल मीडिया के जरिए, हम पूरी दुनिया की, खबर रखते हैं। लेकिन क्या इंटरनेट के इस दौर में, सोशल मीडिया का सारा कंटेंट ऑथेंटिक और विश्वास करने योग्य है? क्या आप भी कन्फ्यूज हैं कि फेक न्यूज और ऑनलाइन स्कैम के चलते, किस पर भरोसा करें और किस पर नहीं? पिछले 20 सालों में कम्युनिकेशन की दुनिया पूरी तरह से बदल गई है। दो दशक पहले तक, कम्युनिकेशन का सिर्फ एक ही रास्ता था, और हमें, सिर्फ टेलीविजन, रेडियो और प्रिंट मीडिया के जरिए इन्फॉरमेशन मिलती थी। लेकिन आज, इंटरनेट और मोबाइल टेक्नोलॉजी के साथ, लोग अचानक एक वर्चुअल मोड में, पूरी दुनिया से जुड़ने लगे हैं। सबसे पहले हमें, मास मीडिया और सोशल मीडिया के अंतर को समझने की जरूरत है। मास मीडिया में आम जनता सिर्फ दर्शक होती है! television, radio, newspapers और मैगजीन को, मास मीडिया में कंसीडर किया जाता है। और दूसरी ओर, सोशल मीडिया में जनता ऑडियंस और कंटेंट प्रोड्यूसर, दोनों हो सकती है। फेसबुक, इंस्टाग्राम, youtube जैसे कई प्लैटफॉर्म इसके उदाहरण हैं, जिनके जरिए, लोग एक-दूसरे से कनेक्ट होते हैं। इंटरनेट ने अनगिनत मीडिया सोर्स को जन्म दिया है, जहां हम न सिर्फ न्यूज पा सकते हैं, बल्कि इसके साथ-साथ उन पर अपने व्यूज भी शेयर कर सकते हैं। लेकिन बिना वेरिफिकेशन या अप्रासंगिक खबरों के चलते, आज लोग ऐसे कंटेंट की तलाश में हैं, जो ऑथेंटिक हो, जिस पर वो भरोसा कर सकें।

Indian Coast Guard Day  This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Indian Coast Guard Day

हमारा देश सुरक्षित रहे, हम अपने घरों में सुरक्षित रहें, इसके लिए हमारी तीनों सेनाएं दिन-रात सरहदों पर रहती हैं। समुद्री रास्तों से अक्सर तस्करी के दृश्य आपने फिल्मों में तो जरूर देखें होंगे। उसी तस्करी को रोकने का काम करता है- भारतीय तटरक्षक यानी इंडियन कोस्ट गार्ड। आज इंडियन कोस्ट गार्ड अपना 45वां स्थापना दिवस मना रहा है। आज ही से शुरू हो रहा है- इंटरनेशनल फ्रैंडशिप मंथ- एक खूबसूरत रिश्ते यानी दोस्ती की सेलिब्रेशन का महीना। A-1 फरवरी, 1977 को भारतीय तट रक्षक अस्तित्व में आया और औपचारिक रूप से 18 अगस्त 1978 को एक स्वतंत्र सशस्त्र बल बना। इंडियन कोस्ट गार्ड ने अपने गठन के समय, सिर्फ 2 नौसेना फ़्रिगट और 5 गश्ती नौकाओं के साथ अपने सफर की शुरुआत की थी, और आज इसके पास 158 जहाज और 70 एयरक्राफ्ट हैं। वर्तमान में आईसीजी के पास, 42 कोस्ट गार्ड स्टेशन, 5 कोस्ट गार्ड एयर स्टेशन और 10 एयर एनक्लेव हैं। भारत की, लगभग 7500 किलोमीटर समुद्री सीमाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी इंडियन कोस्ट गार्ड, यानी भारतीय तटरक्षक की होती है। दुनिया के चौथे सबसे बड़ा तटरक्षक बल- इंडियन कोस्ट गार्ड देश की सुरक्षा में अहम रोल निभाता है। हर साल एक फरवरी को इंडियन कोस्ट गार्ड डे मनाया जाता है। 70 के दशक तक भारत में समुद्र के रास्ते तस्करी बहुत बढ गई थी, जिसके कारण हमारी अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव पड रहा था। रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला तटरक्षक बल भारतीय नौसेना की तरह ही काम करता है। इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय समुद्री अधिनियमों का पालन करवाना है। साथ ही मछुआरों की समस्याओं को हल करना, आपदा के समय उनका बचाव करना भी इनकी जिम्मेदारी में शामिल है।

Plastic, Environment and Health This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Plastic, Environment and Health

साल 1869 में John Wesley Hyatt ने पहला प्लास्टिक पॉलिमर इन्वेंट किया था, हालांकि पॉलिमर युग की शुरुआत साल 1907 से मानी जाती है, जब बैल्जियम कैमिस्ट- लियो बेकलैंड ने दुनिया की पहली प्लास्टिक यानी बैकेलाइट का आविष्कार किया, जो पूरी तरह से एक सिंथेटिक प्लास्टिक थी, इसमें कोई natural molecules नहीं थे। एक प्लास्टिक जिसका उपयोग बालों की कंघी से लेकर मूवी फिल्म तक, सभी में किया जाता था। देखते ही देखते 20वीं सदी में प्लास्टिक प्रोडक्टशन में एक क्रांति देखी गई, पुरम कैमरा और जीपीओ टेलीफोन उस समय के रेवोल्यूशनरी प्रोडक्शन थे। ट्रेड एसोसिएशन प्लास्टिक्स यूरोप की रिपोर्ट की बात करें, तो साल 1950 में दुनिया भर में प्रति वर्ष प्लास्टिक प्रोडक्शन लगभग 1.5 मिलियन मीट्रिक टन थी, जो साल 2018 में 359 मिलियन मीट्रिक टन हो गई। प्लास्टिक कचरे की समस्या का सबसे बड़ा और जीवंत सिंबल- पैसिफिक गारबेज पैच है, जिसे अक्सर प्रशांत महासागर में तैरते हुए टेक्सास के आकार के प्लास्टिक कचरा कहा जाता है। प्रकृति में हजारों टाइप की पॉलिमर मौजूद है। दुनिया में सबसे ज्यादा मात्रा में natural polymer- सेल्यूलोज पाया जाता है, जो पेड़ों में होता है। इतना ही नहीं, हमारे शरीर को बनाने वाले प्रोटीन पॉलिमर हैं, जिसमें डीएनए शामिल है। वर्तमान में प्लास्टिक की समस्या इतनी बढ़ गई है कि रिसर्च शो करती हैं कि इस प्लैनेट पर एक बच्चा, प्री पॉल्यूटेड पैदा होता है। उसके शरीर में सैकड़ों-हजारों कैमिकल पाए जाते हैं।

National Shaheed Diwas This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

National Shaheed Diwas

महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने गांधी जी के बारे में कहा था कि “भविष्य की पीढ़ियों को इस बात पर विश्वास करने में मुश्किल होगी कि हाड़-मांस से बना, ऐसा कोई व्यक्ति भी कभी धरती पर आया था।” आज महात्मा गांधी जी की पुणयतिथि है। देश की आजादी की लड़ाई में ''महात्मा गांधी जी'', एक ऐसा नाम है, जिसे न किसी पहचान की जरूरत है और न ही किसी व्याख्या की। उनकी श्रेष्ठता का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं, कि जिन ब्रिटिशों के खिलाफ उन्होंने भारत की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी, उसी देश ने गांधी जी के निधन के 21 साल बाद, उनके सम्मान में एक डाक टिकट जारी किया। एक सामान्य परिवार में जन्में, महात्मा गाँधी जी अपने असाधारण कार्यों और अहिंसावादी विचारों से पूरी दुनिया के मार्गदर्शक बन गए। पोरबंदर रियासत के दीवान, करमचंद गांधी जी के घर में 2 अक्तूबर, 1869 को जन्मे, महात्मा गांधी, अपने पिता की चौथी संतान थे। साल 1959 में गांधी जी की याद में भारत के तमिलनाडु राज्य के मदुरै शहर में, गांधी स्मारक संग्रहालय बनाया गया था। इसमें उनके खून से सने हुए वो कपड़े संभालकर रखे गए हैं, जो उन्होंने उस वक्त पहने थे, जब पूर्व बिरला हाउस के बगीचे में 30 जनवरी, 1948 को नाथूराम गोडसे ने उनकी हत्या कर दी थी। इस दिन, को भारत, हर साल, राष्ट्रीय शहीद दिवस मनाता है, लेकिन कुछ लोग मानते हैं कि नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी जी को, गोली मारकर सही किया। किन्हीं कारणों की वजह से, गांधी जी की आलोचना करते हैं। लेकिन देश के लिए उनके त्याग, समर्पण, निष्ठा और आम लोगों के प्रति उनके स्नेह के बावजूद, क्या उन्हें गलत ठहराना सही है?

The art of sharing free knowledge This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

The art of sharing free knowledge

जिंदगी में बगैर ज्ञान के कुछ नहीं पाया जा सकता, चाहे वो ज्ञान किताबों से हासिल किया हो या अपने व दुसरों के जीवन के अनुभव से। सीखने और ज्ञान पाने का सिलसिला ताउम्र चलता है। इसके लिए हम अपनी सारी धनराशि खर्च कर दें, तब भी हम सारी दुनिया का ज्ञान हासिल नहीं कर सकते। ज्ञान बांटने से बढ़ता है, लेकिन वर्तमान की विडंबना यह है कि आज आधे अधूरे ज्ञान वाले लोगों को, मुफ्त में ज्ञान बांटने की आदत हो गई है। क्या यह आदत सही है या फिर नुकसानदायक। सफलता इस बारे में नहीं है कि आप अपने जीवन में क्या हासिल करते हैं, बल्कि इस बारे में है कि आपकी सफल जिंदगी या ज्ञान दूसरों को कैसे इंस्पायर करता है। दान करने वाले को दानवीर कहा जाता है, उसी तरह ज्ञान बांटने वालों को ज्ञानवीर कहना सही होगा। ज्ञान से विनम्रता आती है, जिस प्रकार प्रेम हमें संपूर्ण बनाता है, ठीक वैसे ही ज्ञान हमें शक्ति देता है। एक कहावत है कि ज्ञान, बहुत शांत और मौन होता है। न सिर्फ लोगों से, बल्कि प्रकृति की हर चीज, हमें, कुछ न कुछ सिखाती है। व्यक्ति का ज्ञान ही उसके काम आता है, लेकिन अल्पज्ञान खतरनाक हो सकता है। अक्सर कुछ लोग थोड़ा सा ज्ञान पाते ही इतराने लगते हैं।

Birth anniversary of Lala Lajpat Rai This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Birth anniversary of Lala Lajpat Rai

भारत मां को वीरों की जननी कहा जाता है। इस धरती पर कई ऐसे वीर सपूत हुए हैं, जिन्होंने अपने जीवन की परवाह न करते हुए, देश को आजाद कराने के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया। ऐसे ही एक स्वतंत्रता सेनानी- शेर-ए-पंजाब, लाला लाजपत राय, जिन्होंने भारत की सरजमीं को आजाद कराने के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। यह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में गरम दल के तीन प्रमुख नेताओं लाल-बाल-पाल में से एक थे। आज देश उनकी 158वीं जयंती मना रहा है, तो आइये एक नजर डालते हैं उनके जीवन पर। पंजाब केसरी लाला लाजपत राय का जन्म 28 जनवरी, 1865 को फिरोजपुर, पंजाब में हुआ था। उनके पिता मुंशी राधा कृष्ण आजाद- फारसी और उर्दू के महान विद्वान थे और माता गुलाब देवी धार्मिक महिला थीं। प्रारंभ से ही लाजपत राय लेखन और भाषण में बहुत रुचि लेते थे। इन्होंने कुछ समय वकालत भी की। 1897 और 1899 में उन्होंने देश में आए अकाल में पीड़ितों की तन, मन और धन से सेवा की। स्थानीय लोगों के साथ मिलकर अनेक स्थानों पर अकाल में शिविर लगाए। इसके बाद जब 1905 में बंगाल का विभाजन किया गया था, तो लालाजी ने सुरेंद्रनाथ बनर्जी और विपिनचंद्र पाल जैसे आंदोलनकारियों से हाथ मिला लिया और इस तिकड़ी ने ब्रिटिश शासन की नाक में दम कर दिया था । लाल-बाल-पाल के नेतृत्व को, पूरे देश में भारी जनसमर्थन मिल रहा था। इन्‍होंने अपनी मुहिम के तहत ब्रिटेन में तैयार हुए सामान का बहिष्कार और व्यावसायिक संस्थाओं में हड़ताल के माध्यम से ब्रिटिश सरकार विरोध किया। स्वावलंबन से स्वराज्य प्राप्ति के पक्षधर लालाजी अपने विचारों की स्पष्टवादिता के चलते उग्रवादी नेता के रूप में काफी लोकप्रिय हुए।

National fun at work Place Day This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

National fun at work Place Day

आज का दिन ऑफिस और वर्क प्लेस में मौज मस्ती के दिन के तौर पर सेलिब्रेट किया जा रहा है! आपको शायद याद होगा कि आपके ऑफिस में लास्ट पार्टी कब हुई थी? या फिर कलीग्स के साथ, कोई ट्रिप प्लान की हो? लेकिन क्या आपको पता है कि पहली बार ‘‘ ऑफिस शब्द’’ कब यूज किया गया था! साल 1395 में एक इंग्लिश poet, राइटर और फिलोसोफर जेफ्री चैसर ने बिजनेस और ट्रेड की जगह को डिफाइन करने के लिए, इस शब्द का इस्तेमाल, किया था! यूएस में मनाए जाने वाले National fun at work Place दिवस का उद्देश्य, ऑफिस को एक पॉजिटिव और खुशहाल माहौल बनाना है! सन 1600 के बाद, मॉर्डन ऑफिस बिल्डिंग का एक नया युग शुरू हुआ! माना जाता है कि साल 1726 में बना The Old Admiralty, ऑफिस की पहली माॅर्डन building थी! यह एक तीन मंजिला इमारत थी, जिसमें आफिस, एक बोर्ड रूम और एडमिरल्टी के लॉर्ड्स के लिए अपार्टमेंट बने थे! और वर्कप्लेस पर ओपन स्पेस का कॉन्सेप्ट, साल 1906 में आया और साल 1963 में क्यूबिकल्स ने ऑफिस लाइफ में, पहला डेब्यू किया!

Republic Day of India This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Republic Day of India

साल 1930 में, 26 जनवरी को, भारत ने पूर्ण स्वराज दिवस मनाया था, क्योंकि उससे एक साल पहले, 1929 में इसी दिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने ब्रिटिश शासन के डोमिनियन स्टेटस का विरोध करते हुए ''भारतीय स्वतंत्रता की घोषणा'' यानी पूर्ण स्वराज का एलान किया था। इस तारीख से भारत का और भी इतिहास जुड़ा है, इसी दिन साल 1965 में हिन्दी भाषा को भारत की राष्ट्रभाषा भी घोषित किया गया था। इसके अलावा 26 जनवरी, 1950 को सारनाथ में अशोक के शेर को, भारत के राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में भी चुना गया था। आज देश के 74वें गणतंत्र दिवस के मौके पर, आइए इस रिपब्लिक कंट्री को और गहराई से जानें। गणतंत्र दिवस समारोह पहली बार साल 1950 में मनाया गया था! राजपथ पर बंदूकों के साथ परेड करते सैनिक, हवा में लहराता तिरंगा, विभिन्न राज्यों के कल्चर को रिप्रेजेंट करती झाकियां और देश की सेनाओं के कई अद्भुत करतब और एयरशो, हर किसी की अट्रैक्शन का सेंटर पॉइंट हैं। हालांकि 1955 में पहली बार इसे राजपथ पर आयोजित किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि पाकिस्तान के गवर्नर जनरल मलिक गुलाम मोहम्मद थे! इससे पहले इस उत्सव की मेजबानी नेशनल स्टेडियम, लाल किला और रामलीला मैदान किया करते थे। शायद आप जानते होंगे कि भारत के तत्कालीन सम्राट जॉर्ज पंचम के सम्मान में राजपथ को कभी किंग्स-वे के नाम से जाना जाता था। हालांकि आजादी के बाद सड़क का नाम बदलकर राजपथ कर दिया गया, और इसका मतलब भी किंग्स-वे होता है।

National voters day This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

National voters day

साल 1952 में पहले लोकसभा चुनाव में लगभग 104.5 मिलियन रुपये खर्च हुए थे, जबकि 2014 के आम चुनावों में लगभग 38.7 बिलियन रुपए यानी 3,870.3 करोड़ रुपए खर्च हुए थे। वोटिंग लोकतंत्र का आधार है, और वोट देना हर जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य भी है। साल 1950 में चुनाव आयोग की स्थापना की गई थी, ताकि इलेक्शन प्रोसेस को सही तरीके से चलाया जा सके। उसी दिन की याद में हर साल की तरह, आज पूरा भारत नेशनल वोटर्स डे मना रहा है। आज टूरिज्म डे भी है, यानी हमारे देश की सुंदर डायवर्सिटी को सेलिब्रेट करने का दिन। आज से हमारे नेचुरल एनवायरनमेंट में एक बदलाव देखने को मिलेगा, क्योंकि आज से भारतवर्ष वसंत ऋतु का स्वागत कर रहा है। A-शायद आपको पता हो कि पहला लोकसभा चुनाव 489 सीटों के लिए लड़ा गया था, लेकिन 1977 में इनकी संख्या बढ़ाकर 543 कर दी गई थी। 2014 लोकसभा चुनाव में, पहली बार नोटा की ऑप्शन का यूज किया गया था, जब लगभग 60 लाख वोटर्स ने इलैक्शन में खड़े सभी कैंडिडेट्स को चुनने में सहमति नहीं दिखाई थी। अगर वोटर्स की बात करें, तो 2019 के लोकसभा चुनावों के लिए 84.3 मिलियन वोटर्स थे। डेमोक्रेसी यानी लोकतंत्र शासन की एक ऐसी व्यवस्था, जो सरकार बनाने और चलाने में प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार देती है। यानी यह ऐसा शासन है, जो जनता के द्वारा, जनता के लिए के लिए चुना जाता है। भारत एक डेमोक्रेटिक देश है, यानी यहां भी वोटिंग द्वारा प्रतिनिधी चुने जाते हैं। तत्कालीन राष्ट्रपति श्रीमति प्रतिभापाटिल ने इसकी शुरुआत की थी, 25 जनवरी 2011 को नेशनल वोटर्स डे घोषित किया, और तभी से भारत हर साल लोकतंत्र के इस सुंदर उत्सव का जश्न मनाता है।

Uttar Pradesh Day This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Uttar Pradesh Day

देश की राजनीति से लेकर, धार्मिक और कल्चरल डाईवर्सिटी में अहम रोल निभाने वाला उत्तर प्रदेश, आज 73 साल का हो गया है! आज लड़कियों को समर्पित, नेशनल गर्ल चाइल्ड डे भी मनाया जा रहा है, जो समाज का एक मूल्यवान और शक्तिशाली हिस्सा हैं! एक लड़की को, अपने पिता के घर में जन्मी नन्हीं परी से, दूसरे घर की अमानत बनकर, एक मां बनने तक के सफर में, हर पड़ाव पर एक अलग किरदार निभाना पड़ता है! A- भारत का उत्तर प्रदेश राज्य, देश के इतिहास और वर्तमान का गौरव है! सदियों पुराने, वैदिक साहित्य का एक बड़ा हिस्सा, उत्तर प्रदेश के आश्रमों से संबंध रखता है, जिसमें महान भारतीय महाकाव्य रामायण और महाभारत सहित, भगवद्गीता और बौ़द्ध ग्रंथ शामिल है! साल 1947 में भारत सरकार ने जिस चार शेरों वाले प्रतीक स्तंभ को अपनाया, वो भी वाराणसी के पास सारनाथ में सम्राट अशोक से जुड़ा है! वहीं देश की आजादी की लड़ाई, में साल 1857 की अहम क्रांति उत्तर प्रदेश की धरती से जुड़ी है, जहां मेरठ, कानपुर और लखनऊ कं्राति की मशाल लिए आगे आए थे!

Parakram Diwas This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Parakram Diwas

क्रांतिकारी रासबिहारी बोस ने 40,000 सैनिक इकट्ठा किए और उन्हें सुभाष चंद्र बोस जी को सौंप दिया था। इस आजाद हिंद फौज को नेताजी ने, भारतीय राष्ट्रीय सेना का नाम दिया। इतना ही नहीं, इस नायक ने, आजादी से पहले ही, 21 अक्तूबर, 1943 को "आजाद हिंद सरकार" नाम से देश की सरकार भी घोषित कर दी थी। और जब, भारतीय राष्ट्रीय सेना ने, अंडमान और निकोबार द्वीप को अंग्रेजों से आजाद करवाया, तो इस सेना के मास्टरमाइंड नेताजी ने, उनका नाम भी बदलकर स्वराज और शहीद द्वीप रख दिया दिया था। आज इसी जज्बे की याद में पूरा भारत पराक्रम दिवस मना रहा है। भारत के कई वीर जवानों ने, देश के सुनहरे भविष्य की इबारत लिखी है, उनमें से एक स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी नेताजी सुभाष चंद्र बोस हैं। सुभाष चंद्र बोस जी का जन्म 1897 में उड़ीसा के कटक में बंगाली परिवार में हुआ था और आज उनकी 126वीं जयंती है। नेता जी के 14 भाई-बहन थे और उनके पिता जानकी नाथ बोस, और माँ प्रभादेवी थीं। नेता जी ने स्कूल में मैट्रिक की परीक्षा में दूसरा स्थान हासिल किया था। उच्च शिक्षा के लिए, उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय के तहत स्कॉटिश चर्च कॉलेज में दर्शनशास्त्र में बीए किया। साल 1919 में इंडियन सिविल सर्विसेज की परीक्षा में उन्हें चौथा रैंक मिला था। ब्रिटिश सरकार की सेवा करने की, उनकी इच्छा नहीं थी, इसलिए उन्होंने 1921 में अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

Auto Expo 2023 This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Auto Expo 2023

ऑटोमोटिव इंडस्ट्री में भारत के भविष्य को देखते हुए, साल 1985 में Society of Indian Automobile Manufacturers, Confederation of Indian Industry और Automotive Component Manufacturers Association of India मिलकर ऑटो एक्सपो का आइडिया लेकर आए। साल 1986 में पहला ऑटो एक्सपो, सफलता पूर्वक आयोजित किया गया था। इसका 16वां एडिशन साल 2022 में होना था, लेकिन कोविड 19 की वजह से यह एडिशन अभी हाल ही में, 13 से 18 जनवरी 2023 को हुआ है। ऑटो एक्सपो है क्या। वास्तव में, यह इवेंट दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा ऑटोमोटिव इवेंट है। एक ऐसा प्रोग्राम, जो प्रोडक्ट्स और टैक्नोलॉजिकल कॉन्सेप्ट के संदर्भ में मोटर व्हीकल की दुनिया को, एक मंच पर लाता है। एक ऑटो एक्सपो सिर्फ कारों के एग्जिबिशन और लॉन्च करने तक सीमित नहीं है, यह इस इंडस्ट्री की भविष्य की संभावनाओं, मैन्यूफैक्चरर्स की ब्रांड इमेज और ग्लोबल कॉन्सेप्ट को भारत में लाने के बारे में है।

Statehood Day of Manipur, Meghalaya and Tripura This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Statehood Day of Manipur, Meghalaya and Tripura

साल 1971-1972 को भारत के इतिहास में सिर्फ भारत-पाकिस्तान की जंग में हमारी जीत के लिए याद किया जाता है। लेकिन इस जंग के तुंरत बाद, भारत में एक और घटना हुई थी, जब भारत के 3 और राज्य बन गए। पूर्वोत्तर क्षेत्र अधिनियम के तहत मणिपुर, मेघालय और त्रिपुरा को 21 जनवरी 1972 को अलग राज्य का दर्जा दिया गया था। और इसी याद में, आज ये तीनों राज्य अपना स्टेटहुड डे सेलिब्रेट कर रहे हैं। 15 अगस्त 1947 से पहले, जो राज्य भारत से सटे थे, उनमें से ज्यादातर राज्यों के शासकों ने 'इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन' नामक एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत वो भारतीय संघ का हिस्सा बन गए। A-आजादी के कुछ दिन पहले, मणिपुर के महाराजा बोधचंद्र सिंह ने भारत सरकार के साथ, इसलिए हाथ मिलाया कि मणिपुर की आंतरिक स्वायत्तता को बनाए रखा जाएगा। जनमत का बहुत दबाव था, इसलिए महाराजा ने जून 1948 में मणिपुर में चुनाव कराया और तब यह राज्य, constitutional monarchy बन गया। यही नहीं, यह भारत का पहला हिस्सा बना, जहां सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर चुनाव हुआ था। हालांकि भारत सरकार सितंबर 1949 में, महाराजा पर दबाव बनाने में सफल रही, जिसके बाद उन्होंने विलय समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए।

International Day of Acceptance This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

International Day of Acceptance

आज यूएस में  National DJ Day   सेलिब्रेट किया जा रहा है! इसके अलावा, आज  International Day of Acceptance   भी मनाया जा रहा है! क्या कभी आपके साथ, ऐसा हुआ है, जब आपको किसी टीम के लिए नहीं चुना गया या फिर, जब आपके दोस्त आपके बिना फिल्म देखने चले गए। या कोई लड़का या लड़की, जिसे आप वास्तव में पसंद करते हैं, लेकिन वो आप से बात नहीं करता। या परिवार और सोसायटी में, आपको या फिर आपके विचारों को एक्सेप्ट नहीं किया गया हो? भले ही आपको अभी ठुकरा दिया गया हो, लेकिन यह दुनिया का अंत नहीं है। A-20 जनवरी को मनाया जाने वाला इंटरनेशनल डे ऑफ एक्सेप्टेंस, साल 2010 में पहली बार मनाया गया था! यह दिन हमें, स्वीकार करना सिखाता है, जीवन के हर सुख-दुख से लेकर हर चीज को! वैसे तो यह दिन स्पेशली एबल्ड लोगों के लिए समर्पित है! उनकी तमाम चुनौतियों के बावजूद, उन्हें गले लगाने का संदेश देता है! इस दिन को मनाने के पीछे, हमारी रियल लाइफ हीरो, एनी हॉपकिंस का विजन था! वो एक वकील, उद्यमी, कलाकार और छात्रा थीं! यह दिन विकलांग लोगों की सामाजिक स्वीकृति और स्वर्गीय एनी हॉपकिंस को सम्मानित करने के लिए समर्पित है।

Immigration impact on those, who left behind This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Immigration impact on those, who left behind

बच्चों के, विदेश जाने से, पूरे घर का माहौल बदल गया! सब कुछ वहीं था, वही घर, वही चारदीवारी, लेकिन बच्चों के बिना, घर सूना सा लगता था! उनके झगड़ों की आवाज, आज भी घर में गूंजती है! उनकी पसंद का खाना बनाना छूट गया और मैं, खुद के शौक, पूरे करना भी भूल गई! जिंदगी बहुत उदास, मानो, रुक सी गई हो! सब कुछ होते हुए भी, मैं, अंदर से बिलकुल खाली हो चुकी थी, अपने बच्चों के बिना, जो आज विदेश में खुश थे! पर मैं, यही तो चाहती थी, कि मेरे बच्चे खूब तरक्की करें, और आज वो कर रहे हैं! तो उनके आगे रो भी नहीं सकती और न ही उन्हें वापस लौटने के लिए बोल सकती हूं! सरकारी आंकड़ों के अनुसार साल, 2011 के बाद से अब तक, 1.6 मिलियन इंडियंस ने भारतीय नागरिकता छोड़ी है! इसके अलावा पढ़ाई, नौकरी या किसी और वजह से, हर साल 25 लाख भारतीय, विदेश चले जाते है! रोजगार की तलाश और एक अच्छे लाइफ स्टाइल की चाहत में, सिर्फ भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में लोग, दूसरे देशों में पलायन करते हैं! यूनाइटेड नेशंस का अनुमान है कि लगभग 232 मिलियन लोग अपनी बर्थ कंट्री, से बाहर रहते या काम करते हैं! ब्रिटेन में स्टैंड अलोन नाम की एक संस्था की रिपोर्ट बताती है कि ब्रिटेन में हर पांचवें परिवार में कोई एक सदस्य परिवार से अलग रहता है! वहीं युगांडा में 50 से ऊपर की उम्र के करीब 9% लोगों ने अकेले जीवन गुजारना शुरू कर दिया है!

celebrity owes towards a society This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

celebrity owes towards a society

अपने फेवरेट सेलिब्रिटी का वॉलपेपर यूज करना, अपने शरीर पर उनके नाम के टैटू बनवा लेना, बहुत आम बात है! आपका रोल मॉडल कौन सी सेलिब्रिटी, है- फिल्म इंडस्ट्री के सितारे, खिलाड़ी, पोलिटीशियन, आध्यात्मिक गुरु या कोई और मशहूर व्यक्ति? फेमस लोगों को, आम जनता क्यों फॉलो करती है, क्योंकि उन्होंने अपनी जिंदगी में सफलता हासिल की है, नाम, पैसा और शोहरत कमाई है। लेकिन क्या, इन सोशल इन्फ्लूएंर्स की, अपने फैन्ज के प्रति जिम्मेदारी नहीं है, कि वो समाज का एक आइडल आइकन बनें, न कि नेगेटिव इम्पैक्ट डालें। भारत ही नहीं, दुनियाभर में सेलिब्रिटीज, आम लोगों को बहुत प्रभावित करते हैं! और यह नेगेटिव और पॉजिटिव, दोनों तरीके का है! लोग डिफरेंट सेलिब्रिटीज को अपना, आइडल आइकन मानते हैं, और उनके जैसा बनने की कोशिश करते हैं! फेमस पर्सनेलिटीज के जैसा हेयर स्टाइल, उनकी डाइट, फैशन स्टाइल, उनके बात करने के तरीके, से लेकर, उनके पूरे लाइफ स्टाइल, को अपनाने की कोशिश करते हैं, और खासकर युवा!

international we are not broken day This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

international we are not broken day

आज ‘‘इंटरनेशनल we are Not broken day’’ सेलिब्रेट किया जा रहा है! मतलब हमें, टूटना और बिखरना गवारा नहीं है! अब जिंदगी और लोगों से लड़ते-लड़ते मैं, बहुत थक गया हूं, हार चुका हूं, और अंदर से बिखर रहा हूं? क्या आप भी ऐसा महसूस कर रहे हैं? एक बात बताइए, आप किसकी तरह बनना चाहते हैंः एक सेब, अंडा या फिर कॉफी बीन्स के जैसे? सवाल अजीब है, लेकिन इसका जवाब आपके ब्रोकन हार्ट की थेरेपी है, जिसे जानने के लिए वीडियो के अंत तक बने रहें! आज, के ही दिन, साल 1929 को कार्टून कैरेक्टर Popeye sailor मैन का जन्म हुआ था! क्या बचपन में आपकी मम्मी ने भी आपको यह कार्टून दिखाकर खूब पालक खिलाया है, यह बोलकर कि आप भी पोपेय जितने स्ट्रांग हो जाएंगे? A-आज 17 जनवरी को, हम ‘‘इंटरनेशनल वी आर नॉट ब्रोकन डे’’ मना रहे हैं। इस दिन का उद्देश्य लोगों को अवेयर करना और जिन लोगों की फिजिकल, मेंटल और इमोशनल ट्रॉमा की कोई हिस्ट्री रही है, उनके बारे में समाज की मानसिकता को बदलना है! साल 2019 में पहली बार, इंटरनेशनल वी आर नॉट ब्रोकन डे मनाया गया था। हालांकि यह दिन, 1873 में ब्रिटिश मनोवैज्ञानिक मायर्स के जन्म से जुड़ा है, जिन्होंने पहली बार फिजिकल और मेंटल trauma से पीड़ित लोगों का इलाज किया था! जाहिर सी बात है, जब हम किसी भी चीज के साथ पूरे दिल और दिमाग से जुड़ जाते हैं, चाहे वो रिश्ते हों या फिर कुछ भी, उनका नहीं मिल पाना या दूर होने का दर्द, हमसे बर्दाश्त नहीं होता! बीमारी, नौकरी खो देना, रिश्ते टूटने या किसी भी कारण पर, इससे पहले आप यह कहें कि आप टूट चुके हैं, हम आपको सिर्फ यह कहना चाहेंगे कि आप टूटे नहीं हैं, यह एक thought pattern है, जिसमें आप, सिर्फ उलझ गए हैं!

Divorce This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Divorce

तलाक का मतलब है विवाह-विच्छेद, जो शादी के पवित्र बंधन में बंधे पति-पत्नी को हमेशा के लिए अलग कर देता है! शादी के बाद जीवन साथी को छोड़ने के लिए सामान्यतः 2 शब्दों का प्रयोग किया जाता है- डायवोर्स, जो कि एक अंग्रेजी शब्द है और दूसरा- उर्दू शब्द तलाक! वास्तव में, हिन्दू धर्म में तलाक के लिए कोई शब्द ही नहीं है। कई कारणों में शादीशुदा जिंदगी में आपसी मनमुटाव इतना बढ़ जाता है कि बात तलाक तक पहुंच जाती है! तलाक एक शादी का अंत हो सकता है, लेकिन उन बाकी रिश्तों का क्या, जो इस शादी से बंधे थे? कोई भी इन्सान, इस उम्मीद से शादी नहीं करता है कि भविष्य में वो पवित्र रिश्ता टूट जाए, क्योंकि डायवोर्स, हमेशा ही दुख, चिंता और डर का एक ऐसा तूफान लेकर आता है, जो 2 परिवारों और अपने आसपास की सोसायटी को भी बुरे तरीके से प्रभावित करता है! एक हेल्दी रिलेशनशिप में लड़ाई-झगड़े होना, बहुत आम बात है! और कहा भी जाता है कि नाराजगी और लड़ाई-झगड़ों की वजह से रिश्तों में प्यार बरकरार रहता है, बशर्ते ये नोकझोंक, डायवोर्स तक न पहुंचे! वास्तव में रिश्तों की टूटन और वैवाहिक जीवन का बिखराव, आज के दौर का, एक कड़वा सच बन चुका है।

Indian Army Day This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Indian Army Day

लद्दाख घाटी का Bailey Bridge , दुनिया का सबसे ऊंचा ब्रिज है, जिसे अगस्त 1982 में इंडियन आर्मी ने बनाया था। इतना ही नहीं, दुनिया की सबसे ऊंची मोटर योग्य सड़क भी इंडियन आर्मी ने बनाई है, जो Khardungla Pass पर है। आज पूरा भारत, भारतीय सेना दिवस की 75वीं सालगिरह मना रहा है, लेकिन शायद आपको पता हो कि साल 1776 में, कोलकाता में ईस्ट इंडिया कंपनी की सरकार में तहत भारतीय सेना का गठन हुआ था। और आज, हमारी यह सेना रेगिस्तान से लेकर माइनस 60 डिग्री से कम टेंपरेचर वाले बर्फीले सियाचिन ग्लेशियर में सर्विस दे रहे हैं! बर्फ से जुड़ी गेम्ज के लिए आज वलर्ड स्नो डे भी मनाया जा रहा है! आज से 4 दिन तक चलने वाला पोंगल उत्सव भी शुरू हो रहा है! माना जाता है कि यह त्योहार कम से कम 2,000 साल पुराना है, जिसे पुराने समय में, थाई निरादल के नाम से मनाया जाता था। सैम मानेकशॉ के बाद, फील्ड मार्शल का खिताब पाने वाले दूसरे व्यक्ति K.M. करियप्पा के सम्मान में, हर साल 15 जनवरी को भारतीय सेना दिवस मनाया जाता है। आधिकारिक तौर पर भारतीय सेना 1 अप्रैल 1895 को बनी थी! भारत की आजादी के बाद से 14 जनवरी 1949 तक भारतीय सेना की कमान, अंग्रेज कमांडर जनरल रॉय फ्रांसिस बुचर के पास थी और 15 जनवरी 1949 को फील्ड मार्शल के. एम. करिअप्पा स्वतंत्र भारत के पहले भारतीय सेना प्रमुख बने थे! और इसलिए, सेना की कमान भारत के हाथों में आने के कारण ही, 15 जनवरी को सेना दिवस मनाया जाता है!

Makar Sankranti This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Makar Sankranti

भारत को यूं ही त्योहारों का देश नहीं कहा जाता, यहां साल का हर दिन कुछ रस्मों-रिवाजों के साथ आता है! और आज मकर संक्रांति के साथ, भारत में, कहीं पूजा-पाठ और गंगा में स्नान करते धार्मिक लोग दिखेंगे, तो कहीं कटी पतंग के पीछे भागते बच्चे! ऐसा माना जाता है कि सूर्य देव की अपने पुत्र शनि से कभी नहीं बनी। लेकिन मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव, शनि के पास जाते हैं और अंत में उन्हें क्षमा कर देते हैं। और इसीलिए मकर संक्रांति पर बोला जाता है कि ‘‘तिल गुड खा, गुड गुड बोला’’, जिसका मतलब है कि पिछले झगड़ों को भूलाकर, दूसरों को माफ करें और उनके साथ अच्छे से पेश आएं! इस त्योहार को भारत में, अलग-अलग नामों से मनाया जाता है, जैसे हरियाणा और पंजाब में इसे लोहड़ी, उत्तर प्रदेश में खिचड़ी, असम में माघ बिहू, बिहार में तिल संक्रांति, केरल में मकर विलक्कू, गुजरात में वासी उत्तरायण और पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर में- पौष संक्रांति के नाम से जाना जाता है। प्रकृति पूजक इस देश में सूर्य और जल की पूजा का बहुत महत्व है! और मकर संक्रांति पर, इन्हीं दोनों को सम्मान देने की परंपरा है। संक्रांति यानी संक्रमण काल। इस दिन सूर्य अपनी राशि बदल कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। यहीं से शीत ऋतु से कंपकंपाते लोगों को राहत की सांस मिलती है, क्योंकि सूर्य देव के उत्तर की ओर मूवेंट के साथ, दिन लंबे होने लगते है और सर्दी कम होने लगती है। यह त्योहार नई फसल का भी प्रतीक है, और इसलिए अग्नि देवता को नए अन्न का भोग लगाकर जश्न मनाया जाता है।

Happy Lohri This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Happy Lohri

सर्दियों में जब कोहरे और ठंड की वजह से हमारी एक्टिविटी कम हो जाती हैं, तब इस कपकपाते मौसम में गर्माहट लाता है लोहड़ी का त्योहार। घर, सोसायटी और बाजारों की शाम, बोन फायर से जगमगा उठती है, जब अग्नि देवता की पूजा करते हुए लोग अर्घ्य देते हैं। कितना कमाल का त्योहार है न। ढोल-नगाड़े पर जमकर नाचना, मूंगफली, गजक, पॉपकॉर्न और खासकर ये बोन फायर, जो आसमान से बरसते कोहरे में भी, हमें जमकर मौज-मस्ती करने का मौका देती है। आज, पूरे भारत में, लोहड़ी बड़ी धूमधाम से मनाई जा रही है। आइए, सूर्य और अग्नि देवता को समर्पित, इस त्योहार से जुड़ी कुछ रोचक कहानियों के साथ आगे बढ़ते हैं। जब भी लोहड़ी के त्यौहार की बात आती है, तो इसे सिर्फ पंजाब से जोड़ा जाता है। लेकिन वास्तव में, पंजाब, हरियाणा और हिमाचल के साथ-साथ पूरे भारत में, इस त्योहार के खास पकवान, नाच-गाने और बोनफायर की एनर्जी, देखी जा सकती है। लोहड़ी का त्यौहार पंजाब के रॉबिनहुड दुल्ला भट्टी को भी श्रद्धांजलि है, जो पंजाबी लड़कियों को गुलामों के बाजार में, बिकने से बचाया था।

National Youth day This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

National Youth day

बचपन में फल तोड़ने के लिए, या फिर बेवजह, आप भी पेड़ों पर जरूर चढ़े होंगे। एक ऐसा ही किस्सा, स्वामी विवेकानंद जी का है। एक दिन एक बुजुर्ग ने उन्हें, पेड़ पर चढ़ने से रोका, यह बोलकर कि उस पेड़ पर भूत रहता है। और अगर उस पेड़ पर कोई चढ़ा, तो वो उसकी गर्दन तोड़ कर मार देगा। विवेकानंद जी ने कहा' ठीक है। उनके सभी दोस्त डर गए, लेकिन जैसे ही वो बुजुर्ग वहां से गया, विवेकानंद दोबारा पेड़ पर चढ़ गए। तब उनके दोस्तों ने, पूछा कि वो ऐसा क्यों कर रहे हैं, यह जानते हुए भी कि भूत, उन्हें मारेगा। विवेकानंद ने हंसकर कहा- 'कितने मूर्ख हो तुम! किसी के कहने मात्र से हर बात पर विश्वास न करें! अगर बुजुर्ग दादा की कहानी सच होती, तो अब तक मेरी गर्दन टूट चुकी होती। आज स्वामी विवेकानंद जी की जयंती है और उनकी यह बातें, हमें सीख देती हैं कि सच और सही की परख करना सीखें, खासकर इस सोशल मीडिया के जमाने में। आज एक्टर अरूण गोविल का जन्मदिन, भी है, जिनके धार्मिक किरदार, की लोग आज भी इज्जत करते हैं। A-युवा हमारे देश का भविष्य हैं और हर राष्ट्र को उनका सम्मान करना चाहिए। भारत, हर साल 12 जनवरी को, स्वामी विवेकानंद जी को श्रद्धांजलि देने के लिए, नेशनल यूथ डे यानी राष्ट्रीय युवा दिवस मनाता है। भारत के अध्यात्मिक गुरु और युवाओं के आदर्श स्वामी विवेकानंद का जन्म कोलकाता में साल 1863 में एक गरीब परिवार में हुआ था। उनका बचपन का नाम नरेन्द्र नाथ दत्त था और वो अपने परिवार के नौ भाई-बहनों में से एक थे। उनकी शिक्षा हालांकि पश्चिमी तरीके से हुई, मगर भारतीय धर्म, संस्कृति और दर्शन से उन्हें प्यार था

World Road Safety Week This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

World Road Safety Week

Road Traffic Injuries, दुनिया में मौत का 8वां सबसे बड़ा कारण है। भारत में दुनिया के सिर्फ 1% व्हीकल हैं, लेकिन दुनिया के टोटल रोड एक्सीडेंट में Top पर है! वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर में, हर साल, रोड एक्सीडेंट में तकरीबन 1.3 मिलियन लोगों की जान जाती है। और तकरीबन 20 से 50 मिलियन लोग, इंजरी की वजह से, डिसेबल हो जाते हैं। भारत में रोड सेफ्टी के बारे में लोगों को अवेयर करने के लिए, आज से 17 जनवरी तक रोड सेफ्टी वीक मनाया जा रहा है। आज इंटरनेशनल थैंक यू डे, भी सेलिब्रेट किया जा रहा है, तो बताएं कि, आप किसी को थैंक्स- दिल से बोलते हैं, या फिर एक जिम्मेदारी या ट्रेंड समझकर। A- वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर साल लगभग 4.5 लाख रोड एक्सीडेंट होते हैं, जिनमें लगभग 1.5 लाख लोग मारे जाते हैं। यानी हर घंटे 53 रोड एक्सीडेंट और हर 4 मिनट में 1 व्यक्ति की मौत होती है। अगर पिछले एक दशक की बात करें, तो भारत की सड़कों पर 13 लाख लोगों की मौत हुई और 50 लाख जख्मी हुए हैं। ट्रैफिक रूल हर कोई जानता है, लेकिन हेलमेट नहीं पहनना है, क्योंकि हेयर स्टाइल खराब हो जाएगा! फुल टशन न दिखे सड़कों पर, तो फायदा क्या नई गाड़ी लेने का! ऐसी कई बातें, हमारे लिए आम हैं! हाल ही में, इसी लापरवाही का एक, चौंकाने वाला, दिल्ली का रोड एक्सीडेंट केस सामने आया है! अगर कार चालक, कार से उतर कर, टू व्हीलर पर सवार व्यक्ति को चेक कर लेते, तो लड़की की जान बच जाती! इसलिए मानवता और सहानुभूति रखते हुए पीड़ित की मदद के लिए आगे आना भी, हमारा कर्तव्य है!

World Hindi Day This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

World Hindi Day

आज विश्व हिंदी दिवस है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि प्रेम सागर हिंदी का पहला प्रकाशित उपन्यास था। हिंदी उन 7 भाषाओं में से एक है, जो वेब यूआरएल बनाने के लिए प्रयोग की जाती हैं। बंगला, गुरु और जंगल जैसे कुछेक अंग्रेजी शब्द, हिंदी से ही लिए गए हैं। और इससे भी इंटरेस्टिंग फैक्ट यह है कि, हिंदी और उर्दू की व्याख्या के लिए जो एक शब्द प्रयोग किया जाता है, वो है ‘‘हिंदुस्तानी’’। हिंदी दुनिया भर में लगभग 430 मिलियन लोगों की मूल भाषा यानी उनकी नेटिव लैंग्वेज है। शायद आपको पता हो कि, हिंदी का सबसे पुराना रूप अपभ्रंश है, जो संस्कृत की एक शाखा है। पावर लैंग्वेज इंडेक्स के अनुसार, हिंदी भाषा साल 2050 तक दुनिया की सबसे शक्तिशाली भाषाओं में से एक होगी। साल 1975 में पहला विश्व हिंदी सम्मेलन नागपुर में आयोजित किया गया था, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने किया था। इस दिन की यादगार में, पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने, 10 जनवरी 2006 को पहली बार, विश्व हिंदी दिवस मनाया और तब से, यह दिन हर साल मनाया जाता है, जबकि विश्व हिंदी सम्मेलन हर तीन साल में, एक बार होता है। विश्व हिंदी दिवस और राष्ट्रीय हिंदी दिवस को लेकर, लोग अक्सर कन्फ्यूज होते हैं! वास्तव में साल 1949 में 14 सितंबर को, देवनागरी लिपि में लिखी गई, हिंदी को भारत की राजभाषा बनाया था। और इसलिए भारत, हर साल, 14 सितंबर को राष्ट्रीय हिंदी दिवस मनाता है। वहीं, इस भाषा के लिए 26 जनवरी 1950 का दिन भी बहुत खास था, क्योंकि इस दिन संविधान के अनुच्छेद 343 में हिंदी को आधिकारिक भाषा के रूप में मान्यता दी गई।

The hardcore reality of Corruption This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

The hardcore reality of Corruption

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के करप्शन परसेप्शन इंडेक्स 2021 में, भारत का रैंक, 180 देशों में 85वां था! और इसी सर्वे के अनुसार भारत, साल 2020 में एशिया का सबसे करप्ट देश रह चुका है! हम अक्सर कहते हैं कि सरकार क्रप्ट है, पब्लिक सेक्टर और नेता भ्रष्ट हैं! लेकिन सरकार चला कौन रहा है- अ ग्रुप ऑफ पीपल! पब्लिक और पॉलिटिकल सेक्टर में काम कौन कर रहा है- हम और आप जैसे, इंसान! तो वास्तव में भ्रष्टाचारी है, कौन? और आखिर भ्रष्टाचार की जड़ क्या है? भ्रष्टाचार 2 शब्दों से मिलकर बना है, भ्रष्ट यानी बुरा और आचार का मतलब है- आचरण। यानी वो बर्ताव, जो किसी भी प्रकार से अनैतिक और अनुचित है। इसकी फंडामेंटल डेफिनेशन की बात करें, तो अपने निजी स्वार्थ के लिए, पावर का मिसयूज करना ही, क्रप्शन है! यह पैसे, अपनी पोजिशन या किसी भी रूप में हो सकती है! एक्चुअल में भ्रष्टाचार, किसी के लिए लाचारी है और किसी के लिए एक गोल्डन चांस! एक समय था, जब गलत काम करवाने के लिए रिश्वत दी जाती थी, लेकिन अब गलत के साथ साथ, सही काम करवाने के लिए भी रिश्वत देनी पड़ती है, ताकि टाइम पर काम हो जाए! वास्तव में हमने, रिश्वत देना, स्वीकार कर लिया है! जैसे किसी से कोई काम करवाना हो, तो हम पहले से ही अंदाजा लगा लेते हैं, कि उस काम पर खर्च के अलावा, इतना अमाउंट हमें रिश्वत देनी पड़ेगी!

Who’s responsible for Unemployment This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Who’s responsible for Unemployment

पुराने जमाने में आजीविका के लिए, चीजों का लेन-देन होता था! समय के साथ, यह तरीका बदला और आज वो मीडियम पैसा बन गया है! आजीविका का मतलब- रोटी, कपड़ा और मकान जैसी, जिंदगी की बुनियादी जरूरतों को पूरा करना है! यह सब खरीदने के लिए, पैसे की जरूरत है, और पैसों के लिए रोजगार की! लेकिन आज भारत में करोड़ों लोग, बेरोजगार हैं! दिसंबर 2022 की बात करें, तो देश में अब तक का हाईएस्ट अनएम्पलोयमेंट रेट था! लगभग 8.3%! आखिर, क्या है इस बेरोजगारी कड़वा सच? भारत की 140 करोड़ पोपूलेशन है और वर्कफोर्स 90 करोड़! वर्कफोर्स का मतलब- वो लोग हैं, जो काम करने के लिए कैपेबल हैं और वास्तव में किसी न किसी, काम में लगे हुए हैं! वहीं, इनकम का मतलब, सिर्फ कमाना नहीं है, आपकी सेविंग भी, इनडायरेक्टली आपकी इनकम है! उदाहरण के लिए हाउसवाइफ या हाउस मेकर, सेविंग का जरिया है! जैसे, घर से बाहर खाना खाना हो, पेमेंट करनी पड़ेगी, लेकिन घर पर ये कुकिंग चार्जेज नहीं देने पड़ते! हां, यह अलग बात है कि इन्हें वर्कफोर्स में कंसीडर नहीं किया जाता! जैसे जैसे भारत विकास की पटरी पर दौड़ रहा है, हमारी जरूरतें दिन ब दिन बढ़ने लगी हैं! बेरोजगारी आज का मुद्दा नहीं है, यह सालों से थी, लेकिन, आज यह पीक लेवल पर है! सरकार कुछ जाॅब निकालती है, तो उनके लिए लाखों-करोड़ों उम्मीदवार अप्लाई करते हैं! और तो और, एक चपरासी की नौकरी के लिए पीएचडी होल्डर, अप्लाई करने लगे हैं।

Infrastructure Development This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Infrastructure Development

डेवलपमेंट- हमारी लाइफ का प्रोसेस है और बदलाव, प्रकृति का रूल! समय के साथ, हम खुद में कई बदलाव लाकर, और बेहतर होने की कोशिश करते हैं, यही डेवलपमेंट है! डेवलपमेंट के लिए, अगर भारत की बात करें, तो Infrastructure का इसमें, बहुत अहम रोल है! बड़ी-बड़ी इमारतें, फैक्ट्रियां, सड़कें और ट्रांसपोर्ट, सहित, सारा पब्लिक और प्राइवेट इन्फ्रास्ट्रक्चर, हमारी अपलिफ्टमेंट की, एक बड़ी जरूरत है! वास्तव में, Infrastructure, देश की इक्नामिक ग्रोथ और modern civilization की backbone है। आसान शब्दों में कहें, तो इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के बिना, हेल्थ और वेल्थ दोनों ही पॉसिबल नहीं है! वल्र्ड बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, अगर भारत अपनी शहरी आबादी की जरूरतों को पूरा करना चाहता है, तो देश को अपने अर्बन इन्फ्रास्ट्रक्चर में अगले 15 सालों में 840 बिलियन डॉलर - या एवरेज 55 बिलियन डॉलर, हर साल इन्वेस्ट करना पड़ेगा! इस रिपोर्ट के अनुसार, साल 2036 तक, भारत की जनसंख्या के 40 प्रतिशत लोग, यानी 60 करोड़ लोग, शहरों में, निवास करेंगे! इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट हमारी जरूरत है, लेकिन अंधाधुंध कंस्ट्रक्शन, नेचर के साथ भी खिलवाड़ है, वहीं इससे शहरों पर बोझ भी बढ़ रहा है! इसलिए गांवों को डेवलप करके, शहरों के इस बरडन को कम किया जा सकता है! जब लोगों को गांवों में ही अस्पताल, अच्छी एजुकेशन, ला एंड ऑर्डर, और नौकरी जैसी तमाम सुविधाएं मिलेंगी, तो वो शहरों की ओर पलायन नहीं करेंगे! इससे शहरों की बढ़ती जनसंख्या आटोमैटिकली, कंट्रोल हो जाएगी!

World War Orphans Day This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

World War Orphans Day

आज, युद्ध की वजह से, अनाथ हुए बच्चों के लिए पूरी दुनिया में ''अनाथ दिवस'' मनाया जा रहा है। बचपन में जब कभी, अगर मां, घर में नहीं दिखती, तो शायद आपने भी, पूरा घर, अपने सिर पर उठाया होगा। दिनभर काम के बाद, शाम को, पिता के घर लौटने पर, लपक के, उनकी गोदी में बैठ जाना, शायद आपको भी याद हो। लेकिन, पूरी दुनिया में कुछ बच्चे, ऐसे हैं, जिनके सिर पर, ममता और लाड-प्यार की ये छांव, नहीं है। यूनिसेफ के अनुसार, दुनिया भर में 140 मिलियन से ज्यादा बच्चे अनाथ हैं। सड़कों पर, लैंडफिल और सीवर सिस्टम में रहने वाले बच्चे, तो शायद इस गिनती में भी नहीं होंगे। अगर भारत की बात करें, तो देश में तकरीबन 30 मिलियन अनाथ हैं! इनमें वो बच्चे भी शामिल हैं, जिनके परिवारों ने उन्हें छोड़ दिया है! आज का दिन, इसलिए भी खास है, क्योंकि आज इंडियन क्रिकेटर कपिल देव का जन्मदिन है! (A-अनाथ है कौन, एक ऐसा व्यक्ति, जिसकी देखभाल करने के लिए पिता, माता या कोई और फैलिमी मेंबर नहीं है। युद्ध की वजह से अनाथ बच्चों के लिए, वर्ल्ड वॉर ओरफन डे की शुरुआत, एक फ्रांसीसी संगठन, एस ओ एस एन फैंट्स एन डेट्रेस ने की थी! ज्यादातर अनाथ बच्चों को परिवार की केयर और प्यार नहीं मिल पाता! ऐसे लोगों के लिए अनाथालय ही, उनका घर-परिवार हैं, लेकिन देश का दुर्भाग्य है कि आज भी ज्यादातर बच्चे अपनी लाइफ की स्ट्रगल में या तो किसी भीख मांगने वाले गिरोह के हाथ लग गए हैं या फिर किसी का सहयोग या गाइडेंस नहीं होने की वजह से, फुटपाथ को ही अपना जीवन समझ चुके हैं! यह वो बच्चे हैं, जिनकी जिंदगी अकेलेपन, दुत्कार और गरीबी जैसी कई परेशानियों से भरी है, जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते! हमारा समाज, उन इंस्टीट्यूशनल होम, और कई लोगों का आभारी है, जो इंडिविजुअल लेवल पर, अनाथों की मदद करते हैं!

Why shouldn't be proud to be a Muslim! This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Why shouldn't be proud to be a Muslim!

हर किसी को अपने धर्म पर गर्व है, तो मुस्लिम होने पर, मैं गर्व क्यों न करूं! आप कोई काम करते होंगे, क्या उस पर आपको गर्व नहीं? क्या अपने काम के प्रति अपनी डेडिकेशन और विश्वास पर, आपको गर्व नहीं होना चाहिए? अपने धर्म पर प्राउड करना गलत नहीं है, लेकिन इसकी एक शर्त यह है कि यह प्राउड, आपको अहंकारी न बनाए, दूसरों के लिए हीन भावना रखने के लिए प्रेरित न करे, उनके साथ भेदभाव और उन्हें अपमानित करना न सिखाए। हमें अपने धर्म पर गर्व है, क्योंकि यह हमें, एक अच्छा इनसान बनाता है! मुस्लिमों की होली बुक- कुरान है! अल्लाह ने अपने मैसेंजर के रूप में पैगंबर हजरत मोहम्मद को चुना और उनके लिखे वचन आज, न सिर्फ मुसलमानों, बल्कि पूरी दुनिया को गाइड करते हैं! हमारे इस धर्म ग्रंथ की 6,666 आयतों में, मनुष्य के अस्तित्व, मानवता, समानता, न्याय और शांति से लेकर, मार्डन साइंस में पर्वत, सूर्य और समुद्र के बारे में एक विस्तृत ज्ञान दिया गया है! ‘‘हर व्यक्ति को उसके इरादे के लिए पुरस्कृत किया जाएगा’’, पैगंबर मुहम्मद के ये अलफाज़, हमें अपने इरादे को नेक रखने की हिदायत देते हैं! मुस्लिमों का आधा ईमान ही, खुद की साफ-सफाई में निहित है! और यही कारण है कि, यूरोपियों ने हाइजीन की वैल्यू इस्लाम से ही सीखी थी! प्रूवन फैक्ट है कि आज से सालों पहले, मार्डन साइंस की नींव भी, मुसलमानों ने रखी थी! इसके अलावा, फारसी व्हील और पानी का पंप दोनों ही, इस्लामिक आविष्कार हैं। कुरान ने मनुष्य की एकता और इन्सान की इंपॉर्टेंस पर जोर दिया है। कुरान में मानव के चार पहलू बताए गए हैं - हमारी फिजिकल क्रिएशन, हमारी आत्मा, हमारा स्वभाव और हमारा प्रकाश यानी एनलाइटमेंट! और ये सब ईश्वर से डायरेक्ट कनेक्टेड हैं!

Why I shouldn't be proud to be Hindu! This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Why I shouldn't be proud to be Hindu!

‘‘हिंदू होने पर क्यों न गर्व करू’’! इस सवाल का जवाब भी भगवत गीता है! गीता में कहा गया है कि गर्व हमें, जिस सवारी पर ले जाता है, उसका शुरू और अंत दोनों ही खतरनाक हैं! गर्व, अहंकार की शुरुआत है! इसलिए, इस मालिकाना और श्रेष्ठता के विचार से इतर, हम हिंदू धर्म के यथार्थ और इसकी सत्यता की बात करेंगे! हिंदू धर्म, एक ऐसा धर्म है, जिसने दुनिया को एक होना सिखाया, जिस धर्म ने मानवता में विश्वास करना सिखाया, जो धर्म हर किसी के लिए सम्मान की भावना रखता है और जिस धर्म ने पूरी दुनिया को ‘‘एक परिवार’’ मानने का संदेश दिया! यह एक ऐसा धर्म है, जो न सिर्फ मनुष्य, बल्कि जीवित प्राणी से लेकर पेड़ों, नदियों और पूरी प्रकृति का सम्मान और उनकी पूजा करता है! 10 हजार साल पुरानी वैदिक परंपरा और हिन्दू धर्म, की धार्मिक पुस्तकें- रामायण, श्रीमद भगवत गीता, महाभारत, पुराण और उपनिषद, में जीवन की हर समस्या का समाधान है! रामायण के चरित्र, हमें यह समझाते हैं कि हर इंसान में पॉजिटिव और नेगेटिव क्वालिटी मौजूद हैं! पॉजिटिव या नेगेटिव दोनों में से क्या चुनना है, यह हम पर निर्भर करता है! जैसे, सबसे ज्ञानी होने के बावजूद, रावण ने भी अहंकार को चुना! रामायण ने दुनिया को ‘‘माफ करने’’ का संदेश दिया है! यानी जिसमें दूसरों को माफ करने की क्वालिटी है, उसमें ईश्वर की सोच और उसके विचार है! किसी के कर्म और विचार गलत हो सकते हैं, लेकिन कोई भी इन्सान बुरा नहीं होता! किसी ने हमारे साथ गलत किया, तो हम हमेशा रिवेंज और गुस्से से भरे रहते हैं! ऐसे में किसी को माफ करके हम, खुद को आजाद करते हैं, खुद पर एक उपकार करते हैं, जिसकी वजह से हम, जीवन में, आगे बढ़ पाते हैं!

birth anniversary of Savitribai Phule This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

birth anniversary of Savitribai Phule

आज, feminist icon और समाज सुधारक सावित्रीबाई फुले की जयंती है। वो, भारत की पहली महिला टीचर बनीं, लेकिन उनका सफर आसान नहीं था। जब उन्होंने पहला महिला स्कूल खोला, तो ब्राह्मणों ने जमकर उनका विरोध किया! सिर्फ 17 साल की सावित्रीबाई, जब लड़कियों को पढ़ाने के लिए, स्कूल जाती थीं, तब लोग रास्ते में उन्हें गंदी गालियां देते और उनपर पत्थर और गोबर फेंकते थे लेकिन सावित्रीबाई बिना डरे, उनका सामना करती! वो हमेशा अपने साथ, एक एक्सट्रा साड़ी रखती थीं! साड़ी गंदी होने पर, उसे चेंज करके, स्कूल पहुंचती और रोज की तरह पढ़ाना शुरू करती! जिस स्कूल के लिए उन्होंने इतना सैक्रिफाइस किया, हमारा दुर्भाग्य है कि वो आज वो स्कूल, खंडहर बन चुका है! सावित्रीबाई फुले का जन्म, 3 जनवरी, 1831 को महाराष्ट्र के नायगांव - सतारा में हुआ था। यह भारत की वो, महानायिका हैं, जिन्होंने साल 1873 में, सत्यशोधक विवाह की प्रथा शुरू की! इस प्रथा की खासियत यह थी कि विवाहित जोड़ा, शिक्षा और समानता की शपथ लेता था! सावित्रीबाई फुले खुद अपनी शादी के वक्त, महज 9 साल की थीं! उनके पति यानी ज्योतिराव फुले, उस समय 13 साल के थे! एक बार जब, कुछ विदेशी लोग, ईसा मसीह की प्रेयर कर रहे थे! सावित्रीबाई ने उनके हाथ में किताब को देखा! बचपन और क्रियोसिटी की वजह से, उन विदेशियों ने सावित्री को वो किताब दी! पढ़ना नहीं आता था, इसलिए सावित्री किताब लेने में हिचकिचा रही थी! लेकिन किताब देने वाले ने कहा कि नहीं पढ़ना आता, तो इसके चित्रों को देखना, तुम्हें अच्छा लगेगा! और यही वो इंसीडेंस था, जो सावित्री की जिंदगी में एक नया मोड़ लेकर आया! यानी सावित्रीबाई की सबसे बेशकीमती चीज, वो किताब थी, जो ईसाई मिशनरी ने उन्हें दी थी!

What is the real aim of Education This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

What is the real aim of Education

हम चाहे, सीख कर अपना जीवन जीएं या फिर जीवन जी कर सीखें, लेकिन हमें सीखना तो पड़ेगा ही। शिक्षा और ज्ञान, ही हमारा आईना है। हम में से कुछ लोग अपनी जिंदगी जीते हैं और अपने या दूसरों के अनुभवों से सीखते हैं, या फिर, एजुकेशन के जरिए, प्रोपर ज्ञान हासिल करते हैं, लेकिन सीखने का यह प्रोसेस, हमेशा, हमारी लाइफ का सबसे इंपॉर्टेंट पार्ट है। ऐसा नहीं है कि एजुकेशन की वजह से, हमें सिर्फ फाइनेंशियल स्टेबिलिटी मिलती है, बल्कि सेल्फ कॉन्फिडेंट और अपने परिवार व समाज में सभ्य तरीके से रहना सिखाती है। एजुकेशन हमारे दिमाग को पॉलिश करती है, हमारे विचारों को नरिश करती है और दूसरों के लिए हमारे चरित्र और व्यवहार को अच्छा रखना सिखाती है। शिक्षा हमारे जीवन की वो बुनियाद है, जिस पर हमारा एक स्टेबल फ्यूचर बनता है। लेकिन सच्ची शिक्षा- दिमाग और दिल दोनों की ट्रेनिंग है। आज हिंसा, दूसरों के साथ गलत व्यवहार करना और नशे जैसी, तमाम बुराइयां हमारे समाज में हैं, और ये सब सिर्फ हम ही नहीं, बल्कि हमारे टीनेर्ज भी देख रहे हैं। क्रियोसिटी के चलते टीनेज में बच्चे बहुत जल्दी इन्फ्लूएंस होते हैं, ऐसे में एक डिग्री और एक्सीलेंस के सर्टिफिकेट के अलावा हमें अपने बच्चों को शिक्षा के अंतिम उद्देश्य को समझाने की कोशिश करनी चाहिए। अगर हम अपने बच्चों को समाज में एक अच्छा नागरिक, अच्छे दोस्त, माता-पिता और अच्छे colleague बनते देखना चाहते हैं, तो उन्हें ज्ञान और नैतिकता दोनों, देने की जरूरत है। यह काम सिर्फ एजुकेशनल इंस्टीट्यूट का नहीं है, इसमें परिवार और समाज का रोल भी अहम है। आखिरकार, बच्चे सबसे पहले अपने परिवार और समाज में ही उठने, बैठने से लेकर हर चीज सीखते हैं। इसका एक उदाहरण यह ले सकते हैं कि आप जिस भाषा में, अपने बच्चे के साथ बचपन से बात करते हैं, वो उसमें ही प्रोफिशिएंट हो जाता है। इसलिए संस्कारों और सभ्यता की नींव, घर से ही शुरू होती है।

Global Family Day This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Global Family Day

दुनिया में ग्लोबल फैमिली डे का कॉन्सेप्ट साल 1997 में शुरू हुआ, लेकिन भारत सदियों पहले ही वसुधैव कुटुम्बकम का संदेश दे चुका था। भारत, की यह फिलोसोफी, पूरे संसार को एक परिवार मानती है, जो हिंदू धर्म के महा उपनिषद से ली गई है! लोगों में सद्भाव और एकता बनाए रखने के लिए, आज पूरी दुनिया, ग्लोबल फैमिली डे और कमिटमेंट डे सेलिब्रेट कर रही है! आज साल की शुरुआत का पहला दिन है, और आज Universal Hour of Peace भी मनाया जा रहा है! आज नववर्ष के आगमन के साथ, हम पूरी दुनिया को एक अहिंसक और खुशी भरा माहौल देने की आशा कर सकते हैं, क्योंकि हर कोई इसका हकदार है! A-वैश्विक परिवार दिवस का विचार 1997 में, बच्चों की एक किताब के साथ आया, जिसका टाइटल था - वन डे इन पीस! इसके टाइटल के अकॉर्डिंग, उस साल इस दिन को विश्व शांति दिवस के तौर पर सेलिब्रेट किया गया! साल 1999 में यूएन और इसके मेंबर देशों ने पहली बार ग्लोबल फैमिली डे मनाया और साल 2001 में 1 जनवरी को, वैश्विक स्तर पर यह दिन मनाया गया। वन डे इन पीस टाइटल वाली यह पुस्तक, करीब 12 भाषाओं में ट्रांसलेट की गई, ताकि दुनिया भर में रहने वाले लोग इस बुक को समझ पाएं! नए साल पर हम अपने परिवार की शांति और खुशी की कामना करते हैं और ग्लोबल फैमिली डे की सेलिब्रेशन के साथ हम, पूरी दुनिया के हर धर्म और हर देश में शांति की उम्मीद रखते हैं! हालांकि, 15 मई को इंटरनेशनल फैमिली डे भी सेलिब्रेट किया जाता है!

New Year Eve This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

New Year Eve

आज साल का 365वां दिन है! इस साल आपके साथ क्या अच्छा और क्या बुरा हुआ? पेरेंट्स ने आपको मनचाहा गिफ्ट दिया हो! या आपने अपने माता-पिता की ख्वाहिश पूरी करके, उन्हें सबसे बड़ी खुशी दी हो? किसी एग्जाम में फेलियर, या फिर अपने पार्टनर, गर्लफ्रेंड या बॉयफ्रेंड के साथ ब्रेकअप, ने आपके इस पूरे साल को सैड बना दिया हो? या ऑफिस में आपके बॉस ने किसी और को प्रमोशन दे कर आपकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया हो? या फिर क्या इस साल आप अपनी पसंदीदा नौकरी पाने में कामयाब रहे? क्या आपने भी, किसी की बकवास से बचने के लिए सालभर गंगे-बहरे होने का ड्रामा किया है? आज ईयरएंड पर फ्यूचर प्लानिंग के अलावा, प्रोफिट और लॉस की यह कैलकुलेशन भी जरूरी है, जिसने आपको यादगार खट्टे-मीठे, तीखे और कड़वे लम्हें दिए होंगे! आज साल 2022 का अंतिम दिन है, लेकिन इसकी शुरुआत पर हमने कई रेजोल्यूशन पास किए होंगे- अपनी स्टडी, अपने करियर को लेकर या फिर अपनी पर्सनल लाइफ के लिए! कुछ लोग ऐसे होंगे, जिन्होंने अपनी पढ़ाई और करियर के लिए जितना सोचा था, उससे ज्यादा पा लिया होगा! आपके पास मौका है, उन अचीवमेंट्स को सेलिब्रेट और एन्जॉय करने का! आप अगर, अपने लक्ष्यों को नहीं पा सके हैं, तो निराशा और हताशा के बावजूद, आपके पास खुश होने का एक कारण जरूर है! और वो यह है कि आप कुछ सबक सीख गए होंगे!

Importance of House party This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Importance of House party

आपको पार्टी करना पसंद होगा, लेकिन क्या इस साल आपने कोई हाउस पार्टी, आग्रेनाइज की? चाहे एक टी पार्टी हो या फिर न्यू ईयर की सेलिब्रेशन! हम हर एक इवेंट को यादगार और फनी बनाने के लिए अपने दोस्तों के साथ, क्लब, रेस्टोरेंट या होटेल्ज में, बड़ी-बड़ी पार्टियां ऑग्रेनाइज करते हैं। लेकिन क्या आपको याद है कि, अपने परिवार के साथ, आपने लास्ट पार्टी, कब सेलिब्रेट की थी? हाउस पार्टी! एक ऐसा इवेंट, जिसे आप घर पर प्लान कर सकते हैं, इतना ही नहीं, पार्टी में कौन आएगा और किसे अवॉइड करना है, यह भी आप ही के हाथ में है! बाहर पार्टी करना, महंगा पड़ता है, लेकिन होम पार्टी आपका बजट बिगड़ने से बचा सकती है! अपना मनपसंद खाना, म्यूजिक और खासकर अपने परिवार के साथ, एन्जॉय करने के लिए होम पार्टी एक अच्छी ऑप्शन है! खाने-पीने और मौज-मस्ती के लिए पहली बार पार्टी शब्द का, इस्तेमाल 18वीं सदी की शुरुआत में हुआ! इसकी अहमियत को देखते हुए, पूरी दुनिया में 3 अप्रैल को वर्ल्ड पार्टी डे, सेलिब्रेट किया जाता है। और शायद आपको पता हो कि, अब तक की सबसे बड़ी टी-पार्टी भारत के इंदौर में हुई थी। जिस सिकंदर महान को युद्ध जीतने के लिए जाना जाता है, वो भी पार्टियों का बहुत शौकीन था। उसके इसी शौक के चलते उसने, गुस्से और नशे में सिटी पैलेस को जला दिया था, जब वो फारस को जीतने के बाद पर्सेपोलिस में पार्टी कर रहा था!

Guru Gobind Singh Jayanti This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

Guru Gobind Singh Jayanti

एक महान सिख गुरु, जो अपने पिता गुरु तेगबहादुर को खोने के बाद मात्र 9 साल की उम्र में, सिखों के दसवें गुरु बने। वो गुरु, जिन्होंने मानवता की गरिमा और अपने धर्म की रक्षा के लिए अपना और अपने पूरे परिवार का बलिदान दे दिया। उनके नेतृत्व में हुए चमकौर साहिब के युद्ध को आखिर कैसे भूल सकते हैं, जब 10 लाख मुगलों पर, मात्र 40 सिख भारी पड़े थे। जिनके 2 साहिबजादों को को जिंदा दीवार में चुनवा दिया गया था, आज उन गुरु गोबिंद सिंह जी की जयंती है। आज इंडियन फिल्म इंडस्ट्री के उस मशहूर एक्टर की बर्थ एनिवर्सरी भी है, जिसकी एक झलक पाने के लिए महिलाएं रात-रात भर उनके घर के बाहर इंतजार करती थीं। और कुछ के प्यार की इंतहा तब हुई, जब कईयों ने उनकी फोटो के साथ शादी कर ली थी। यह कोई और नहीं, 1960 - 70 के दशक के टॉप हीरो राजेश खन्ना हैं, जिनके लिए महिलाएं मर-मिटने को तैयार थीं। A-गुरु तेग बहादुर और माता गुजरी के घर पटना साहिब में पौष शुक्ल सप्तमी संवत 1723 यानी 22 दिसम्बर 1666 को गुरु गोबिंद राय का जन्म हुआ, जो बाद में गुरु गोबिंद सिंह जी कहलाए। एक महान योद्धा, कवि और आध्यात्मिक गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी ने 1699 में बैसाखी के दिन खालसा पंथ की स्थापना की थी। उन्हें सरबंसदानी इसलिए कहा गया, क्योंकि उन्होंने अपने आप और परिवार को केवल अत्याचार के खिलाफ लड़ने के लिए कुर्बान कर दिया। "वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतेह" उन्हीं की देन है।

What is Freedom This Post Design By The Revolution Deshbhakt Hindustani

What is Freedom

फ्रीडम है क्या - आपकी आजाद सोच और विचार। आप कुछ खाना चाहते हैं, खा लिया। सोना चाहते हैं, सो गए, क्या यह आजादी है, बिलकुल नहीं! यह तो सिर्फ लाइफ जीने का एक तरीका है। मोस्ट ऑफ दि टाइम, हम दूसरों की सोच के अकॉरडिंग, अपनी लाइफ को क्राफ्ट करते हैं। ऐसा करके हम अपने विचारों या खुद को, थोड़ा लिमिट करने का ट्राई करते हैं। लेकिन कुछ नियम-कायदों में रहने का मतलब यह नहीं है कि आपकी आजादी छिन रही है, बल्कि यह डिसिप्लिन ही, हमारी आजादी की bottom line है। जैसे कि freedom of expression है, लेकिन इसका मतलब यह तो नहीं, कि आप किसी को भी, गाली निकाल सकते हैं। आपकी आजादी, से किसी को ठेस नहीं पहुंचनी चाहिए। फ्रीडम वो है जो- आपको नरिश करे, आपको और बेहतर बनाए। हमारी पर्सनल लाइफ में फ्रीडम क्या है? हम सब एक डेली रूटीन को फॉलो करते हैं, कोई स्टूडेंट है, कोई प्रोफेशनल पर्सन और कोई हाउसवाइफ या कुछ भी! लेकिन कई बार आपके अपने, आपको कुछ रूल-रेगुलेशन में रहने के लिए कहते हैं! मान लीजिए किसी स्टूडेंट को टाइम पर घर लौटने, नशे या एक खराब संगत से दूर रहने या फिर आपको एक हेल्थी लाइफ स्टाइल अपनाने के लिए कहा जाता है! आपको यह रोकटोक, बुरी लगेगी, क्योंकि हम अपने तरीके से जिंदगी जीना पसंद करते हैं! लेकिन आप इन बातों को सीरियस नहीं लेते है, तो अंत में आपको, बहुत खराब सिुचएशन फेस करनी पड़ सकती हैं! आपकी हेल्थ और करियर खराब हो सकता है और इस सब से आप बचे रहें, इसलिए कुछ लोग, आपको अपने अनुभव के आधार पर, नियम-कायदे समझाते हैं! अब यह आप पर डिपेंड करता है कि आप खुशी से इस डिसिप्लिन को अपना लेते हैं या फिर कुछ नुकसान के बाद, तो आप खुद, अपनी आजादी को थोड़ा लिमिट कर ह